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प्राने नियम का परचिला भाग।
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इबरी भाषा से हिंदुई में उतारा गया।
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परान नियम के पहले भाग को पुस्तक।
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पहकिलो राजावलोौ २२ ट्सरौ राजावलों पु
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उत्पत्ति को पुस्तक ।
९ पहिला पब्बे।
संभ में इंश्र ने आकाश और एथिवी के सिरजा॥ २। और एथिवी बेडौल और रूनी थी और गहिराव पर अंधियारा था ओर ईमश्वर का आत्मा जल के ऊपर
चाय
डालता था॥
३ ओर ईय्यर ने कहा कि उंजियाला हावे और उंजियाला हे गया॥ ४। और ईखर ने उंजियाले का रेखा कि अच्छा हे ओर ईअर ने लंजियाले के अंधियारे से विभाग किया ॥ ५। ओर ईयर ने उंजि- याले के! टिन और अंधियारे के! रात कहा ओर सांस ओर बिहान पहिला दिन हुआ॥ ६। और ईश्र ने कहा कि पानियों के मध्य में आकाश हेवे ओर पानियों का पानियों से बिभाग करे॥ ७। तब इंसर ने आकाश के बनाया और आकाश के नीचे के पानियों का आकाश के ऊपर के पानियों से विभाग किया और एसा हे। गया॥ ए८। और ईस्र ने आकाश के खरे कहा और सांकक ओर बिहान ट्टसरा दिन हुआ॥ <। ओर ईय्घर ने कहा कि खर्ग के तले के पानी एकह्ी स्थान में एकड़ हेवें और रूखी दिखाई टेवे और ऐसा हे गया ॥ ९०। और ईस्र ने रूखी के। भूमि कहा और एकट्टे किये गये पानियों के समुद्र कहा ओर ईअर ने देखाकि अच्छा हे ॥ १५९। और ईम्घर ने कहा कि भूमि घास के ओर साग पात के जिन में बीज हेवें और
] [8, 9/ के]
र् उत्पत्ति [९ पन्ने
फलवंत पेड़ का जे अपनी अपनी भांति के समान फल जिन के बीज भूमि पर उन में हेवें उगावे और ऐसा हे! गया ॥ ९२। और भूमि ने घास ओर साग पात के अपनी अपनी भांति के समान जिन में बीज हेपवें और फलवंत पेड़ का जिस का बीज उस में हेावे उस की भांति के समान उगाया और ईय्यर ने टेखा कि अच्छा ह्े। १९५३। ओर सांस ओर बिहान तौसंरा टिन हुआ॥ १५४। ओर ईशखर ने कहा कि टिन ओर रात में बिभाग करने के! खग के आकाश में ज्योति होंवें और वे चिज़्ां और क्हतन ओर टिनों और बणां के कारए हेवें॥ १५ । और वे एथिवी के उंजियाली करने के! खगे के आकाश में ज्याति के लिये हेवें और एसा हे गया॥ १५६। ओर ईय्वर ने दो बड़ी ज्योति बनाई एक बड़ी ज्याति टन पर प्रभता के लिये और उडउद्मे छोटी ज्योति रात पर प्रभता के लिये ओर तारों को भी॥ १५७। और ईश्र ने उन्हें खगे के आकाश में रक्खा कि एथिवी पर उंजियाला करें। ९८। और ट्नि पर और रात पर प्रभता करें और उंजियाले का अंधियारे से विभाग करें और ईम्वर ने टखा कि अच्छा क्षे। १५९। और सांस ओर बिहान चैथा टिन हुआ॥ २०। और ईम्र ने कहा कि पानी जीवघारी रेगवैंयें की बहुताई से भर जाय श्र पक्षी एथिवी के ऊपर खगे के आकाश पर उड़े॥ २९। सेईम्वर ने बड़ी बड़ी मछलियों और हर एक रेंगविये जीवधारी के जिन से पानी भरा हे उन की भांति भांति के समान और हर एक पक्षी के! उस की भांति के समान बहुताई से उत्पन्न किया और इग्वर ने टेखा कि अच्छा हे। २२। ओर ईश्वर ने उन का आशीष टेके कहा कि फलमान हे ओर बढ़े और समट्रां के पानियों में भर जाओ और पत्ची एथिवी पर बढ़ें। २३। और सांम्म और विहान पांचवां टिन हुआ। २४। ओर ईयर ने कहा कि एथिवी हर एक जीवधारी के उस की भांति भांति के समान अथात ठाोर और रेंस- बैथे जंतु के और बनैले पशु के उस की भांति के समान उपजावे और ऐसा हे! गया॥ २५। ओर ईअश्र ने बनेले पश के उस की भांति के समान गैर ठार के उस की भांति के समान और एथिवी के हर एक रेंगवैय जंतु का उस की भांति के समान बनाया और ईस्वर ने टेखा कि
२ पत्बे] कौ प॒स्तक । ३
अच्छा क्ैे॥ २६। तबईय्पर ने कहा कि हम मनव्य का अपने खरूप में अपने समान बनावें ओर वे समट्र की मछलियों ओर आकाश के पक्षियों और ठेर ओऔ_र सारी एथिवी पर और एथिवी पर के हर एक रेंगवैये जंतु पर प्रधान हावें॥ २७। तब ईआर ने मन॒व्य का अपने खरूप में उत्पन्न किया उस ने उसे ईय्पघर के खरूप में उत्पन्न किया उस ने उन्हें नर और नारी बनाया॥ श८। और ईख्र ने उन्हें आशीष टिया और ईम्घर ने उन्हें कहा कि फलवान होओ7 और बढ़ा और एथिवी में भर जाओ और उसे बश में करो और समर की मछलियों और आकाश के पक्षियों और एथिवी के हर एक रेंगवैयथ जीवधारी पर प्रभता करो।
२८ और ईश्यर ने कहा ला में ने हर एक बीजघारी साग पात का जो सारी एथिवी पर क्षे और हर एक पेड़ के जिस में फल है जे बीज उप- जावता है तम्हें टिया यह तम्हारे खाने के लिये हेगा॥ ३०। और एथिवी के हर एक पश् के ओर आकाश के हर एक पच्छी का और एथिवी के हर एक रंगवैये जीवधारी का हर एक प्रकार की हरियालो भी खाने के टिई और एसा हुआ॥ ३९। फिर परमेग्वर ने हर एक बस्त पर जिसे उस ने बनाया था दृष्टि किई और ट्खा कि बहुत अच्छी है और सांस और विहान छटठवां दिन हुआ ॥
२ टूूसरा पब्ब ॥
ञ्य खगे और एथिवी और उन की सारी सेना बन गई ॥ ९। ओर ईंख्वर नेअपने कार्य का जा वह करता था सातवें टिन समाप्त किया ओर उस ने सातंवें दिन में अपने सारे कार्य से जे। उस ने किया था विश्राम किया॥ ३। और इंगस्वर ने सातवं दिन का आशीष दिई और उसे पवित्र उहराया इस कारण कि उसी में उस ने अपने सार कार्य से जा ईस्बर ने उत्पन्न किया और बनाया विश्राम किया॥ ४। यह खर्भे ओर एथिवी की उत्पत्ति हे जब वे उत्पन्न हुये जिस दिन परमेग्र इंस्वर ने खभे ओर एथिवी के। बनाया ॥ ५। ओर खेत का केई साग पात अब ले एथिवी पर न था और खेत की काई हरियाली अब लो न उगी थी क्यांकि परमेग्यर ईस्वर ने प्थिवी पर मेंह न बसे (या था,
४ उत्पत्ति [२ पन्ने
और केई मनव्य न था कि भमि की खेती करे॥ ६। गशऔर एथिवी से कचह्ठासा उठता था और समस्त भमि का सौंचता था॥ ७। तब परमेश्वर ईश्वर ने भमि की घल से मनव्य का बनाया और उस के नथनों में जीवन का ग्थास फंका और मनव्य जीवता प्राण हुआ।
। और परमेश्वर ईस्वर ने अदन में परब की ओर एक बारी लगाई और उस मनव्य के जिसे उस ने बनाया था उस में रक्वा॥ 6। ओर परमेग्पर ईम्वर ने हर एक पेड़ का जो देखने में सन्द्र और खाने में अच्छा हे ओर उस बारी के मध्य में जीवन का पेड़ और भले बरे के ज्ञान का पेड़ भमि से उगाया॥ २९०। और उस बारी को सौंचने के लिये अदन से एक नदी निकली और वहां से विभाग हेके चार मेहाने हुए ॥ ९९॥। पहिली का नान फेर्ून जे हवीलः की सारी भूमि का घेरती है जहां सेना हेता क्ञे॥ ९२। उस भूमि का सोना चाखा है वहां मेतती और विज्लौर हेता हैं॥ १३। ओर ट्ूसरी नदी का नाम जैह्न है जो कश की सारी भमि के घेरती हे ॥ १५४। और तीसरी नदी का नाम ट्जिलः है जे अस्हर की परब ओर जाती है और चैथी नी फरात है॥ १९५। ओर परमेग्र ईश्वर ने उस मनव्य का लेके अटन की बारी में रकवा जिसतें उसे सघारे और उस की रखवाली करे ॥ ९६ । और परमेगश्वर ईश्वर ने मनुय्य का आज्ञा दके कहा कि तू इस बारी के हर एक पेड़ का फल खाया कर ॥ १५७। परन्तु भले ओर बुरे के ज्ञान के पेड़ से मत खाना क्योंकि जिस ट्न त उस्झ खायगा त् निःे्चयय मरेगा॥ १८ और परमेम्वर ईम्घर ने कहा कि मनव्य के अकेला रहना अच्छा नहीं में उस के लिय एक उपकारिणी उस के समान बनाऊंगा॥ १५८। ओऔर परमेस्वर ईस्थर भमि से हर एक बनैले पए और आकाश के सारे पच्ची बनाकर उन को मनव्य के पास लाया कि ट्ख कि उन के क्या क्या नाम रखता कै और जे कछ कि मनव्य ने हर एक जीते जंत के कहा वही उस का नाम हुआ॥ २०। और मनव्य ने हर एक ठार और आकाश के पक्षी ओर हर एक बनेले पशु का नाम रकवा पर आदम के लिये उस के समान कोई उपकारिणी न मिली॥ २९। और परमेग्थर ईम्वर ने मनव्य का बड़ी नीन््द में डाला और वुच्द सा गया तब उस ने उस की
३ पब्बे] की पस्तक । धू
पसलियों में से एक निकाली ओर उस की संती मांस भर टिया॥ २२ और परमेम्र ईय्घर ने मनस्य की उस पसली से जे। डस ने लिई थी एक नारी बनाई और उसे नर पास लाया॥ २३। तब नर बाला यह तो मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे मांस में का मांस वुद्द नारी कहलावेगी क्योंकि यह नर से निकाली गई॥ २४। इस लिये मनुय्य अपने माता पिता के छोड़ेगा और अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक मांस हांगे॥ २४५ ओर मनुस्य ओर उस की पत्नी ट्नों के दानों नग्र थे और लज्जित न थे ॥
३ तीसरा पत्ते ।
ब सप्पं भमि के हर एक पश से जिसे परमेग्घर इंस्वर ने बनाया जा था घत्ते था ओआर उस ने सती से कहा क्या निश्यय ईय्घर ने कहा है कि तुम इस बारी के हर एक पेड़ से न खाना ?॥ २ । स्त्री ने सरप्प॑ से
कहा कि हम तो इस बारी के पेड़ां का फल खाते हैं ॥ ३। परन्त उस पेड़ का फल जो बारी के बीच में हे ईश्वर ने कहा हे कि तम उस्मेन खाना ओर न छूना न हे। कि मर जाओ ॥ ४। तब उर्प्य ने स्त्रौ से कहा कितम निशञ्वय न मरागे॥ ५ । क्योंकि ईश्वर जानता है कि जिस दिन तम उसमे खाओशगे तम्हारी आंखें खल जायेंगी और तम भले और बरे की पहिचान में इंस्थर के समान हे जाओगे॥ ६। ओर जबस्तो ने देखा कि वह पेड़ खाने में सुखाद और दृष्टि में सन्दर गऔर बड्डि देने के योग्य हे तो उस के फल में से लिया ओर खाया ओर अपने पति के भी दिया और उस ने खाया ॥ ७। तब उन ट्ोनों की आंखें खल गई और वे जान गये कि हम नंग हें से। उन््हां ने गलर के पत्तों का मिला के सीआ और अपने लिये ओआढ़ना वनाया॥ ८। और दिन के ठंढे में उन्हें ने परमेम्मर इंगख्वर का शब्द जा बारी में चलता था सना तब मन॒व्य और उस की पत्नी ने अपने का परमेम्वर ईम्वर के आगे से बारी के पेड़ों में छिपाया ॥ €। तब परमेग्यर ईंग्घर ने मनव्य के पकारा ओर कहा कि तू कहां क्षे। ९०। व॒ुह बोला कि में ने तेरा शब्द बारी में सना और डरा क्योंकि में नंगा था इस कारण में ने अपने का छिपाया॥ २९१।
् उत्पत्ति [३ पब्बे
और उस ने कहा कि किस ने तुम्क जताया कि त नंगा ह क्या त ने उस पेड़ से खाया जो में ने तम्मी खाने से बरजा था॥ ९५०५। गऔर मनव्य ने कहा कि इस स्वी ने जा त ने मेरे संग रक्खी मस्के उस पेड़ से टिया और में ने खाया॥ २९३। तब परमेग्यर ईस्वर ने उस स्त्री से कहा कि यह त ने क्या किया हे स्त्री बाली कि सप्प ने मम्मे बहकाया ओर में ने खाया ॥ ९ ४। तब परमेस्पर ईसर ने सप्पे से कहा कि जे। तू ने यह किया क्ञे इस कारण त सारे ठार और हर एक बन के पशन से अधिक स्वापित हेगा त अपने पेट के बल चलेगा और अपने जीवन भर धूल खाया करेगा ॥ ९५ । और में तम्क में ओर सती में ओर तेरे बंश और उस के बंश में कर डालेंगा वह तेरे सिर के! कचिलेगा और त उस की एड़ी के! कचि- लेगा॥ १६। ओर उस ने स्त्री के! कहा कि में तेरी पीड़ा और गर्भ घारण के बहुत बढाऊंगा त पीड़ा से बालक जनेगी ओर तेरी इच्छा तेरे पति पर होगी और व॒च्ठ तम्र पर प्रभता करेगा॥ ५७। और उस ने आटम से कहा कि त ने जे। अपनी पत्नी का शब्द माना हे और जिस पेड का में ने तम्के खाने से बरजाथा त ने खाया कै इस कारण भमि तेरे लिये खापित हे अपने जीवन भर त उत्म पीड़ा के साथ खायगा॥ ९८। बुच्द कांटे और जंटकटारे तेरे लिये उगायेगी और त् खेत का साग पात खायगा॥ १५८। अपने मुंह के पसीने से तू रोटी खायगा जब लो 'त् भमि में फिर न मिल जाय क्योंकि त उद्यम निकाला गया इस लिये कि त घल है और घल में फिर जायगा॥ २०। और आम ने अपनी पत्नी का नाम हवः रक्खा इस कारण एके वह समस्त जीवतों की माता थी ॥ २९। और परमेगस्वर ईश्वर ने आट्म और उस की पत्नी के लिये चमड़े के ओढ़ने बनाये और उन्हें पच्दिनाये॥ २२। और परमेम्धर ईस्वर ने कहा कि टेखे। मनय्य भले ब रे के जात्ने में हम में से एक की नाई हुआ ओर अब ऐसा न हावे कि वह अपना हाथ डाले ओर जीवन के पेड़ में से भी लेकर खावे और अमर हे। जाय ॥ २३। इस लिये परमेप्यर ईस्मर ने उस के! अटन की बारी से बाहर किया जिसतें वह भरत की किसनई कर जिस्य वह लिया गया था॥ २४। से उस
श्उ २३०.
ने मनव्य के! निकाल टिया और अटन की बारी की पब ओर करो-
8 पब्बे ] की पस्तक । रु
बीम ठह्तराये ओर चमकते हुए खड़ का जा चारों आर घमता था जिसते जीवन के पेड़ के मागे की रखवाली करें।
[>. ८ ४ चाथा पब्व ।
ञ' आदउम ने अपनी पत्नी हवः के। ग्रहण किया और वह गर्भिणी हुई ओर उडछर्मसे काइन उत्पन्न हुआ ओर बोली कि में ने परमेग्वर से एक परुष पायां॥ २। और फिर वह उस के भाई हावील का जनी और हाबील भेड़ां का चरवाहा हुआ परन्त काइन किसनई करता था॥ ३। ओर कितने दिनों के पीछ यों हुआ कि काइन भमि के फलों में से परमेगश्वर के लिये भेंट लाया॥ ४। और हाबील भी अपनी मंड में से पहिलोंठटी ओर मेरी मोटी लाया और परमेश्वर ने हाबील का ओर उस की भेंट का आटर किया॥ ५। परन्त काइन का और उस की भेंट का आदर न किया इस लिये काइन अति कापित हुआ और अपना मंह फलाया ॥ ६। तब परमेश्वर ने काइन से कहा त क्यों क्रड है ओर तेरा मंच क्यों फल गया॥ ७। यदि त भला करे तो क्या त ग्राह्म न हेगा ओर यदि त भला न करे तो पाप द्वार पर है और वह तेरे बश में हेगा और तू उस पर प्रभता करेगा॥ ८ः। तब काइन ने अपने भाई हाबील से बातें किई और यों हुआ कि जब वे खेत में थे तब काइन अपने भाई हाबील पर क्कपटा और उसे घात किया॥ «€। तब परमेश्वर ने काइन से कहा तेरा भाई हावील कहां है बुच्द बाला में नहों जानता क्या में अपने भाई का रखवाल कू॥ १५०। तब उस ने
कहा तू ने क्या किया तरे भाई के लाह्न का शब्द भूमि से मम्मे पकारता हे॥ १५९। और अब त प्थिवी से स्लापित क्ले जिस ने तेरे भाई का लाह्न तरे हाथ से लेने के अपना मुंह खेला हे ॥ ५२। जब तू किसनई करेगा तो वह तेरे बश में न हागी 'त एथिवी पर भगोडा और बच्ेत रहेगा ॥ १९३। तब काईन ने परमेग्र से कहा कि मेरा ट्ण्ड मेरे सहाव सेअधिक है॥ २४। देख त ने आज ट्ए में से मम्मे खट्र ट्या है और में तेरे आगे से गप्त हेऊंगा ओर में एथिवी पर भगोड़ा ओर बच्ेत हे।ऊंगा और एसा हे!गा कि जो काई मक्के पावेगा मार डालेगा ॥ ५४ । तब
ष्द उत्पत्ति [५ पच्बे
परमेश्वर ने उसे कहा इस लिये जो काई काइन के मार डालेगा तो उस्सशे सात गुन पलटा लिया जायगा और परमेश्वर ने काइन पर एक चिह्ल रक्खा न हे। कि काई उसे पाके मार डाले॥ १५६। तब काइन परमेश्वर के आगे से निकल गया और अदन की पं ओर नट की भमि में जा रहा॥ ९७। और काइन ने अपनी पत्नी के ग्रहण किया और बह गर्भिणी हुई ओर उद्झे हनक उत्पन्न हुआ तब उसने एक नगर बनाया और अपने बेटे हनक का नाम उस पर रक्वा ॥ ९५८। और इनक से ईराट उत्पन्न हुआ और ईराद से महूयाएऐल और महक्तया- रेल से मतसाणल ओर मतसाएल से लमक उत्पन्न हुआ॥ ९८। और लमक ने दो पत्नियां किई पहिली का नाम अटः और टूसरी का नाम जिल्!ः था॥ २०। और अदः से याबल उत्पन्न हुआ जो तंबओंं के निवासियों और ठोर के चरवाहां का पिता था॥ २९। और उस के भाई का नाम यबल था वह बीन और अरगन के सारे वजनियों का पिता था॥ २२९। ओर जिज्ञः से तवबजकाइन उत्पन्न हुआ जो उठेरों और लेहहारों का शिक्षक था और तबलकाइन की वहिन नअमः थी ॥ २३। और लमक ने अपनी पत्नी अदः और जिज्ञ: से कहा कि हे पत्नियों मेरा शब्द सने! और मेरे बचन पर कान घरो क्योंकि में ने एक परुष का अपने घाव के लिये और एक तरुण के अपने दुःख के लिये मार डाला ॥ २४। यदि काइन सात गन प्रतिफल लेवे ते लमक सतच्चत्तर गन ॥
२५। ओर आटउम ने अपनी पत्नी के फिर ग्रहण किया और वह बेटा जनी उस का नाम सेत रक्दा क्योंकि ईश्वर ने हाबील की संतीो जिस का काइन ने मार डाला मेरे लिये दूसरा बंश ठहराया ॥ २६। और सेत के! भी एक बेटा उत्पन्न छुआ ओर उस ने डस का नाम अनूस रक््खा उस समय से लाग परमेग्वर का नाम लेने लगे ॥
५ पांचवां पब्थे ।
ञहः की बंशावली का पत्र यह हे जिस दिन में ईश्वर ने मन॒व्य के उत्पन्न किया उस ने उसे इईंमख्वर के खरूप में बनाया॥ २। उस ने उन्हें नर और नारी बनाया और जिस ट्न वे सिरजे गये उस ने
५ पर्व] की पुस्तक । &्
उन्हें आशीष ट्या ओर उन का नाम मनुव्य रक्खा ॥ ३। और एक से लौस बरस की बय में आदम से उसी के खरूप जै'र रूप में एक बेटा उत्पन्न हुआ और उस का नाम सेत रक्वा॥ ४। और सेत की उत्पत्ति के पीछ आदउम की बय आठ से बरस की हुई ओर उर्तहो बेटे बेटियां उत्पन्न हुई॥ ५। और आम की सारी बय नव से तीस बरस की हुई और वह मर गया॥ ६। और सेत जब एक सी पांच बरस का हुआ तब उस्मे अनस उत्पन्न हुआ॥ ७। ओर अनस की उत्पत्ति के पीछ सेत आए से सात बरस जीआ ओर उसमे बरटे बेटियां उत्पन्न हुई॥ ८। और सेत की सारी बय नव से बारह बरस की हुई औरर वह मर गया ॥ <। और अनस जब नब्बे बरस का हुआ तब उद्झे कीनान उत्पन्न हुआ ॥
०॥ और कीनान की उत्पत्ति के पीछे अनस आउट से पंट्रह बरस जीआ ओर उत्तोे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ २९। और अनस की सारी बय नव से। पांच बरस की हुई और वह मर गया॥ २९२। ओर कीनान सत्तर वरस का हुआ और उद्झे महललिएणेल उत्पन्न हुआ॥ ९३। और महललिणल की उत्पत्ति के पीछ कीनान आठ से! चालीस बरस जीआ और उद्के बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ ९४। और कीनान की सारी बय नव ले। दस वरस की हुई और वुच्द मर गया ॥ ९५। और महललिणेल जब पेंसठ बरस का हुआ तब उद्समे विरट उत्पन्न हुञआा॥ २९६। और महललिएल विरद की उत्पत्ति के पीछू आठ सो तीस बरस जीआ और उससे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई॥ ९७। और महललिएल की सारी बय आउट से! पंचानवे बरस की हुई गैर वुह्द मर गया॥ ९१५८। जब विरद एक से! बासठ बरस का हुआ तब उद्ये हनूक उत्पन्न हुआ॥ ९७। और' ' हनूक कौ उत्पत्ति के पीछे विरद आठ सै बरस जीआ औएर उसमे बेटे बरटियां उत्पन्न हुई ॥ २० | और विरट की सारी बय नव से! वासठ बरस की हुई और वह मर गया॥ २९। जब हनक पेंसठ बरस का छुआ ते उस्स मतसिजह उत्पन्न हुआ॥ २२ । और हनक मतसिलह की उत्पत्ति के पीछ तीन से बरस लो ईम्थर के साथ साथ चला ओर उद्मे बेटे बटियां उत्पन्न हुई ॥ २३। और हनक की सारी बय तीन से पैंसठ बरस की
हुई॥ २४। ओर हनूक ईस्घर के साथ साथ चलता था और वुच्द न मिला 2 [4. 8. 8.]
९० ड्त्पत्ति [६ पत्मे
00220 0208 226 02222 60 2 य क दे ी क्योंकि ईस्र ने उसे लेलिया। २४। और जव मतसिलह एक सा सतासी बरस का हुआ तब उद्झे लमक उत्पन्न हुआ॥ २६ | और लमक की उत्पत्ति के पीछे मतसिलह सात से! बयासी बरस जीआ और उसमे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई॥ २७। और मतसिलह की सारो बय नव सा उनचहत्तर बरस की हुई और वह मर गया ॥ श८। ओर लमक जब एक झा बयासी बरस का हुआ तब उस का एक बेटा उत्पन्न हुआ ॥ २<। और उस ने उस का नाम नह रकखा ओर कहा कि यह हमारे हाथों के परिश्रम और काये के बिषय में जे! एथिवी के कारण से हैं जिस पर परमेग्वर ने स्ाप दिया हे हमें शांत देगा॥ ३० । और नह की उत्पत्ति के पीछे लमक पांच से। पंचानवे वरस जीआ ओर उद्मे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ ३९५ । और लमक की सारी बय सात से सतहत्तर बरस की हुई और वह मर गया ॥ ३९। ओर नह जब पांच से बरस का हुआ तब नह से सिम और हाम और याफत उत्पन्न हुए । ६ छठटबां पब्ब ।
ञ्ः थों हुआ कि जब मनव्य एथिबी पर बढ़ने लगे ओर उन से
बेशियां उत्पन्न हुई ॥ २। तो ईग्र के पत्रों ने मनव्य की पत्रियों के! ट्खा कि वे संदरी हें और उन में से जिन्हें उन्हें ने चाहा उन्हें व्याहा॥ ३। और परमेग्बर ने कहा कि मेरा आत्मा मनव्य में उन के अपराध के कारण सट्7 लो न्याय न करेगा वुच्द मांस हे और उस के टिन एक ज्लौबीसबरस के हांगे॥। ४।औओर उन दिनों में एथिवी पर टानव थे और उस के पीछे जब इंगख्र के पत्र मनव्यां की पत्रियों से मिले तो उन से बालक उत्पन्न हुए जो। बलवान हुए जे आगे से नामी थे ॥ ५ । और ई प्र ने देखा कि मनव्य कौ दृष्टता एथिवी पर बहुत हुई और उन के मन की चिंता और भावना प्रतिदिन केवल बरी हेती हैं ॥ ६ । तब मनय्य के एथिवी पर उत्पन्न करने से परमेश्वर पछताया ओर उसे अति शोक हुआ ॥ ७9 । तब परमंग्र ने कहा कि मनव्य का जिसे में ने उत्पन्न किया मनय्य से लेके पश लो और रगवैयें के ओर आकाश के पत्तियां के प्थिवों पर से नष्ट करूंगा क्योंकि उन्हें बनाने से में पछताता हू ॥
है पब्बे] कौ पस्तक । २९
प्पच । पर नह ने परमेशख्र की हृष्टि में अनग्रह पाया ॥ « । नह की बंशावली यह कै कि नह अपने समय में घर्मी' और सिद्ठ परुष था ओर इंम्घर के साथ साथ चलता था॥ ५०। ओर नह से तीन बेटे सिम ओर हाम ओर याफत उत्पन्न हुण॥ २९। ओर एथिवी ई स्वर के आगे बिगड़ गई थी ओर एथितरी अंघधेर से भरपर हुई॥ १५२। झआऔर ईयर ने एथिवी पर दृष्टि किई ओर क्या टेखता है कि वह बिगड़ गई हे क्योंकि सारशरौर ने एथिवी पर अपनी चाल का बिगाड़ दियाथा॥ ९५३। और इंखर ने न्ह से कहा कि सारे शरौर का अंत मेरे आगे आ पहुंचा है क्यांकि उन से एथिवी अंघेर से भर गई है ओर ट्ख में उन्हें एथिवी समेत नष्ट करूगा॥ १५४। त गाोफर लकड़ी की अपने लिये एक नाव वना ओर उस नाव में काटरियां और उस के बाहर भीतर राल लगा॥ २९५ । ओर उसे इस डे।ल कौ बना उस नाव की लंबाई तौन से हाथ और चेड़ाई पचास हाथ और ऊंचाई तीस हाथ की हेवे॥ २६। उस नाव में एक खिड़की बना ओर रऊपर ऊपर उसे हाथ भर में समाप्त कर और उस के अलंग में दर बना और उस में नोचे कौ और टूसरी और तीसरी अटारी बना॥ १५७। और टेख कि सारे शरीर के जिन में जीवन का आस हे आकाश के तले से नाश करने को में अर्थात में ही बाढ़ के पानी एथिवी पर लाता हू और पएथिवी पर हर एक बस्त नष्ट हा जायगीं॥ ९८। परनन््त में तस्मे अपनी बाचा स्थिर
करूंगा त नाव में जाना त ओर तेरे बेटे ओर तेरी पत्नो और तरे बेटों की पत्नियां तेरे साथ। १८। और सारे शरौरों में से जीवता जंत दो दे! अपने साथ नाव में लेना जिसते वे तेरे साथ जौते रहें वे नर ओर नारी होवें॥ २०। पंछी में से उस के भांति भांति के ओर ढार में से उस के भांति भांति के और एथिवी के हर एक रेंगवैंयथे में से भांति भांति के हर एक में से हो दा तम्क पास आब जिसतें जौते रहें॥ २९। और त अपने लिये खाने के। सब सामग्री अपने पास एकट्ढठा कर वुच्द तुम्हारे और उन के लिये भेजन होगा से ईश्वर की सारी आज्ञा के समान नह ने किया।
श्र जत्पत्ति [७ पन्चय
७ सातवां पब्बे । जज परमेग्वर ने नह से कहा कि त अपने सारे घराने समेत न!व में प्रवेश कर उ्योंकि इस पीढ़ी में अपने आगे तम्के घर्मी
टेखाक्े। २। हर एक पवित्र पश में से सात सात नर और उस की जे ड़ी और पश में से जे पवित्र नहों टाा ट/ नर और उस को जाड़ी अपने साथ लेना॥ ३। और आकाश के पछ्षियें से भी सात सात नर और उस की जोड़ी जिसतें सारी एथिवी पर बंश जीता रक्खे॥ ४। क्यांकि में सात ट्नि के पीछे एथिवी पर चालीस रात दिन मेंह बरसाऊंगा और इर एक जीवते जंत का जिसे में ने बनाया हे एथिवी पर से मिया दरऊंगा ॥ ५। और नह ने परमेश्वर की सारी आज्ञा के समान किया ॥ ६। और जब पानियां का बाढ़ एथिवी पर हुआ नह छः सा बरस का था ॥ ७। तब नह ओर उस के बेटे और उस की पत्नी ओर उस के बट की पत्नियां पानियां के बाढ़ के कारण से उस के संग नाव पर चढ़ों ॥ ८। पवित्र पशन से और उन में से जा पवित्र नहीं हैं और पंछियें से और एथिवी के हर एक रेंगवयां में से॥ « | टा हा नर और उस की जाड़ी जैसा इंशर ने नह का आज्ञा किई थी नाव में गए॥ ९५०। और जब सात दिन बीत गये ते! य॑ हुआ कि बाढ़ के पानी एथिवी पर हुए।॥ ५१५। और नह की बय के छः से बरस के हस रे मास की सत्तरह्रवों तिथि में उसो दिन महा गहिरापे के सारे सेते फट निकले और खगे के द्वार खल गये ॥ ९५२। और एथिवी पर चालीस रात दिन मेंह बरसा॥ २६३। उसी दिन नह ओर नह के बेटे सिम ओर हाम ओर याफत और नह की पत्नी और उस के बेटां की तीनों पत्नियां उस के साथ नाव में गई ॥ ५ ४ । वे और हर एक पशु अपनी अपनी भांति के समान और सारे ढोर और भूमि पर के हर एक रेंगवैये जंतु अपनी अपनी भांति के समान और हर एक पंछी अपनी अपनी भांति के समान हर एक भांति की हर एक चिड़ियां। ५४५। ओर वे नह के पास सारे शरीरों में से दो हे जिन में जीवन का आस था नाव में गये॥ ९५६। ओर जिन््हों ने प्रवेश किया से सारे शरीरों में से जोड़ा जाड़ा थे जैसाकि ईयर ने उसे आज्ञा
ष्ः पब्थे | कौ पस्तक । हक
किई थी जोर परमेश्वर ने उस के पीछे बंद किया॥ ९७। ओर बाढ़ का पानी चालीस टन ताई प्थिवी पर हुआ ओर पानी बढ़ गया ओऔरर नाव के उभार लिया और वह भूमि पर से ऊपर उठ गई॥ १५८। और जब पानी बढ़े और एथिवी पर बहुताई से बढ़ गए तब नौका पानी के ऊपर उतराने लगी॥ ९५८। और जब कि पानी एथिवी पर अत्यंत बढ़ गये ते सारे ऊंचे पहाड़ जे! सारे आकाश के नीचे थे ढंप गये॥ २०। और हंपे हुए पहाड़ों पर पानी पंट्रह हाथ बढ़ गये ॥ २९। ओर सारे शरौर जो पएथिवीपर चलते थे पंछी ओर ढार और पश जेर भमि पर के हर एक रेंगनैये ज॑त ग्रार हर एक मनप्य मर गये ॥ २२। शऔर सब जिन के नथनों में जीवन का स्वास था ओर सब जे रूखी पर थे मर गये॥ २३। ओर हर एक जीवता जंत जे एथिवी पर था मनय्य से लेके ढार और कीड़े मकाड़े और आकाश के पंछिये लो नष्ट हुए केवल नह और जो उस के साथ नोका में थे बच रहे॥ २४। ओर पानी डढ़ सा हिन लॉ छथिवी पर बढ़ते गये ।
८ आठवां पब्ये । जो अप |. विवते अल एर ईस्थर ने नह के ओर हर एक जीवते ज॑तु के और सारे
दी ध्ड पे के 5०५ « में दि बडे
ढार का जे उस के रंग नाव में थे छझरण किया और ईंय्घर सु ५2 गज ने एथिवी पर एक पवन बहाया और जल ठहर गये ॥ २। और गहि-
जप सेपते 33२ हैक &- रो हे हर ने जज
राव के सेते भी ओर आकाश के सरोखे बंट हे! गये ओर आकाश से वर वि दि. ९. > ब्यक मेंद्र थम गया॥ ३। और जल एथिवी पर से घटे चले जाते थे और थक १: दिनों + ) 5 तिते डेढ़ सो दिनों के बीते पर जल घट गये ॥ ४। और सातवें मास की सत्तरह तिथि में नैका अरारात के पहाड़ों पर टिक गईं॥ ५। और
जा ० *--. विद _्& '>5>य 8. न जल ट्सवें मास लॉ घटते गये और दसवें मास के पहिले टन पहाड़े। की चेटियां दिखाई दिई॥ &६। और चालीस टन के पीछ य॑ हुआ की नह ने अपने बनाये हुए नाव के भ््त राख के! खाोला॥ ७। और उस ने एक काग के उड़ा दिया और जब लो एथिवी पर के जल सख न गये ब॒द्द आया जाया करता था ॥ ८। फेर उस ने अपने पास से एक पंडकी
का छाड़ु दिया जिसते जाने कि पानी भमि पर से घट गये अथवा नहीं ॥
९४ उत्पत्ति [८ पब्बे
€। परन्तु उस पंडुकी ने अपना चंगुल टिकने के। ठिकाना न पाया और वह उस के पास नोका पर फिर आई क्योंकि जल सारी एथिवी पर था तब उस ने अपना हाथ बढ़ाके उसे लेलिया और अपने पास नाव में लेलिया॥ १५०। फिर वह और सात दिन ठहर गया और फिर उस ने डस पंडकी के नाव से उड़ा टिया। १५९। ओर वह पंडकी सांस्क के उस पास फिर आई ओर उ्या टेखता है कि जलपाई की एक पत्ती उस के मंह में हे तब नह ने जाना कि अब जल एथिवी पर से घट गया ॥ १२। ओर वह और भी सात टन ठहरा उस के पीछ उस ने उस पंडकी के छोड़ टिया वह उस के पास फिर न आई॥ २९३। और छः से! एक बरस के पहिले मास की पहिली तिथि में यां हुआ कि जल प्टथिवी पर से रूख गया ओर नह ने नाव की छत उठा टिई ओर क्या टेखता है कि एथिवी ऊपर से रूखी है ॥ २९४। और टूसरे मास की सत्ताईसवीं तिथि में एथिवी रूखी थी॥ २१५४। तब इंचख्यर नह का यह कहके बाला ॥ ९६ । किअब त नाका से निकल आ ओर तरी पत्नी ओर तेरे बेटे और तेरे बेटों की पत्नियां तेरे संग नाव पर से उतर जांयें। ९५७। हर एक जीवते जंत सारे शरीर में से क्या पंछी क्या ठार और क्या कीड़े मकाडे जा भमि पर रेंगते चलते हैं सव के अपने रंग ले निकल जिसतें उन के बंश एथिवी पर बहुत बंढें ओर फलवंत है| और एथिवी पर फेलें॥ ९८। तब नह निकला ओर उस के बेटे ओर उस की पत्नी और उस के बटों की पत्नियां उस के संग।॥ ९९। हर एक पशु हर णक रंगवैंये जंत और हर एक पंछी जे। कछ कि एथिवी पर रंगते हें सब अपने अपने भांति के समान नाव से निकल गये ॥
०। ओर नह ने परमेश्वर के लिये एक बेदी बनाई और सारे प्रवित्र पश ओर हर एक पवित्र पंछियों में से लिये और हेम की भेंट उस बेटी पर चढाई॥ २९५। और परमेम्थर ने सगंध संघा और परमेस्वर ने अपने मन में कहा कि मनव्य के लिये में एथिवी का फिर की स्ताप न ट्ऊंगा इस कारण कि मनव्य के मन की भावना उस की लड़काई से बरी है और जिस रीति से में ने सारे जीवधघारियें के। मारा फिर कभी न मारूंगा॥ २२। जब ले एथिवी है बोना और काटना
€ पर्व] की पस्तक । श्भू
और ठंड और तपन ओर ग्रीष्म ओर शोत और दिन और रात थम न जायंगे। € नवां पब्य ।
ञ्ै' ईंश्घर ने नह के और उस के बेटों का आशीष दिया और
उन्हें कहा कि फले ओर बढ़ा ओर पएथिवी के भरा॥ २। गज और तम्हारा डर ओर भय प्थिवी के हर एक पश पर ओआर आकाश के हर एक पंछियां पर उन सभों पर जो एथिवी पर चलते हैं और समट्र की सारी मछलियों पर पड़ेगा वे तम्हारे हाथ में सेंपे गये ॥ ३ । हर एक जीता चलता जंत तम्हारे भाजन के लिये होगा में ने हरी तरकारी के समान सारी बस्त तम्हं दिई॥ ४। केबल मांस उस्त के जीव अथैत उस के लाह् समेत मत खाना ॥ ५। ओर केवल तम्हारे लाहू का तम्हारे शरीरों के लिये में पलटा लेऊंगा हर एक पश से ओर मनव्य के हाथ से में पलटा लेऊंगा हर एक मनव्य के भाई से मनव्य के प्राण का में पलटा लेऊंगा॥ ६। जो काई मनव्य का लाह्ू वहावेगा मनव्य से उस का लाक्ू बहाया जायगा उ्योंकि ईश्वर के रूप में मनय्य बनाया गया क्षे। ७। ओर तम फले! ओर बढ़ो ओर एथिवी पर बहुताई से जन्मे! ओर उस में वढ़ेत॥ ८। और ईंच्र ने नह के और डस के साथ उस के बटां के कहा॥ 6<। किटेखो में अपना नियम स्थिर करता हूं तम से ओर तुम्हारे बंश से तम्हारे पीछे॥ ९०। और हर एक जीोवते जंत से जा तम्हारे संग हे क्या पंछी ओर क्या ढार ओर एथिबवी के सारे चापायां से ओर सभों से जो नाव से बाहर जाते हैं एथिवी के हर एक पश लें ॥ १५१५। ओर में अपना नियम तम से स्थिर करूंगा फिर सा रे शरौर बाढ़ के पानियों से नष्ट न किये जायंगे और फिर एथिवी के नष्ट करने के लिये जलमय न हागा॥ १५२। और ईशर ने कहा कि यह उस नियम का चिन्ह है जो में अपने और तनन्हारे और हर एक जीवत जंतु के मध्य में जो तम्हार संग ह परंपरा की पीढ़ी लो बांघता हूं ॥ १३। में अपने धनष के मेघ पर रखता हूं और वह मेरे और एथिवी के मध्य में नियम का चिन्ह हेगा॥ १४। ओर जब में मेघ का एथिवी के
१९६ उत्पत्ति - [९७ “परी
ऊपर फैलाऊंगा ते! धनष मेघ में दिखाई टेगा॥ २५५४। और में अपने नियम के जो मेरे और तम्हारे और सारे शरीर के हर एक जीवधारी के मध्य में है स्मरण करूंगा ओर फिर सारे शरीर के नष्ट करने के जल मय न होगा ॥ ९५६। ओर घनण मभेघ में हेगः झओर में उसे टेखंगा जिसतें में उस सनातन के नियम के जो ईयग्वर के और एथिवी के सारे शरोर के हर एक जीवधारी के मध्य में है स्मरण करू॥ ९७। और ईश्वर ने नह से कहा कि जे! नियम में ने अपने और एथिवी पर के सारे शरौरों से स्थिर किया हे उस का यह चिक्ल हे॥ ९८। ओर नह के बेटे जे। नौका से उतरे सिम ओर हाम और याफत थे और हाम कन- आन का पिता था॥ १५८। नह के यही तीन बेटे थे और उन्हीं से सारी पथिवी बस गई॥ २०। फिर नह खेतीबारी करने लगा और उस ने एक दाख कौ वाटिका लगाई॥ २९। और उस ने उस का रस पीया और उसे अमल हुआ और अपने तंब में नग्न रहा॥ २२। और कनआन के पिता हाम ने अपने पिता की नंगापन टेखी और बाहर अपने भाइयें के जनाया ॥ २३। तब सिम और याफूत ने एक ओआढ़ना लिया और अपने दाने कंघां पर धरा और पीठ के बल जाके अपने पिता की नंगापन ढांपी से उन के मुंह पीछे थे ओर उन््हों ने अपने पिता की नंगापन न टेखी ॥ २४। जब नूह अपने अमल से जागा तो जा उस के छोटे बेटे ने उस से किया था उसे जान पड़ा॥ २४। और उस ने कहा "कि कनआन खापित हेगा वुद अपने भाइयों के दासे का दास हे|गा ॥ २६। ओर उस ने कहा कि सिम का परमेश्वर ईस्थर धन्य हेवे ओर कनआन उस का दास हागा॥ ईअ्वर याफत के फैलावेगा और वह सिम के तंबयं में बास करेगा आर कनआन उस का दास हागा॥ र८। और जलमय के पीछ नह साढ़े तीन सै बरस जीआ ॥ २<। और नह की सारी बय लव सा पचास बरस की हुई ओर वह मर गया।
९० ट्सवां पब्बे ।
ब नह के ब्ां की बंशावली यही है सिम और हाम ओर याफत जा जलमय के पीछ उन से बेटे उत्पन्न हुणए॥ २९॥ याफत के
२० पब्बे] की पस्तक । १७
बेटे जम्न ओर माजज ग्रार माटी ओर यनान ग्यर तबल और मसक और तीोरास॥ ३। ओर जस्न के बेटे अकनाज ओर रिफास ओर तजरम:। ४। ओर यनान के बेटे इलीसः और तरशीश ओर कित्ती और टूटानी ॥ ५। इन्हों से अन्यदे शियें के टाप हर एक अपनी अपनी भाषा के ओर अपने अपने परिवार के समान अपनी अपनी जाति में बंट गये ॥
६ । और हाम के बेटे कश ओर मिस्र और फत और कनआन ७। ओर कश के बटे सवा ओर हवीलः और सबतः और रगम और सवतिका ओर रगमः के बेटे सिवा और ट्टान ॥ ८ं। और कश से निमरूट उत्पन्न हुआ वह एथिवी पर एक महाबीर होने लगा॥ 6 । वह इंश्वर के आगे बलवान ब्याघा हुआ इसी लिये ककह्ाा जाता है जसा कि परमेश्वर के आगे निमरूट बलवंत ब्याधा॥ १५०। ओर उस के राज्य का आरंभ बाबल ओर अरक और अक्कट और कलन सिनआर देश में हुआ॥ ९९ । और उसी टेश में से अस्टर निकला और नौनवः और रिहाबात और कलः के नगर बनाथे॥ १५२। ओर नीनवः और कलः के मध्य में रसन बनाया जे! बड़ा नगर क्षे। ९१३। और मिस से लाटौम ओर अनामीम ओर लिहाबी और नफतूह उत्पन्न हुए ॥ ९४ | और फतरूस गैर कसल ही जिन से फिलिस्ती और कफ्तर निकले॥ ९५ | और कनआन से उस का पहिलोटा सेटा ओर हिक्त उत्पन्न हुए ॥ ९६। और यबस और अमरी और जिरजाश॥ ९१७। और हवी और अरकी और सौोनी॥ ९१५८। और अरवाद और जमारी और हमासी उस के पीछे कनआन के घराने फेल गये॥ २९८। जऔर कनआन के सिवाने सैंदा से जिरार के मा में उच्ज़ः लॉ सट्टम और अमरः और अट्मः और जिवियान और लसअ ला हुए॥ २०। हाम के बेटे अपने घरानेां ओर अपनी भाषाओं के समान अपने देश और अपनी जाति गएणां में ये हैं। २९५। ओर सिम से भी वालक उत्पन्न हुए वह सारे इब्र के बंश का एिता था और याफत उस का बड़ा भाई था ॥ २२ । और सिम के बंश औअलाम ओर अरूर और अरफकसद और लट पर अराम थे ॥ २३। ओर अराम के बंश ऊज और कल और; जतर और मश थे |
8 [4. 8.. 8.]
श्ष्ध उत्पत्ति (१५९ पब्ब
२४ ।ओर अरफकसद से सिलह उत्पन्न हुआ ओर सिलह से इब्र ॥ २५ । और इब्र से हा बेटे उत्पन्न हुए एक का नाम फलज था क्यांकि उस के दिनों में एथिवी बांदी गई गजऔर उस के भाई का नाम यकतान था ॥ २६ । ओर यकतान से अलम॒टाद ओर सलफ ओर हसरि मै।त ओर इरख॥ २७। और हट्रराम और ऊजाल जर टिकूलह॥ श८। ओर ऊबल ग्रार अबीमायल और सिवा ॥ २८९। ओर गओफीर गऔर हवील: और यूबाब उत्पन्न हुए ये सब युकतान के बेटे थे। ३०। और उन के निवास मेसा के मागे से जा परव के पहाड़ सिफार ला था॥ ३९॥ सिम के बेटे अपने घरानों और अपनी भाषाओं के समान अपने अपने देशो ओर अपने अपने जातिगणां में थे थे। ३२। नह केबेटों के घराने उन की पोढ़ी ओर उन के जातिगणग के समान थे हें और जलमय के पीछ एथिवी में जातिगण इन्हों से बांट गये ॥
९९५ गयारहवां पब्बें । *
ञ्रै 7र सारौ एथिवी पर एकच्दी बेली और एकचद्दी भाषा थी ॥ २। और ज्यों उन्हें! ने परव से यात्रा किई ते ऐसा हुआ कि उन््हों ने सिनआर ट्श में एक चैगान पाया ओर वहां ठहरे॥ ३। तब उन््हों ने आपस में कहा कि चले! हम ईंट बनावें और आग में पका्वें से। उन के लिय ईंट पत्थर की संती ओर गारा की संती शिलाजतु था ॥ ४। फिर उन््हों ने कहा कि आओग7 हम एक नगर और एक गुस्मट जिसकी चेटी खर्ग लो पहुंचे अपने लिये बनांवं आर अपना नाम करे न हे। कि हम सारी एथिवी पर छिल्न भिन्न हे। जायें ॥ ५। तब परमेशज्वर उस नगर ओर उस गुस्मट का जिसे मनुव्य के संतान बनाते थे देखने के उतरा॥ &६। तब परमेश्वर ने कहा कि ट्खे। लेग एक ही हें ओर उन सब की एक हो बाली क्षे अब वे ऐसा ऐसा कुछ करने लगे से! वे जिस पर मन लगावगगे उद्मे अलग न किये जांबेंगे॥ ७। आये हम उतरें और वहां उन की भाषा के गड़बड़ावं जिसतें एक टूसरे की बेएली न समु््के ॥ धा। तब परमेश्वर ने उन्हें वहां से सारी एथिवी पर छिल्न भिन्न किया और वे उस नगर के बनाने से अलग रहे ॥ < । इस लिये उस का नाम
२१ पन्ने] कौ पस्तक । १
बाबुल कहावता हे क्यांकि परमेग्वर ने वहां. सारे जगत की भाषा का गड़बड़ किया ओर परमेग्वर ने वहां से उन के सारी पथिवी पर छित्न भिन्न किया ॥
९ ०। सिम की बंशावली यह है कि सिम से बरस का हेके जलमय के दा बरस पीछे उरस्मे अरफकसद उत्पन्न हुआ॥ ९१५९। ओर अरफकसट की उत्पत्ति के पीके सिम पांच सो बरस जीआ ओर उससे बेटे बेटियां उत्पन्न ह॒ुईई॥ ९२। ओर जब अरफकसरद पैंतीस बरस का हुआ उस्मे सिलह उत्पन्न हुआ॥ ९३। और सिलह की उत्पत्ति के पीछे अरफकसद चार से तीन बरस जीआ और उर्हे बटे बेटियां उत्पन्न हुई॥ ९१९४। सिलह जब तौस बरस का हुआ उर्ते इब्र उत्पन्न हुआ। ९५ । और सिलह इब्र की उत्पत्ति के पीछ चार से तीन बरस जीआ और उत्मे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई॥ ९६। और इब्रसे चैंतीस बरस के बय में फलज उत्पन्न हुआ॥ २९७। ओर फलज की उत्पत्ति के पीछे इब्र चार सा तीस बरस जीआ ओर उद्समे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ ९ ८ै। तीस बरस की बय में फलज से रजऊ उत्पन्न हुआ॥ ९८। ओर रऊ् की उत्पत्ति के पीछू फलज दो! सौ नव बरस जीआ ओर उस्से बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ २०। बन्तौस बरस के बय में रऊ से सरूज उत्पन्न हुआ॥ २९। ओर मरूज की उत्पत्ति के पीछे रऊ दा से सात बरस जीआ गऔर उस्म बेटे बेटियां उत्पन्त हुई ॥ २२९। सरूज जब तीस बरस का हुआ उरहो नकह्लर उत्पन्न हुआ॥ २३। ओर नहूर की उत्पत्ति के पीछ सरूज दा सी बरस जीआ ओर उत्मे बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ २४ । नह्र जब उंतीस वरस का हुआ उस्म तारह उत्पन्न हुआ ॥ २५ | ओर तारह की उत्पत्ति के पीछ नहूर एक से। उंतीपत बरस जीआ और उर्झ बेटे बेटियां उत्पन्न हुई ॥ २६। तारह जब सत्तर बरस का हुआ उसमे अबिराम और नहूर ओर हारन उत्पन्न हुणए॥ २७। तारह की बंशावली यह क्षे कि तारह से अविराम और नहर और हारन उत्पन्न हुए और हारन से लत उत्पन्न हुआ॥ २८। ओर हारन अपने पिता तारह के आगे अपनी जन्म भूमि अथात् कलदानियों के कर में मर गया॥ २८। और अबिराम ओर नहूर ने पत्नियां किईं अविराम की
२० उत्पत्ति [१२ पब्ब
ली का नाम सरी था और नह्ूर की पत्नी का नाम मिलकः जो हारन की बेटी थी बच्दी मिलकः और इसकाह का पिता था॥ ३०। परन्त सरो बांस थी उस का काई संतान न था॥ ३९। गऔर तारह ने अप ने बेटे अबिराम के! और अपने पेते हारन के बेटे लत का ओर अपनी बह्ल अबिराम की पत्नी सरी के लिया ओर उन्हें अपने साथ कलटानियों के ऊर से कनआन दंश में लेचला ओर वे हारन में आये ओर वहां रहे॥ ३२९। ओर तारह टो से पांच बरस का हेके हारन में मर गया ॥
९२ बारहवां पत्ब ।
व परमेश्वर ने अविराम से कहा था कि तू अपने टेश ओर अपने (5 4 डक से ओर अपने पिता के घर से उस देश का जा जो में तस्मे ट्खाऊंगा॥ २। ओर में तस्से एक बड़ी जाति बनाऊंगा और तस्से आशीष ट्ऊंगा और तेरा नाम बड़ा करूंगा और त एक आशीबःट हेगा॥ ३। और जो तुझम्के आशीष टेगे मैं उन्हें आशीष टेजंगा और जो तम्के घिक्कारेगा में उसे घधिकारूगा और एथिवी के सारे घराने तस्से आशीष पावंगे॥ ४। से परमम्चबर के कहने के समान अबिराम चला गया ओर लत भी उस के संग गया और जब अविराम हारन से निकला तब वह पचहत्तर बरस का था॥ ५। फिर अबिराम ने अपनी पत्नी सरी के और अपने भतीजे लत के और उन की सारी संपत्ति काजो उन््हों ने ग्राप्ति कि थी और उन के सारे प्राणियों के जो हारन में मिले थे साथ लिया औएर कनआन हेश का जाने के लिये चल निकले सो वे कनआन देश में आये ॥ ६। और अबिराम उस हटेश में हेके सिकम के स्थान लां चला गया मेरिः के बलत लें तब कनआनी उस द्श में थे ॥ ७। फिर पर मेंग्वर ने अबिराम का टशन दे के कहा कि यह ट्श में तर बंश का ट्ऊंगा तब उस ने परमेम्यर के लिये जिस ने उसे दर्शन दिया था वहां एक बेटी बनाइं ॥ ८ ।फिर वच्च वहां से बैतएल की पूरब एक पहाड़ की ओर गया ओर अपना तंबू ज्रेतएल की पच्छमि ओर खड़ा किया और अई पूरब और था और वहां
९३ पत्ब] की पुस्तक । २९.
उस ने परमेग्वर के लिये एक बेदी बनाई खऔर परमेम्घर का नाम लिया॥ €। और अबिराम ने जाते जाते दक्खिन की ओर यात्रा किई ॥ १० और उस ट्श में अकाल पड़ा और अविराम बास करने के लिये मिस्र के उतर गया क्योंकि उस टेश में बड़ा अकाल था॥ ९५९। और यां हुआ कि जब व॒ह मिस के निकट पहुंचा उस ने अपनी पत्नी सरीो से कहा कि ट्ख में ज्ञानता # कितू ट्खने में सन्दर स्त्री हे॥ ९२। इस लिये यों होगा कि जब मिसरी तुमे देखें वे कहेंगे कि यह उस कौ पत्नी हे ओर मुझ मार डालेंगे परन्तु तुस्मे जीती रक्खेंगे॥ १३। तू कहियो कि में उस की बहिन हुं जिसतें तेरे कारण मेरा भला होय और मेरा प्राण तेरे हेतु सेजीता रहे॥ ९४। और जब अबिराम मिस्र. में जा पहुंचा तव मिस्तियों ने उस स्त्री के टेखा कि अत्यंत सन्दरी है॥ १९५५। ओर फिरऊन के अध्यक्षों ने भी उसे टेखा और फिरऊन के आगे उस का सराहना किया से उस स्त्री का फिरझन के घर में ले गये॥ २६। और उस ने उस के कारण अबिराम का उपकार किया ओर भेड़ बकरी ओर बैल और गदहे और दास और दासी और गधणियां ओर ऊंट. उस ने पाये ॥ ९७ । तब परमेश्वर ने फिरझऊन पर ओर उस के घराने पर अविराम की पत्नी सरी के कारण बड़ी बड़ी मरियां डाली'॥ ९८। तब फिरजन ने अबिराम के बुला के कहा कि तू ने मुस्से यह क्या किया तू ने मुस्े क्यों न जताया कि वुष्ट मेरी पत्नी है॥ ५८। क्यों कहा कि वु्द मेरी बहिन क्ञे यहांलां कि में ने उसे अपनी पत्नी कर लिया हेता टेख यह तेरी पत्नी है तू उसे ले और चला जा॥ २०। तब फिरजन ने अपने लागों के उस के विषय में आज्ञा किई और उन््हों ने डसे और उस की पत्नी के उस सब समेत जे। उस का था जाने टिया। ९३ तेरहवां पत्र । जे अविराम मिस्त से अपनी पत्नी ओर सारी सामग्री समेत और
लूत के अपने संग लिये ये दृकक््खिन के चला॥ २। ओर अविराम ढोर और सेना चांटीमें बड़ा धनी था॥ ३। झऔर वह
र्र उत्पत्ति [१३६ पत्ब
यात्रा करते ट्क्खिन से बैतएल ला उसी स्थान के आया जहां आरंभ में उस का तंब था बैतएल और अई के मध्य में ॥ ४। उस बेटी के स्थान में जिसे उस ने पहिले वहां बनाया था और वहां अबिराम ने परभेग्वर का नाम लिया॥ ५। ओर अबिराम के संगी लूत के भी सुंड और गाय बैल ओर तंबूथे॥ ६ । ओर साथ रहने में उस दृश में उनकी समाई न हुई क्योंकि उन की सामग्री बहुत थी इस लिये वे एकट्ठे निवास न कर सके॥ ७। और अबिराम के ढार के चरवाहें में और लत के ढार के चरबाहें में कूगड़ा हुआ तब कनआनी और फरज्ते उस भमि में रहते थे॥ ८.। तब अबिराम ने लत से कहा कि मेरे और तेरे बीच और मेरे चरवाहें में ओर तेरे चरवाहों में रूगड़ा न होने पावे क्योंकि हम भाई हैं ॥ ८ । क्या सारा देश तरे आगे नह मस्स अलग हो जो ते बाई ओर जाय ता में दहिनी ओआर जाऊंगा अथवा जा त टहिनी ओर जाय तो में बाई ओर जाऊंगा ॥ १५०। तब लत ने अपनी आंख उठाके अर्न के सारे चागान का ट्खा कि इंग्र के सट्टूम और अमूरः के नष्ट करने से आगे वुच्ट सबेत्र अच्छी रीति से सौंचा हुआ था अथात् परमेम्वर की बारौ क॑ समान स्॒य के मा* के मिख की नाई था॥ १५१५। तब लत ने अट्टन का सारा चौगान चना और परव की ग्येर चला ओर वे एक ट्ूसरे से अलग हुए॥ २२। अविराम कनआन टृश में रहा और लत ने चागान के नगरों में बास किया और सट्टम की ओर तंव खड़ा किया॥ १५३। पर सदट्टम के लेग परमेश्वर के आगे अब्यंत दृष्ट और पापी थे ॥ २४। तब लूत के अलग होने से पीछ परमेगश्वर ने अबिराम से कहा कि अब अपनी आंखें उठा और उस स्थान से जहां त हैं उत्तर और दक्खिन और परव और पच्छिम की आर टेख॥ ९५ । चउ्यॉांकि में यह सारा टेश जिसे त देखता कै तमे और तेरे बंश के सदा के लिये टेऊंगा॥ ९२६ और में तरे बंश के एथिवी की घल के तल्य करूंगा यहां लां कि यदि काई पएथिवो की घल का गिन सके तो तरा बंश भी गिना जायगा॥ ९७। डउठके देश की लंबाई और चौड़ाई में हेके फिर क्योंकि में उसे तम्मे देजंगा॥ १५८। तब अबिराम ने तंबू उठाया और ममरे के
१४ पब्ब] की पस्तक । र्३्
बलतों में जा हबरून में हे आ रहा ओर वहां परमेग्वर के लिये एक बंदी बनाई
९४ चोटहवां पब्बे।
जे सिनआर के राजा अमराफिल के ग्यर इज्नासर के राजा अर- यक के और औलाम के राजा किहरजाउमर के ओर जाति गए के राजा तिदआल के दिनों में यां हुआ॥ २। उन््हों ने सट्टम के राजा बरअ से और अमरः के राजा बिरशञ से और अट्म के राजा सिन्निअव से और जिबीआन के राजा शिमिबर से और बालिग के राजा से जा सग्र हे संग्राम किया॥ ३। ये सब सिद्दौम की तराई में जे खारी समुद्र हे एक्ट हुए॥ ४। उन्हें ने बारह बरस लॉ कि ट्रलाउमर कौ सेवा किई ओर तेरहवें बरस उरस्झे फिर गये ॥ ५। और चौट्हवे बरस में किटरलाउमर ओर उस के साथी राजा आये और इसतारात करनैन में रिफाइम का और हाम में जज्ञोयों के और सवी करयातैन में अमियां के ॥ ६। और उन के सईर परत में हरियों का फारान के चोगान लो जा बन के पास क्षे मारा। ७। ओर फिरे और इनमिशपाट के जा काट्स है फिरे ओर अमालीक के सारे देश का और अमरी के भी जो हस्मनतमर में रहते थे मार लिया॥ ८। और सिद्दौम का राजा और अमरः का राजा ओर अदमः का राजा और जिबिआन का राजा और बालिग का राजा जो रुग्र के निकला ॥ € । औैलाम के राजा किट्रलाउमर के संग और जातिगणों के राजा तिदआल के संग और शिनआर के राजा अमराफिल ओर इलज्लञासर के राजा अरियक ने चार राजा पांच के संग यड्ू के लिये॥ ९५०। और सिह्दीम की तराई में चहले के गढ़हे थे और सिद्दीम और मूअरः के राजा भागे ओर वहां गिरे ओर बच हुए लाग भाग के पहाड़ पर गये ॥ ९९। उन््हों ने सिह्रीोम ओर अमरः की सारी रुंपत्ति और उन के सारे भेजन लट लिए ओर अपने मार्भ पकड़े॥ ९२। और अबविराम के भतीजे लत का जो सटुम में रहता था और उस की संपत्ति का लेके चले गये ॥ ९३। तथ किसी ने बचके इबरानी अबिराम को संदेश दिया
३ जत्पात्ति [२५ पर्ब्ब
क्यांकि वह इसकाल और अनेर का भाई अमरीौ ममरे के बलतों के नीचे
रहता था और वे अबिराम के सहायक थे॥। २४। और अबिराम ने अपने भाई के ले जाने की बात सुन के अपने घर के तौन सा अठारह टासें के। लिया और ट्ान लो उन का पीछा किया॥ २५। ओर उस ने और उस के सेवकों ने आप के। रात का बिभाग किया ओर उन्हें मारा और खबः ला जो ट्मिश्क की बाई ओर हे उन्हें रगंट चले गये ॥ ९६। और वह सारी संपत्ति का और अपने भाई लत का भी और उस की संपत्ति के ओर स्त्ियों के भी और लेणगों के फेर लाया ॥
९७। और किट्रलाउमर का और उस के संगी राजाओं के। मारके फिर आने के पीछ सट्टम का राजा उससे भेंट करने के सवी की तराई लॉ जा राजा की तराई है निकला ॥ ५८। ओर सालिम का राजा मलिकिसिदक रोटी ओर टाख रस लाया और बुह अति महान इंम्बर का याजक था ॥ २९६८ । और उस ने उसे आशीष दिया और बेला कि आकाश ओर प्रथिवी के प्रभू अति महान ईस्र का अविराम धन्य हेवे ॥ २०। और अति महान ईश्वर का घन्य जिस ने तेरे बैरियां कातरे हाथ में सेंप ट्या और उस ने सब का ट्सवां भाग उसे दिया॥ २९ । ओर सट्ूम के राजा ने अविराम से कहा कि प्राणियों का मस्के टीजिये ओर संपत्ति आप रखिये॥ २२। तव अबिराम ने सट्टूम के राजा से कहा कि में ने अपना हाथ अति महान ईय्थर परमेग्चर के आगे जो खगे और प्रथिवी का प्रभ क्ठे उठाया हैे॥ २३। कि में एक तागे से लेके जते के बंद ला आप का कछ न लेऊंगा से। मत कहिये। कि में ने अबिराम के घनमान किया॥ २४। परन्त कंबल वह जे। तरुण ने खाया और उन मनव्यों के भाग जो मेरे संग अथात अनेर खैर इसकाल ओर ममरः के व अपने भाग लेवें।
२५ पंट्रहवां पत्ण । न बातों के पीछे परमेघख्वर का बचन यह कहते हुए दशेन में
अबिराम पर पहुंचा कि हे अविराम मत डर में तेरी ढाल और तेरा बड़एप्रतिफल छू॥ २। तब अबिराम ने कहा कि हे प्रभु ईश्वर त्
श्प पब्बे ] को पुस्तक । श्पू
मस्त क्या दगा में तो निबेंश जाता हुं और मेरे घर का भंडारी ट्मिश्की इलिअजर हे ॥ ३। फिर अबिराम ने कहा क्रि टेखत ने मस्के काई बंश न दिया ओर देख जो मेरे घर में उत्पन्न हुआ वही मेरा अधिकारी है॥ ४। ओर ट्खे परमेश्वर का बचन उसे यूं कहते हुए पहुंचा कि यह तेरा अधिकारी न होगा परन्तु जा तुकौसे उत्पन्न हागासे तेरा अधिकारी हेगा॥ ५। फिर उस ने उसे बाहर ले जाके कहा अब खग्गे की ओर टेख ओर जो तारों के त् गिन सके तो उन्हें गिन फिर उस ने उसे कहा कि तेरा बंश ऐसा ही हेगा॥ ६। तब वह परमेम्वर पर विश्वास लाया और यह उस के लिये घ॒र्मे गिना गया॥ ७। फिर उस ने उसे कहा कि में परमेश्वर हूं जा तुझे यह भूमि अधिकार में टने के। कलटानियों के ऊर से निकाल लाया ॥ ८। तब उस ने कहा कि हे परमेग्बर मेरे ईम्बर में क्यांकर जानों कि में उस का अधिकारी हाऊंगा॥ €। तब उस ने उसे कहा कि त् तीन बरसी एक कलार ओर तौन बरसी एक वकरी गैर तोन वरसी एक मेढ़ा और एक पंडक ओर कपेत का एक बच्चा मेरे लिये ले॥। १०। सो उस ने ये सब अपने लिय लिया ओर उन्हें मध्य से टो। देश भाग किये ओर हर एक भाग के उस के टूसरे भाग के साम्ने धरा परन्तु पंछियेंं का भाग न किया ॥ १५९। और जब हिंसक पंछी उन लाथों पर उतरे अबिराम ने उन्हें हांक टिया॥ २९२। और रूये अस्त हेाते हुए अबिराम पर भारी नोंट पड़ी और क्या देखता हे कि बड़ा भयंकर अंधकार उस पर पड़ा॥ २१३। तब उस ने अबिराम के कहा निश्चय जान कितरे बंश ओरो के हेश में परट शो हेंगे और उन की सेवा करेंगे और वे उन्हें चार से बरस ला सतावेगे ॥ १५४। परन्तु जिन की वे सेवा करेंगे में उस जाति का भो बिचार करूंगा औै।र वे पीछ बड़ी संपत्ति लेके निकलेंगे॥ ५५। ओर तू अपने पितरां में कुशल से जायगा और बहुत पुरनिया होाके गाड़ा जायगा ॥ ९६। परन्तु चौथी पीढ़ी में वे इघर फिर आगे क्यांकि अमूरियां का अधम अब लॉ भरप्र नहीं हुआ॥ २७। ओर जब रूये अच्त हुआ ता या हुआ कि अंधियारा हुआ कि देखे एक घधुआं उठता भट्ठा और एक आग का दौपक उन टुकड़ों के मध्य में से हेके चला गया॥ ९प्। 4 4.0 53 9. |
२६ उत्पत्ति [१६ पत्ब
न््ाझखझआदद5वख।थवव तन तन न ननतनततनत न ननत-त-3--जनन कन--न-सननन-नमन--नननन-+>++ननन+क+न-न+-+ न ननतननन++-+++>->+---.
उसो दिन परमंगख्र ने आविराम से नियम करके कहा कि में ने मख की नदो से फुरात कौ बड़ी नदी लें यह देश तेरे बंश के दिया क्षे ॥ १९ । अथात् फैनी ओर कनजी ओर कट्मनी॥ २०। और हित्ती और फरिज्जी ओर रिफाइमी॥ २९। और अमरी और कनऊझानी और जिर्जाशी और यबसी का टेश |
९६ सेलहवां पत्व ।
८३ । ब अबिराम को पत्नी सरी काई लड़का उस के लिये न जनी ओर उस की एक मिसरी लेडी थी जिस का नाम हाजिर: था ॥ २। तब सरी ने अबिराम से कहा कि ट्ख परमेश्वर ने मस्झे जन्ने से राका के में तरी बिनती करती क्ल॑ कि अब मेरी लींड़ी पास जाइये क्या जाने मेरा घर उससे बस जाय ओर अविराम ने सरी की बात मानी ॥ ३ । से! अबिराम के कमआन दृश में ट्स बरस निवास कर ने के पीछ उस को पत्नी सरी ने अपनी लोंडी मिसरी हाजिरः के लिया ओर अपने पति अयिराम के उस की पत्नी होने के ट्या॥ ४। और उस ने हाजिरः के ग्रहण किया और वुच्द गर्भिणी हुई और जव उस ने आप के गर्भिणी देखा ता उस की खामिनी उस की दृष्टि में निंदित हुई॥ ५। तब सरी ने अविराम से कहा कि मेरा टाष आप पर में ने अपनी लोंडी आप के दिई और जब उस ने अपने का गर्भेणी ट्खा ता में उस की टरष्टि में निंटित हुई मेरे ओर आप के बीच परमेग्वर न्याय करे ॥ ६ । तब अवबिराम ने सरी से कहा कि टेख तेरी लौंडी तर हाथ में हे जा तुस्ते अच्छा लगे से उस्स॒ कर ओर जब सरी ने उस से कठिनता किई वुच्द उस के आगे से भाग गई॥ ७। और परमेग्वर के द्वत ने एक पानी के सेत के पास बन में डस सेते के पास जो रूर के मा में है उसे पाया ॥ ८। ओर उसे कहा कि हे सरी की लेंडी हाजिर: त कहां से आई हे और किधर जायगी वह बाली कि में अपनी खामिनी सरी के आगे से भागती हूं ॥ <। और पर्मेम्बर के टूत ने उसे कहा कि अपनी खा।मनी के पास फिर जा और उस के बश में रह॥ ९०। फिर परमेश्वर के टूत ने उसे कहा कि में तेरा बंश अत्यंत बढ़ाऊंगा ऐसा कि वुच्द बहुताई
३२७ पब्ब ] को पुस्तक । २७
के मारे गिना न जायगा॥ १५१५। ओर परमेश्वर के टूत ने उसे कहा कि रुख त गर्भिणी क्षे आर एक बेटा जनेगी और उस का नाम इसमअएऐल रखना क्योंकि परमेगश्र ने तेरा दुख सुना। ५२। ओर वुच्द एक बन मनय्य होगा उस का हाथ हर एक मनव्य के बिरुड्न ओर हर एक का हाथ उस के बिरुड्द होगा ओर वह अपने सारे भाइयों के साम्ने निवास करेगा॥ १५३। तब उस ने उस परमेग्वर का नाम जिस ने उस्म बातें किईं यूं लिया कि हे ईग्पर तू मु॒स्से देखता हु क्यांकि उस ने कहा कि में ने अपने टर्शी का पीछा यहां भी ट्खा हे ॥ १५४ । इस लिये उस कएं का नाम बीअरलिक्षे राई रक्वा ट्खे। वह कादिस ओर बिरद के मध्य में हे ॥ ५५ । से हाजिर: अविराम के लिये एक बेटा जनी और अबिराम ने अपने बेटे का नाम जिसे हाजिर: जनी इसमअएल रक््खा॥ १५६ । ओर जब हाजिरः से अबिराम के लिये इसमअआएज उत्पन्न हुआ तब अबिराम छियासी बरस का था |
१७ सचहवां पत्ब ।
ञ्रै एर जब अबिराम निन्नावे बरस का हुआ तब पंरमेस्वर ने अबिराम के ट्शून टिया और कहा कि मैं सर सामर्थो' ईग्र # त मेरे आगे चल ओर सिद्द है ॥ २। ओर में अपने ओर तेरे मध्य में अपना नियम बांघंगा और में तस्के अत्यंत बढ़ाऊंगा ॥ ३। तव अबिराम ओंघा गिरा और ईस्घर ने उस्म बातें करके कहा॥ ४। कि में जा ह मेरा नियम तेरे संग कै ग्लौर त् बहुत सी जातिगणं का पिता हैगा ॥ ५। ओर तेरा नाम फ़िर अबिराम न होगा परन्त तेरा नाम अबिरहाम हेगा क्योंकि में ने तमे बहुत सी जातिगणां का पिता बनाया है ॥ &६। और में तसते अत्यत फलमान करूंगा और तरस्से जातिगण बनाऊंगा और राजा तस्स निकलगे॥ ७। और में अपना नियम अपने ओर तेरे मध्य में और तरे पीछ तेरे बंश के उन की पीढ़ियां में सदा के लिये एक नियम ज्ञा उन के साथ सा लो रहे ठहराजंगा कि में तेरा ओर तरे पीछ तरे बंश का ईस्वर छुंगा ॥ ८ं। और में तुझे ओर तेरे पीछ सबदा अधिकार के लिये तेरे बंश का तेरे टिकाव का देश देऊंगा अथे।त्
श्प जत्पत्ति [२७ पब्बे
कनआन का सारा देशओऔर में उन का ईश्वर छंगा ॥ €। फिर ईय्घर ने अबिरहाम से कहा कित् और तेरे पीछे तेरा बंश उन की पीढ़ियो में मेरे नियम के मानें ॥ १५०। से मेरा नियम जा मुस्से और तुम से और तेरे पीछे तेरे बंश से है उसे मानिया यह है कि तम में से हर एक बालक का खतन
किया जाय॥ २९९। ओर तम अपने शरीर की खलड़ी काटा और वह मेरे और तन्हारे मध्य में नियम का चिक्न हेगा॥ १९२। ओर तुम्हारी पीढ़ियाों में हर एक आठ दिन के बालक का खुतनः किया जाय जा घर में उत्पन्न हाय अथवा जा किसी परट्शी से जा तेरे बंश का न हे! दाम से मेल लिया जाय॥ ९१३। जो तेरे घर में उत्पन्न हुआ हे। और जा तेरे दाम से मेल लिया गया हे अवश्य उस का खतनः किया जाय और मेर' नियम तुम्हारे मांस में सबटा नियम के लिये हेगए॥ ९४। ओर जा अखतनः बालक जिस की खलड़ी का खतनः न हुआ हे सो प्राणी अपने लोग से कट जाय कि उस ने मेरा नियम तोड़ा क्षे। ५४। फिर ईम्थर ने अबिरहाम से कहा तेरी पत्नी सरी जो हे त उसे सरी न कच् परन्त उस का नाम सर: रख॥ ९६ । और में उसे आशीष देऊंगा ओर तसम्मे एक बेटा उद्म भी टेऊंगा निश्चय में उसे आशीष टेऊंगा और वह जातिगण होगी और राजा लाग उर्झ हांगे॥ ५७। तब आबिरहाम औंधे मुंह गिरा और हंसा और अपने मन में कहा क्या से! बरस के ढड्ू से लड़का उत्पन्न होगा ओर क्या सरः ज्ञा नब्ब बरस की हे जनेगी ॥ ५ ८। फिर अविरहाम ने ई स्वर से कहा कि हाय कि इसमअऐल तेरे आगे जीता रहे॥ १९ । तब ईगर ने कहा कि तेरी पत्नी सरः तेरे लिये निस्यय णक बेटा जनेगी ओर त उस का नाम इज़हाक रखना और में सबेदा नियम के लिये अपना नियम उदस्मे औपर उस के पीछ उस के बंश से स्थिर करूंगा ॥ २०। और इसमअणल जो है में ने उस के विषय में तेरी सनीं है टेख अब में ने उसे आशीष टिया और उसे फलमान करूंगा ओर उसे अत्यंत बढ़ाऊंगा उद्यम बारह अध्यक्ष उत्पन्न हांगे और उसे बड़ी मंडली बनाऊंगा॥ २९। परन्तु इजहाक के साथ जिसे सरः तेरे लिये टूसरे बरस इसी ठचहराये हुए समय में जनेगी में अपना नियम स्थिर करूंगा ॥ २२। तब उससे बात करने से रह गया ओर अबिरहाम के
९८ पब्बे ] की पस्तक । २6
कक"... अदा. र
पास से ईम्अर ऊपर जाता रहा॥ २३। तब अबिरहाम ने अपने बट इसमअणएल के ओर सब जो उस के घर में उत्पन्न हुए थे और सब जे। उस के द्वाम से मेल लिये गये थे अथात् अविरहाम के घराने के हर एक परुष का लेके उसी दिन उन की खलड़ी का खतनः किया जैसा कि ई स्वर ने उसे कहा था॥ २४। ओर जब उस की खलड़ी का खतनः हुआ तब अविरहाम निन्नाबे बरस का था। २४। ओर जब उस के बेटे इसमअणऐल की खलड़ी का खतनः हुआ तब व॒च्ठ तेरह बरस का था॥ २६। उसी दिन अविरहाम ओर उस के बेटे इसमअएल का खुतनः किया गया॥ २७। ओर उस के घराने के सारे पुरुषों का जा घर में उत्पन्न छए और जा परदटेशियां सै मे।ल लिये गये उस के साथ खुतनः किये गये।
९८ अटारहवां पब्बे ।
' परमेश्वर उसे ममरे के बलूतों में ट्खाई दिया और बुच्च दिन के घाम के समय में अपने तंब के द्वार पर बैठा था॥ २। ओर उस ने अपनी आंखें उठाई ता क्या टेखता हे कि तीन मनव्य उस के पास खडे हैं उन्हें टेखके वह तंब के द्वार पर से उन की भेंट का टौड़ा॥ ३। ओर भमि लें दंडवत किई और कहा हे मेरे खामी यदि में ने अब आप की दृष्टि में अनग्रह पाया है ता में आप की बिनती करता हूं कि अपने दास के पास सेचले न जाइये॥ ४। इच्छा हाय ता थाड़ा जल लाया जाय और अपने चरण घेइये ओर पेड़ तले बिश्राम कीजिये ॥ ५। और में एक कौर रोटी लाजं॑ ओर आप रप्त ह्लजिये उस के पीछे आगे बढ़िये क्योंकि आप इसो लिये अपने दास के पास आये हें तब वे बोले कि जैसा त ने कहा लेसा कर॥ ६। से अविरहाम तंब में सरः पास उतावली से गया और उसे कहा कि फरती कर और तीन नपआ चेखा पिसान लेके गंध और उस के फलक पका॥ ७।'फिर अबिरहाम म्कंंड की ओर देड़ा गया और एक अच्छा केामल बछड़ा लेके दास के दिया उस ने भी उसे सिद्ध करने में चरक किया ॥ ८। तब उस ने मखन और ट्ृघ और वह बछड़ा जा पकाया था लिया ओर उन के आगे घर और आप उन के पास पेड तले खड़ा रहा और उन््हां ने खाया ॥ <। तब उन्हें ने उसमे पछा कि तेरी
क उत्पत्ति [९८ पब्ब
पत्नी सरः कहां है वह बेला कि ट्खिये तंब में हे॥ ५०। ओर उस ने कहा कि जोवन के समय के समान निच्यय में 'तम्क पास फिर आऊंगा और टेख तेरी पत्नी सरः एक बेट जनेगी ओर सरः डस के पीछे तंब द्वार पर सनती थी॥ ९९। ओर अबिरहाम गऔर सरः बढ़े ओर परनिये थे और सरः से स्त्नी का व्यवहार जाता रहा ॥ १५२। तब सर हंसके अपने मन में बे।डी कि क्या अब मम्क बढ़ापे में ओर मेरा खामी भीपरनिया हे फिर आनंद हेगा॥ १५३। तब परमेग्वर ने अविरहाम से कहा कि सरः क्यों यह कहिके मसकुराई कि में जा बढ़िया हूँ सच मच बालक जनंगी॥ ९४। क्या परमेश्वर के लिये काई बात असाध्य जीवन के समय के समान में ठहराय हुए समय मेंध्तम्क पास फिर आऊंगा और सरः को बेटा हेगा॥ १५५। तब सरः यह कहंके मकर गई कि में तो नहों हंसी क्यांकि वह डर गई थी तब उस ने कहा नहों परन्त त हंसी क्षे। २६। तब वे मनव्य वहां से उठ के सट्टम की ओर हखने लगे और अविरहाम उन्हें बिदा करने के उन के साथ साथ चला ॥ ९५७। फिर परमेच्ार ने कहा कि ज्ञा में करता हं से क्या अबिरहाम से छिपाजं॥ २१८। अबविरहाम ते निश्चय एक बड़ा ओर बलवान जाति हेगा ओर एथिवी के सारे जातिगण उस में ऋआशेौष पावेंगे॥ ९८। क्योंकि मैं उसे जानता हूं किवुह् अपने पोछ अपने बालकों ओर अपने घराने का आज्ञा करंगा आर वे न्याय और बिचार करने के परमेम्वर का मार्ग पालन करगे जिसत जा कुछ परमेश्वर ने अबिर दाम के विषय में कहा है से। उस पर पहुंचावे# २०। फिर परमेस्वर ने कहा इस कारण कि सट्टूम आर अमूरः का चित्ञाना बड़ा हु आर इस कारण कि उन के पाप अत्यंत गरू हुण॥ २९॥। में अब उतरक द् खूंगा जा उस के चिज्ञाने के समान जो मम्कलें पहुंची ह उन््हां ने किया है और यदि ही ता में जानंगा। २२। तब उन मनद्यों ने वहां से अपने मुच् फरे और सद्टम की ओर गये परन्तु अबिरहाम तद भी परमेखर के आग खड़ा रहा॥ २३। और अविरहाम ने पास जाके कहा कि क्य| तू दुष्ट के संग अर्मो' के भी नष्ट करेगा ॥ २४। यदि नगर में पचास धर्मों हाय॑ क्या लद भी नष्ट करेगा और उस के पचास घर्मियां के लिये उस स्थान के न
२८ पच्चे] की पस्तक । ३२
कछाडंगा॥ २४। दुष्ट के संग धर्मों का मारना ऐसी बात तस्े परे हेय और कि धर्मी के दुष्ट के समान करना तस्पे टूर हे।य क्या सारो एथिवी का न्यायी यथार्थ न करंगा॥ २६। तब परमेग्यर ने कहा यदि में सट्टूम नगर में पचास धर्मों पाऊं ता में उन: के लिये सार स्थान का कछाड़ हेऊकगा॥ २७। फिर अबिरहाम ने उत्तर टके कहा कि टेख में ने परमेश्वर के आगे बोलने में ठिठाई किई यद्यपि में धघल ओर राख हूं ॥ र२८। यदि पचास घर्मियां से पांच घट हों ता क्या पांच के लिय सार नगर का नाश करंगा तब उस ने कहा यदि में उस में पेंतालौस पाऊं तो उसे नाश न करूंगा॥ २८। फिर उस ने उसे कहा यदि चालीस वहां पाये जांवें तब उस ने कहा में चालीस के कारण ऐसा न करूंगा ॥ ३०। फिर उस ने कहा हाय कि परमेस्पर क्रुड्ट न हेववे तो में कहूं यदि वहां तीस हेाव तब उस ने कहा यदि में वहां तीस प।ऊं ते एसा न करूंगा ॥ ३१। फिर उस ने कहा कि द्ख में ने प्रभ के आगे बालने में ठढिठाई किई यटि बीस हौ वहां पाये जायें तब उस ने कहा में बौस के कारण उसे नाश न करूगा॥ ३२। फिर उस ने कहा हाय कि परमेग्र क्रुइ्ट न होवे ते! में अब की बार फिर कहूं यदि वहां ट्स ही पाये जावें तब उस ने कहा में ट्स के कारण उसे न।श न करूंगा ॥ ३३। तब परमेग्वर अबविरहाम से बात चौत समाप्त करके चला गया और अविरहाम अपने स्थान के फिरा ।
२८ जन्नौसवां पब्ब ॥
। ५ सांमक के दो टूत सट्ूम में आये ओर लत सट्टम के फाटक पर ठा था उन्हें देखकर लूत उन से भेंट करने के! गया और भूमि लो दंडवत किई॥ २। ओर कहा कि हे खामिया अपने दास के घर की और चलिये ओर रात भर उहरिये और चरण घाइये ओर तड़के उठके अपने मागे लीजिये तब उन््हों ने कहा कि नहों परन्तु हम रात भर सड़क में रहेंगे॥ ३। पर जब उस ने उन्हें बहुत ट्बाया तब वे उस की ओर फिरे और उस के घर में आये तब उस ने उन के लिये जेवनार किया ओर अखमीरी रोटी उन के लिये पकाई ग्र उन्हें ने खाई ॥
हर उत्पत्ति [२६८ पत्थ
४। उन के लटने से आगे सट्ट्म के नगर के मनव्यों ने क्या तरुण क्या बढ़े सब लोगों ने चारों ओर से आके उस घर का बेरा॥ ५। ओर लूत का पुकारके कहा कि जे पुरुष तेरे यहां आज रात आये हैं से कहां हें हमारे पास उन्हें बाहर ला जिसतें हम उन से संगम करें ॥ ६। और लत द्वार से उन पास बाहर गया ओर अपने पीछे दार बंद किया॥ ७। और कहा कि हे भाइये ऐसी दुृष्टता न करना ॥ ८। देखे मेरी दो बेटियां हैं जो पुरुष से अजन्ञान हें कहे तो मैं उन्हें तन््हारे पास बाहर लाऊं ओर जो तम्हारी दृष्टि में भला लगे से। उन से करो केवल उन मनय्यां से कुछ न करो क्यांकि वे इस लिये मेरी छत की छाया तलेआये कं ॥ ८। उन््हों ने कहा कि हट जा ओर कहा कि यह एक जन हस्में टिकने के! आया से अब न्यायी होने चाहता कहे अब हम तेरे साथ उन से अधिक बुराई करेंगे तब वे उस पुरुष पर अधीात् लत पर हुलर करके आये और द्वार ताड़ने के म्पटे ॥ १०। परन्त उन परुषों ने अपने हाथ बढ़ाके लत का घर में खोाँच लिया और द्वार बंद किया॥ २९। और क्या छोटे क्या बड़े सारे मनव्यों को जो घर के द्वार पर थे अंधापन से मारा यहां लो कि वे द्वार ढूंढत ढूंढते थक गये ॥ ९५२। तब उन पुरुषों ने लत से कहा कि तेरा काई और यहां है जवांई अथवा तेरे बेटे अथवा तेरी बेटियां जे। काई इस नगर में तेरा हे उन्हें लेकर इस स्थान से निकल जा॥ ९१३। क्योंकि हम इस स्थान का नाश करेंगे इस लिये कि इन का चिज्ञाना परमेग्र के आगे बड़ा हे और परमेमग्वर ने हमें इसे नाश करने का भेजा क्षे 8 ९४। तब लूत निकला और अपने जवांदयों से जिन्हें से उस की बेटियां ब्याही थीं बेला ओर कहा कि उठा इस स्थान से निकले क्योंकि परमेग्र इस नगर के नष्ट करता है परन्त वह अपने जवांइयों के आगे जैसा काई ठठेलू दिखाई टिया ॥ १४ । ओर जब बिहान हुआ टूतों ने लत के शौघ करवाके कहा कि उठ अपनी पत्नी ओर अपनी हे बेटियां जो यहां हैं ले जा न है| कि तू इस नगर के दंड में भर्त हे जाय॥ २६। और जब लो बुद्द विलंब करता था उन पुरुषों ने उत का और उस की पत्नी का और उस की दाने बेटियां का हाथ पकड़ा क्यांकि परमेश्वर
२८ पब्ब] की पुस्तक । ३३
की कृपा उस पर थी गैर उसे निकालकर नगर के बाहर डाल दिया ॥ ९७ । और उन्हें बाहर निकालके थे कहा कि अपने प्राण के लिये भाग और पीछे मत ट्खना और सारे चैगान में न उह्दरना पहाड़ पर भाग जा न हेोवे कि तू भव्म होवे ॥ ९८। तब लूत ने उन्हें कहा कि हे मेरे प्रभु रेसा नहों ॥ ९८ । देखिये अब आप के दास ने आप कौ दृष्टि में अनग्रद पाया है और तू ने अपनी दया बढ़ाई हे जो तू ने मेरे प्राण बचाने में ट्खिई है में अब पहाड़ पर नहीं जा सक्ता न हावे कि काई बिपत मुक्त पर पड़े और में मर जाऊं ॥ २० । अब टे खिये कि यह नगर भागने के। समीप है जर वह छाटा है मस्से उधर जाने टौजिये वह क्या छाटा नहीं से। मेरा प्राण बच जायगा॥ २९। और उस ने उसे कहा कि टेख इस बात के विषय में भो म ने तरेमंह का ग्रहण किया है कि में इस नगर के जिस की त ने कद्दी उलट न देऊंगा॥ २२। शीघ्र कर ओर उधर भाग क्योंकि जबलोीं तू वहां न पहुंच में कुछ कर नहों सक्ता इस लिये उस नगर का नाम सुग्र॒ रकवा ॥ २३। सूर्य एथिवी पर उदय हुआ था जब लूत स्य में पहुंचा ॥ २४। तब परमेगर ने सटूम ओर उमरः पर गंधक ओर आग परमेम्थर कौ ओर से खगे से बरसाया ॥ २४। और उन नगरों के। और नगरों के सारे निवासियों का और सारे चेगान के और जो कुछ भमि पर ऊगता था उलट दिया॥ २६। परनन््त उस कौ पत्नी ने उस के पीछे से फिरके टेखा और वह लोन का खंभा बन गई ॥ २७। ज" और अबिरहाम उठके विहान के तड़के उस स्थान में जहां वच्द परमेश्वर के आगे खड़ा था आ पहुंचा॥ २८। और उस ने सट्टूम और अमरः और चेगान की सारी भमि की ओर दृष्टि किई तो क्या देखता क्षे कि उस भमि से भट्ठी का सा घाआं उठ रहा है ॥ २८। और यों हुआ कि जब ई प्र ने चेगान के नगरों का नष्ट किया तब इग्र ने अबिरहाम के स्मरण किया और उन नगरों के जहां लूत रहता था नष्ट करते हुए लत का उस बिपत्ति से छड़ाया॥ ३०। और लत अपनो बेटियां समेत सग्र से पहाड़ पर जा रहा क्योंकि वह सग्र में रहने के डरा तब वह गैर उस की दो बेटियां एक कदला में जा रहे ॥
६९। और पहिलेंठो ने छटकी से कहा कि हमारा पिता ढड़ क्षे और 5 [&, 8. 8.]
३४ उत्पत्ति [२० पर्ब्ब
एथिवी पर काई पुरुष नक्चों रह्म जे जगत की रीति के समान हमें ग्रहण करे॥ ३२। से। आग्ये। हम अपने पिता के! दाख रस पिलावें और हम उस के साथ शयन करें कि हम अपने पिता से बंश जगांवें॥ ३४६। तब उन््हों ने उस रात अपने पिता के द्ाख रस पिलाया और पहिलोंटी भीतर गई और अपने पिता के साथ शयन किया उस ने उस के शयन करते ओर उठते सुरत न किई॥ ३६४। और जब दूसरा दिन हुआ पहिलोंटी ने छटकी से कहा कि देख में ने कल रात अपने पिता के साथ शयन किया हम उसे आज्ञ रात भी ट्ाख रस पिलांवं ओर त् जाके उस के साथ शयन कर जिसतें हम अपने पिता का बंश जगाव॥ ३६४ । तब उन््हों ने अपने पिता के! उस रात भी दाख रस पिलाया और कूटकी ने उठके उस के साथ शयन किया उस ने उस के भी न शयन करते न उठते हुए सुरत किई॥ ३६। इस रीति से लूत की दोनों बेटियां अपने पिता से ग्भिणी हुई॥ ३७। और पहिलोंठो एक बेटा जनी ओर उस का नाम माअब रक्खा वह्ती आज लो माअबियों का पिता ह्े। ३८। गर छटकी भी एक बेटा जनी ओर उस का नाम विनअमी रक्था श्र वही आज लो अमन के बंश का पिता है ॥
२० बीसवां पब्बे ॥
शि अविरहाम ने वहां से टक्छिन के देश के यात्रा किई और काटिस 7र रूर के बीच ठहरा और जिरार में टिका ॥ २। और अविरहाम अपनी पत्नी सरः के बिषय में बेला कि यह मेरी बहिन हे से जिरार के राजा अविमलिक ने भेजके सरः के लेलिया ॥ ३। परन्तु रात का ईस्वर ने अबिमलिक पास ख्त्न में आके कहा कि देख तू इस स्त्री के कारण जिसे त् ने लिया हे मर चुका क्योंकि वुक्त पति से ब्याही है ॥ ४। परन्त अविमलिक उस पास न आया था तब उस ने कहा कि हे परमेस्वर क्या त घर्मो' जाति का भी मार डालेगा ॥ ६ । क्या उस ने मरे नहों कहा कि वह मेरी वह्चिन क्षे ओर वुह आपर्ी बेली कि वह मेरा भाई हे में ने अपने मन की सच्चाई और हाथ की निर्दा/जता से ऐसा किया हे॥ ६ । तब ईय्यर ने उसे खन्न में कहा कि में भी जानता #॑ कि तू ने अपने
२० पब्बे] की पुस्तक । ३५
मन की सच्चाई से एसा किया हे क्योंकि में ने भी तसे मेरे बिरुड्ड पाप करने से रोका इस लिये में ने तक उसे छने न दिया॥ ७। से अब उस परुष के उस की पत्नी फर दे क्यांकि वह भविय्यद्क्षा क्षे ओर वह तेरे लिये प्रार्थना करेगा और त जीता रहेगा परन्त यदि त उसे फेर न देगा तो यह जान कि त और तेरे सारे जन निच्यय मरेंगे ॥ प८ू। तब अबिमलिक ने विह्ाान के! तड़के उठकर अपने सारे सेवकों का बलाया ओर थे सारी बातें उन्हें सनाई तब वे वहुत डर गये ॥ «८ । तब अबिमलिक ने अविरहाम के बलाया और उसे कहा कि त ने हम से क्या किया हे और में ने तेरा क्या अपराध किया कितू मस्त पर और मेरे राज्य पर एक बड़ा पाप लाया ह तने मस्स अनचित काम किये ॥ ९५०। फिर अबविमलिक ने अविरहाम से कहा कि तू ने क्या देखा जे। त ने यह काम किया है ॥ ९११५ | अविरहाम बाला इस कारण कि में ने समभ्का कि निशञ्यय इंस्वर का भय इस स्थान में नहों है ओर मेरी पत्नी के लिये वे मस्ते मार डालेंगे ॥ ५२। और तथापि वह मेरी बहिन निश्यय के वह मेरे पिता की पत्रो हे परन्त मेरी माता की पत्री नहों से मेरी पत्नी हुई॥ २९३। और जब ईम्घर ने मेरे पिता के घर से मस्के भ्वमाया ता य॑ हुआ कि में ने उसे कहा कि मस्त पर त यही अनग्रह कर कि जहां कहों जिधर हम जायें मेरे विषय में कह कि वुच्द मेरा भाई है ॥ १५४। तब अबिमलिक ने भेड़ बकरी गाय बेल ओर दास दट्ासियां लेकर अबिरहाम के दिया और उस की पत्नी सरः के भी उसे फर दिया॥ ९५४ । फिर अबविमलिक ने कहा कि देख मेरा टेश तेरे आगे क्े जहां तेरा मन भावे तहां रह॥ ९६। और उस ने सरः से कहा क ट्ख में ने तेरे भाई का सहख टकड़ा चांदी टिई क्ञे रख तेरे सारे संगियों के लिये और सभों के लिये वह तेरी आंखों की ओट हेगी से वुह यां टूपटी गई॥ ९७। तब अविरहाम नेई य्मर की प्रार्थना किईं ओर ईस्घर ने अविमलिक और उस की पत्नी और उस की टासियों के चंगा किया ओर वे जन्ने लगों॥ ९८। क्योंकि परमेश्वर ने अविरहाम कौ पत्नो सरः के लिये अबिमलिक की सारी कोाखों के बंद कर दिया था!
ह३्६ उत्पत्ति [२९ पब्बे
२९५ इक्ौसवां पत्वे ।
ञ्ः अपने कहने के समान परमेग्वर ने सरः से भंट किया और अपने 9७. ८४: ००. ७ न के ५ बचन के समानपर मेग्यर ने सरः के विषय में किया ॥ २ । क्यांकि सरः गर्भिणी हुई और अविरहाम के लिये उस के बढापे में ठीक उसी समय में जो ईश्वर ने उसे कहा था एक बेटा जनी ॥ ३। और अ्रविरहाम ने अपने बेटे का नाम जिसे सरः उस के लिय जनी थी ईज॒हाक रक््वा॥ ४। ओर ईश्वर की आज्ञा के समान अविरहाम ने आठवें टन अपने बंटे इज॒हाक का खतनः किया॥ ४। जब उस का बेटा इजहाक उस्म उत्पन्न हुआ तव अबविरहाम सो बरस का ढड् था॥ ६। तव सरः बाली कौ इंज्र ने मुस्ते हंसाया सारे सनवैंये मेरे लिये हंसेंगे ॥ ७। फिर वह बेली कि कौन अविरहाम से कहता कि सरः बालक को हृथ पिलावेगी क्योंकि उस के बढ़ापे में में उस के लिये बटा जनी ॥ ८। और वह लड़का बढ़ा औएर उस का टूधघ छ ड्राया गया और इजहाक के दृूथ छड़ाने के दिन अबिरहाम ने बड़ा जवनार किया ॥ €। और सरः ने मिखों हाजिरः के बंटे का जिसे वह अविरहाम के लिये. जनी थी चिढ़ाते टखा॥ २५०। उस ने अबिरहाम से कद्दा कि आप इस लोंडो का ओर उस के बेटे के निकाल ट्रौजिये क्योंकि यह 5५ डो बन 2 का के हि ९ लाॉडो का बंटा मेरे बेटे इज॒हाक के साथ अधिकारी न होगा ॥ २९९ । और अपने बेटे के लिये यह बात अबिरहाम का बड़ी कड़वी लगी॥ १५२। तब ईश्वर ने अविरहाम से कहा कि लड़के के और तेरी पु डो 222 वर दिलीप विधकिर 58३. 90... सिर हैः लोंडो के बिषय में तुझे कड़वी न लगे सब जा सरः ने ते कहा मान ले क्योंकि तेरा बंश इज॒हाक से गिना जायगा॥ १५३। ओर में उस लोंडी के बेटे से भी एक जाति उत्पन्न करूंगा क्योंकि वुच्ट तेरा बंश हे॥। जप 3 रे रोटी 0 १४। तव अबिरहाम ने बड़े तड़के उठके राटी और एक कुप्प में पानी लिया और हाजिर: के कघे पर धर दिया ओर लड़के के भी उसे सौंप के उसे बिदा किया वह चल निकली ओर विञरसबः के बन में भ्वमती फिरी॥ २५४। और जब कुप्पे का पानी चक गया तब उस ने उस लड़के के। एक स््काड़ी के तले डाल टिया॥ २६। और आप उस के सम्मख
२९ पत्ब] की पुस्तक । ३७
एक तौर के टप्पे पर ट्वर जा बैठी क्यांकि वह बाली कि में इस बालक की झत्यु के।न देख ओर वुच्द उस के सन्मुख बैठ के चित्ला चिल्ला रो ९७। तब ईस्र ने उस वालक का शब्द सुना और ईयग्वर के टूत ने सगे में से हाजिर: के पकारा और उसे कहा कि हे हाजिर: तरफ क्या हुआ मत डर क्ञयांकि जहां वह बालक हो तहां इं ग्थर ने उस के शब्द का सना है॥ ९५८। उठ और उस लड़के के उठा और उसे अपने हाथ से धर लेकि में उस्ये एक बड़ी जाति वनाऊंगा॥ १५९। और ईग्यर ने उस की आंखें खालीं तब उस ने पानी का एक कुआं ट्खा और उस ने जाके उस कृप्पे के पानौ से भरा और उस लड़के के पिलाया॥ २०। ओर ई स्वर उस लड़के के साथ था और वुच्द वढ़ाऔर बन में रहा किया और घनघघधारी हुआ॥ २१। फिर उस ने फारान के बन में जाके निवास किया ओर उस की माता ने मिख देश से उस के लिये एक पत्नौ लिई ॥ २। और उस समय में यों हुआ कि अविमलिक् और उस कौ सेना के प्रधान फीकुल्न ने अविरहाम के कहा कि सब कार्यों में जो। त करता च्े ईम्घर तेरे संग ह्े॥ २३। ओर अब मरस्मझम ईम्वर कौ किरिया खा कि में तस्से और तेरे बट और तेरे पेतां से छल न करूंगा उस अन ग्रह के समान जो में ने तम्क पर किया है मस्स और उस भमि से जहां त टिका हे करे॥ २४। तव अबिरहाम बाला कि में किरिया खाऊंगा॥ २५ । और अबिरहाम ने पानी के एक कएं के लिये जिसे अविमलिक के सेवकां ने बरबस्तों से ललिया था अविमलिक के ट्पटा॥ २६। तब अविमलिक ने कहा कि में नहीं जानता किस ने यह काम किया है और आप ने भी ता मस्स न कहा और में ने भी तो आजह्दी सना॥ २७। फिर अबिरहाम ने भेड़ और गाय बैल लेके अविमलिक के ट्यि ओर डन दोनों ने आपस में नियम बांघा ॥ श८। तब अबिरहाम ने मंंड में से सात मेन््ने अलग रक्खे॥ २८। और अबिमलिक ने अविरहाम से कहा कि आप ने भेड़ के सात मेम्ने क्यों अलग रकक्खे हैं॥ ३०। उस ने कहा इस कारण कि तू उन भेड़ के सात मेन्तें के मेरे हाथ से ले कि वे मेरी साक्षो होवें कि में ने यह कुआं खाद है ॥ ३९। इस कारण उस ने उस स्थान का नाम बीअरसबअ् रकक्खा क्योंकि उन ट्रानों ने वहां आपस
ह्ष उत्पत्ति [२२ पत्बे
में किरिया खाईं॥ ३२। सो उन््हों ने वीअरसबअ में नियम बांघा तब अबिमलिक ओर उस का प्रधान सेनापति फौकुज्न उठे ओर फिलिस्तीयों के दृश में फिर गये ॥ ३३। तब उस ने बीअरसवच्य में कुंज लगाया जऔर वहां सनातन के ईम्घर परमेश्वर का नाम लिया॥ ३४। ओर अबिरहाम फिलिस्ती के दृश में बहुत ट्नि लां टिका ॥
२२ बाईसवां पब्बे ।
नबातां के पीछ यूं हुआ कि ईश्वर ने अबिरहाम की परौक्षा किई
और उसे कहा हेअबिरहाम वह बेला कि ट्ख इहांह्ुं॥ २।फिर उस ने कहा कि त् अपने बेटे का अपने एकलेते इजहाक के जिसे त प्यार करता हे ले आर मेरिः के देश में जा और वहां पहाडे में से एक पहाड़ पर जा में तम्के बताऊंगा डसे हाम की भंट के लिये चढ़ा ॥ ३। तब अविरहाम ने तड़के उठकर अपने गटहे पर काठी बांघी और अपने तरुण में से दा के! और अपने बेटे इज॒हाक के! साथ लिया और हे।म की भेंट के लिये लकड़ियां चौरीं और उठके जहां ईयग्वर ने उसे आज्ञा किई थी तहां चला गया॥ ४। तीसरे दिन अबविरहाम ने अपनी आंखें ऊपर किई ते उस स्थान को टूर से टेखा॥ ५। तब अबिरहाम ने अपने तरुणां से कहा कि गटहे के साथ यहीं ठहरो और में इस लड़के के साथ वहां लो जाता हुं ओर सेवा करके फिर तम्हारे पास आंवबेंगे ॥ ६ । तब अबिरहाम ने होम की भंट को लकड़ियां लेकर अपने बट इज॒हाक पर लाहौं और आग और छरी अपने हाथ में लिई और होने! साथ साथ गय॥ ७। और इजहाक अपने पिता अबिरहाम से बेला कि हे पिता वह बोला हे बेटे में यहीं ू॑ उस ने कहा कि देखिये आग ओर लकड़ियां ता हैं पर हाम की भेंट के लिय भेड़ कहां हे॥ ८। जऔ और अबिरहाम बेला कि हे बेटे ईस्यर हेाम की भेंट के लिय भेड़ आपरच्दो सिद्ध करेगा से वे दोनों साथ साथ चले गये ॥ «। और उस स्थान में जहां ईम्र ने कहा था आय तव अविरहाम ने वहां एक बेदी बनाई और उन लकड़ियों के वहां चना और अपने बेटे इजुचह्ाक के बांघके उस बेटों में लकड़ियाों पर घरा॥ ९०। और अविरहाम ने
२२ पत्बे] की पस्तक । ३८
छरो लेके अपने बट का घात करने के लिये अपना हाथ बढ़ाया ॥ ११५। तब परमेग्वर के द्वत ने खगे पर से उसे पकारा कि अबिरहाम अबविरहाम वह बाला यहों #ु॥ ९५२। तब उस ने कहा कि अपना हाथ लड़के पर मत बढ़ा और उसे कुछ मत कर क्योंकि अब में जानता हू कि तू ईश्वर से डरता हे क्यांकि तू ने अपने बेटे अपने एकलौते के मुस्स न रख छोड़ा ॥ १५३। तब अविरहाम ने अपनी आंखें ऊपर करके देखा और क्या टेखता क्ञे कि अपने पीछ णक मेंढ़ा क्काड़ी में सोंगें। से अटका हुआ है तब अविरहाम ने जाके उस मेंढ़ के! लिया और हेम की भेंट के लिये अपने बेटे की संती चढ्ाया॥ ९४। ओर अबिरहमम ने उस स्थान का यह नाम रक्डा कि परमेश्वर टेखेगा जेसा कि आज लो कहा जाता हे कि पहाड़ पर परमेग्घर ट्खा जायगा ॥
९५ | फिर परमेग्र के टृत ने दाहराके खभे में से अबिरचह्ााम का पकारा॥ २९६। और कहा कि परमेग्वर कहता हे कि में ने अपनी हों किरिया खाई क्ञे इस कारण कि त ने यह कार्य किया और अपने बेटे अपने एकलाते का न रख छाड़ा॥ २७। में तमे आशोष पर आशीष टेजंगा और आकाए के तारों और समट्र के तौर के वाल के समान तेरे बंश के! बढ़ाजंगा और तेरे बंश अपने बैरी के फाटक के अधिकारी हांगे॥ २९८। और तरे बंश में एथिवी के सारे जातिगण आशीष पावेंगे इस कारण कि त ने मेरा शब्द माना क्षे । ९२८। और अबिरहाम अपने तरूणां के पास फिर आया औरर वे उठके एकड्टे बीअरसबञ के गये और अविरहाम बीअरसबअ में रहा॥ २०। ओर इन बातों के पीछ ऐसा हुआ कि अबिरहाम के संदेश पहुचा कि मिलकः भी तर भाई नहर से बालक जनी॥ २२९। ऊज उस का पहिलोंठा और उस का भाई बज और कमणेल अराम का पिता॥ २२। झओऔर कसद और हज़ ओर फिल्टूस और इट्लाफ ओर बतणल ॥ २३। ओर बतणल से रिबक उत्पन्न हुई मिलकः अबिरहाम के भाई नह्ूर से ये आठ उत्पन्न हुए ॥ २४। ओर उस की सरेतिन से जिस का नाम रूमह था उससे तिबख और जहम ओर ताहाश और मअकः उत्पन्न हुए ॥
४० उत्पत्ति [२३ पब्बे
२३ तेईंसवां पब्ब ॥
जो सर: की बय एक से। सताईंस वरस की हुई सरः के जीवन के
बरस इतने थे। २। ग और सरः करयत अरबञ्ज में जे। कनछएन देश में हबरून कहे मर गई तब अबिरहाम सरः के लिये बिलाप करने और राने के आया॥ ३। फिर अविरहाम अपने म्हतक से उठ खड़ा हुआ ओर हित्त के बंटों से यह कहिके बेला॥ ४। कि में परदेशी और तुम में टिकवैया हूं तुम अपने यहां मुझ्के एक समाधि का स्थान अधिकार में दो जिसतें में अपने म्हतक का अपनी दृष्टि से अलग गाड़ं॥ ५। हित्त के संतान ने अबिरहाम का उत्तर टेके कहा ॥ ६। कि हे खामी हमारी सनिये आप हस्में ईम्वर के अध्यक्ष हैं से आप हमारे समाधिन में से चनके एक में अपने म्हतक का गाड़िय हस्प काई अपनी समाधि आप से न रख छाड़ेगा जिसतें आप अपने स्हतक का गाड़ें। ७। तब अबिरहाम खड़ा हुआ और उस देश के लेग अथात हिन्न के संतान के प्रणाम किया॥ ८। और उन से व॒त चौत करके कहा कि यदि तम्हारा मन हावे कि में अपने मस्तक के अपनी दृष्टि से अलग गाड़ ता मेरी सने और मेरे लिये सहर के बेटे इफरून से बिनती करा॥ «८। जिसतें वह मकफीलः को कंदला मर्से दवेजो उस के खत के सिवाने पर हे उस का परा माल लके मेरे बश में करद जिसतें में तम्हां में एक समाधि का अधिकार रक्वें॥ १५०। और इफरून हित्त के संतानों में वास करता था और इफरून हत्ती ने छिक्त के संतानों के और सबके सुन्नें में जे। नगर के फाटक में गये थे अविरहाम का उत्तर में कहा॥ २९९। नहीं मेरे प्रभ मेरी समिय में यह खेत आप के देता ह और बुच्द कंटला जो उस में है आप के ट्ता हूं में अपने लागों के बट के आगे आप का ट्ता कु अपना स्हसक गाड़िय॥ २१५२। तब अविरहाम ने उस दश के लोगों का प्रणम किया॥ २३। फिर उस टेश के लोगों के स॒न्ने में वह इफरून से यां कहिके बोला कि यदि त ट्गा तो मेरी सुन ले में तुझे उस खेत के जिये रोकड़ टजऊंगा मस्झ ले और में अपने स्वतक के वहां गांडंगा॥ १५४। इफरून ने अबिरहाम
२४ पन्बे] को पस्तक । ४२
के उत्तर टेके कह ॥ १५। मेरे प्रभ मेरी सनिये उस भूमि का मेल चार सो शैकल चांदी है यह मेरे और आप के आगे क्या बस्त हे से आप अपने म्हतक का गाड़िये॥ ९६। और अबिरहाम ने इफरून को मान लिई और उस चांदी के इफरून के लिये तैल दिया जो उस ने दछित्त के बेटों के सन्ने में कही थी अथात् चार सो शैकल चांदोौ जिन की चलन बैपारियों में थी॥ २५७। से। इफरून का खेत जो मकफीलः में ममरी के आगे था बुच खेत और कंदला जो उसमें थी और उस खेत में के सारे पेड़ जो चारों ओर उस के खिवाने में थे॥ ९८। हित्त के संतानों के आगे और सभोंके आगे जो नगर के फाटक में से भीतर जाते थे अबिरहाम के अधिकार के लिये दृढ़ किये गये ॥ १७। इस के पीछे अविरहाम ने अपनी पत्नी सरः के मकफीलः के खेत की कंदला में जो ममरी के आगे हे गाड़ा वही हबरून कनआन टेश में हे॥ २०। और वुच्द खेत और उस में की कंदला हित्त के संतानों से अबिरहाम के हाथ में समाधि स्थान के लिय दृढ़ किये गये ॥
२४ चोजीसवां पब्बे ।
जी अविरहाम हड़ ओर टिनी हुआ और परमेश्वर ने सब बातों में अबिरहाम के! बर टिया था॥ २। और अबिरहाम ने अपने घर के पराने सेवक के। जे। उस की सारी संपत्ति का प्रधान था कहा कि अपना हाथ मेरी जांच तले रख॥ ३। ओर में तम्क्र से परमेश्वर खगे के ई स्वर और एथिवी के ईम्र कौ किरिया लेऊंगा कि त कनआनियों को लड़कियों में से जिन में म रहता हूं मेरे बट के लिये पत्नी न लेना ॥ ४। परन्त त मेरे हेश ओर मेरे कुट स्व में जाइया और मेरे बटे इजहांक के लिये पत्नो लोजिया॥ ४। परन्त उस सेवक ने उसे कहा कि क्या जाने वह स्त्रो इस दश में मेरे संग आने का न चाहे तो क्या अवश्य में आप के बंटे का उस दृश में जहां से आप आये हें फिर लेजाऊं ॥ ६। अविरहाम
उसे कहा चौकस रह त मेरे बट के उचर फिर मत ले जाना ॥ ७। परमेम्थर खगे का ईस्वर जा मेरे पिता के घर से ओर मेरे जन्म भमि
से मझ्के निकाल लाया और जिस ने मस्ते कहा और मकर से किरिया 6 (3. 8. 8.]
४२ उत्पत्ति [२४ पच्बे खाके बाला किमें तेरे बंश का यह देश ह् जंगा वच्दी तेरे आगे अपना ट्टूत भेजेगा और वहीं से त मेरे बेटे के लिये पत्नी लेना॥ ८। और यदि वह स्त्री तेरे साथ आने का न चाहे तो त मेरी इस किरिया से छट जायगा केवल मेरे बेटे को उधर फिर मत ले जा ॥ ८ | उस सेवक ने अपना हाथ अपने खामी अविरहाम की जांघ तले रकद्ा और उस बात के बिषय में उस के आगे किरिया खाइं॥ ९०। और उस सेवक ने अपने खामी के ऊंटों में से ट्स ऊंट लिये और चल निकला क्योंकि उस के खामी की सारी संपत्ति उस के हाथ में थी से! वह उठा और अरामनहरी में नहर के नगर के गया॥ ९१५। और उस ने अपने ऊंटों को नगर के बाहर पानी के कुएं के पास सांस के समय में जब कि स्त्रियां पानी भरने का बाहर जाती हैं बैठाया॥ ५२। ओर कहा कि हे परभेग्यर मेरे खामी अविरहाम के ईम्वर में आप की बिनती करता हूं आज मेरा कार्य सिद्ध कीजिये और मेरे खामी अबिरहाम पर ट्या कीजिये ॥ १३। देख में पानी के कएं पर खड़ा हू और नगर के परुषां की बेटियां पानी भरने आती हैं॥ २९४। एसा हेवे कि वह कन्या जिसे में कहूं कि अपना घड़ा उतार जिसतें में पीज॑ ओर वह कहे कि पी और में तेरे जंटों के भी पिलाऊंगी वही हे जिसे त् ने अपने दास इज़हाक के लिये ठहराया है और इसी से मैं जानंगा कि तू ने मेरे खामी पर दया किई है॥ १५५ । इतनी बात समाप्त न करते हो ऐसा हुआ कि देखो रिबकः जे! अविरहाम के भाई नहर की पत्नी मिलकः के बेटे बतूएल से उत्पन्न हुईं थी अपना घड़ा अपने कांघे पर घरे हुए बाहर निकली ॥ ९६ । और बह कन्या रूपवती और कुमारी थी जिस्म परुष अज्ञान था उस कएं पर गई और अपना घड़ा भरके ऊपर आई॥ १५७। वह सेवक उस की भेंट के दोड़ा ओर बोला मैं तेरी विनती करता हूं अपने घड़े से थाड़ा पानी पिला॥ १५८। वह बोली कि पीजिय मेरे प्रभ और उस ने फरती करके बड़ा हाथ पर उतारके उसे पिलाया ॥ ९५८ । जब उसे पिला चुकी ता बाली में तेरे ऊंटों के लिये भी जबलों वे जल से ढप्त हें खोंचती जाऊंगी॥ २०। और उस ने फरती करके अपना घड़ा कटरे में उंडेला और फिर कएं पर भरने का होड़ी और
२४ पर््ब] की पस्तक । 8३
उस के सब ऊंटों के लिये खौँंचा॥। २९५। और वुच्ठ पुरुन आये करके टेख रहा कि परमेग्यर ने मेरी यात्रा सफल किई हे कि नहीं ॥ २२। गौर यों हुआ कि जब ऊंट पी चके ता उस परुष ने आघे शेकल भर सेने की एक नथ और ट्स भर से ने के द। खड़वे उस के हाथों के लिये निकाले॥ २३। ओर कहा कि तू किसकी बेटी है मुस्के बता तेरे पिता के घर में हमारे लिये रात भर टिकने का स्थान हैे॥ २४। ओर उस ने उसे कहा कि में मिलकः के बेटे बतएल की कन्या हूं जिसे वह नह्हर के लिये जनी॥ २५। ओर उस ने उसे कहा कि हमारे यहां घास चारा भी बहुत है और रात भर टिकने का स्थान । २६। तब उस परुष ने अपना सिर काया ओर परमेम्धर की टंडवत किई॥ २७। और
कहा कि परमेग्वर मेरे खामी अबिरहाम का ई ग्वर धन्य है जिस ने मेरे खामी के अपनी ट्या और अपनी सच्चाई बिना न छोड़ा मार्ग में परमेग्यर ने मेरे खामी के भाइयां के घर की ओर मेरी अगआई किई॥ २८। तब वह लड़की दोड़ी औएर अपनी माता के घर में ये बातें करचों॥ २८। और लाबन नाम रिवकः का एक भाई-था जो बाहर कएं पर उस मनव्य कने टोौड़ा॥। ३०। और यां हुआ कि जब उस ने वह नथ जैर खड़वे अपनी बहिन के हाथों में ट्खे और जब उस ने अपनी बहिन रिबकः से ये बातें कहते सनी कि इस मनव्य ने मस्के यां कहा वह उस परूुष पास आया ओर क्या टेखता है कि वह ऊंटों के पास कएं पर खड़ा हैं। ३१५। और कहा कि हे इंश्वर के आशीषित
भीतर आ त किस लिये बाहर खड़ा क्षे क्यांकि में ने तेरे और तेरे ऊंटों के लिये घर सिर किया क्षे। ३२। ग्रार बह परुष घर में आया और उस ने अपने ऊंटों के पलान खोले और ऊंटां के लिये घास चारा और उस के और लोागें के जे। उस के साथ थे चरण घाने के जल दिया॥ ३३। और भेजन उस केआगे रक्खा गया पर बुच्द बेतला कि जब लों में अपना संदेश न पहुंचाऊं में न खाऊंगा वुच्द बोला कहिये॥ ३४। तब उस ने कहा कि में अबिरहाम का सेवक 'ूं॥ ३५ । ओर परमेग्वर ने मेरे खामी के बहुत सा बर दिया है ओर वह महान हुआ हे ग्यार उस ने उसे म्ंड और ढार और सेना चांदी और
४४ जत्पत्ति [२४ पब्थे
दास ओर ट्रासियां और जंट और गधे टिये हैं॥ ३६। और मेरे खामी की पत्नी सरः बुढ़ापे में उस के लिये बेटा जनी ओर उस ने अपना सब कुछ उसे दिया है॥ ३७। ओर मेरे खामी ने यह कहके मुस्क से किरिया लिई कि त् कनआनियों की बेटियों में से जिन के देश में में रहता हूं मेरे बेटे के लिये पत्नी मत लीजिया॥ ३८। परन्त मेरे पिता के घराने ओर मेरे कुटंब में जाइये। ओर मेरे बेटे के जिय पत्नी लाइये।॥ ३८ । और में ने अपने खामी से कहा क्या जाने वर स्त्री मेरे साथ न आवे॥ ४०। उस ने मर्के कहा कि परमेग्यर जिस के आगे में चलता हू अपना टूूत तेरे संग भेजेगा और तेरी यात्रा सफल करेगा तू मेरे कुटुम्ब और मेरे पिता के घराने से मेरे बेटे के लिये पत्नी लीजिये।॥ ४९ | और जब त मेरे कुटंब में आवे तब त मेरी किरिया से बाहर होगा ओर यदि वे तस्फे न टेवें तो त मेरी किरिया से बाहर हे। जायगा ॥ ४२ । से। में आज के टन कएं पर आया ओर कहा कि हे परमेग्वर मेरे खामी अबिरहाम के इंश्वर याटि त अब मेरी यात्रा सफल करे॥ ४३। देख में जलके कएं पर खड़ा हूं और यों हे!'शा कि जब कुमारी जल भरने निकले ओर में उसे कहूं कि में तेरी बिनती करता हूं कि अपने घडे से मम्मे थोड़ा पानी पिला॥ ४४। और वह मग्फे कहे कि तू भी पी ओर में तेरे ऊंटों के लिये भी भरूंगी ता वी वुच्द स्त्री हे।वे जिसे परमेग्वर ने भेरे खामी के बेटे के लिये ठहराया है॥ ४५। इतनी बात मेरे मन में समाप्त न हेततेही टेखे। रिबकः अपने कांधे पर घड़ा लेके बाहर निकली और बुच्द कूएं पर उतरी और खोंचा ओर में ने उसे कहा कि मस्के पिला॥ ४६। उस ने फरती करके अपना घड़ा उतारा ओर बाली कि पी ओर में तेरे ऊंटों के भो पिलाऊंगी से में ने पीया और उस ने जंटों के भी पिलाया॥ ४७। फिर में ने उस्झ पछा ओर कहा कि त किसकी बेटी हे बह बोली कि नहूर के बेटे बतूएल की लड़की जिसे मिलकः उस के लिये जनी ओर में ने नथ उस की नाक में ओर खड़वे उस के हाथों में डाले॥ ४८। और में ने अपना सिर काया और परमेम्वर की स्तति किई और अपने खामी अबिरहाम के इंग्र परमेगश्वर का धन्य माना जिस ने मर्से ठीक
२४ पन्बे] की पस्तक । ४8५
मार्ग में मेरी अगुआई किई कि अपने खामी के भाई की बेटी उस के बेट के लिये लेऊं॥ ४८। से अब यदि तुम कृपा ओर सच्चाई से मेरे खामी के साथ व्यवहार किया चाहे तो मुस्क्र से कहा और यदि नहीं तो मुक्त से कहे। कि में दहिने अथवा बांयें हाथ फिरूु॥ ५०। तब लाबन और बतृएल ने उत्तर दिया ओर कहा कि यह बात परमेश्वर की ओर से है हम तुम्े बरा अथवा भला नहों कहि सक्ते॥ ५१५। ट्ख रिबकः तेरे आग हे इसे ले और जा और जैसा परमेश्वर ने कहा है अपने खामी के बेटे की पत्नी इसे कर टे॥ ५२। ओर एसा हुआ कि जब अबिरहाम के सेवक ने ये बातें सनों भमि लॉ परमेश्वर के आगे रंडवत किई ॥
५३। और सेवक ने चांदी और सेने के बतैन और पहिरावा निकाला और रिबक॒ः के। दिया और उस ने उस के भाई और उस की माता के भी बहुमूल्य बस्त टिईं॥ ४४। और उस ने और उस के साथी मनव्यों ने खाया ओर पीया और रात भर ठह रे और वे बिहान के! उठे और उस ने कहा कि मुझे मेरे खामी पास भेजिये ॥ ५५। ओर उस के भाई और उस की माता ने कहा कि कन्या को हमारे संग एक ट्स दिन रहने दौजिये उस के पीछे वुह जायगी॥ ५६। और उस ने उन्हें कह कि मुझे मत रोके कि परमेश्वर ने मेरी यात्रा सफल किई है मस्तरे बिटा करो कि में अपने खामी पास जाऊं ॥ ५७। वेबोले हम उस कन्या के बुलाके उसौसे पूछते हैं॥ ५८। तब उन््हों ने रिबकः के बलाया और उसे कहा कि तू इस परुष के साथ जायगी और बुच्द बोली कि जाऊंगी ॥ ४९। से उन्हें! ने अपनी बहिन रिबकः और उस की टाई और अबिरहाम के सेवक ओर उस के लोगों के। बिदा किया ॥ ६०। और उन्हों ने रिबकः के आशीष दिया और उसे कहा कि तू हमारी बहिन है कड़ोरों की माता हे और तेरा बंश उन के द्वारों का जो उच्मे गैर रखते हैं अधिकारी हेवे॥ ६९। और रिबक्॒ः और उस कौ सहेलियां उ्ीं और जंटों पर चढ़के उस मनुय्य के पीछे हुईं और उस सेवक ने रिबकः के। लिया ओर अपना मार्ग पकड़ा॥ ६२। और इजहाक सजीवन हेखनेवाले के कूएं पर मारे में आ निकला था क्योंकि वुह् टक्खिन देश में रहता था। ६३। और इजहाक संध्याकाल को ध्यान करने के
४६ उत्पत्ति [२५ पब्बे
लिये खेत के निकला उस ने अपनी आंखें ऊपर किई ओर क्या ट्खता हे कि ऊंट चले आते हैं॥ ६४। रिवक॒ः ने अपनी आंखें उठाई और जब उस ने इजहाक का देखा ते। ऊंट पर से उतर पड़ी ॥ ६५ | और उस ने सेवक से पका कि यह जन जो खेत से हमारी भेंट के। चला आता हे कान हे सेवक ने कहा कि मेरा खामी है इस लिये उस ने घंघट लेके अपने तईः टांपा॥ ६६। तब सेवक ने सब कुछ जो उस ने किया था इजहाक से कहा ॥ ६७। ओर इजहाक डसे अपनी माता सरः के तंब में लाया और रिबक॒ः के। लिया वह उस की पत्नी हुई उस ने उसे प्यार किया और इजहाक ने अपनी माता के मरने के पीछ शांति पाई ॥
२५ पच्ीौसवां पब्य ।
त्त् ब अबिरहाम ने कतरः नाम की एक पत्ञली लिई॥ २। और उससे जिमरान और यक॒सान और मिद्ान ओर मिट्यान और इसबाक और सख उत्पन्न हुणए। ३। और यकसान से सिवा और ट्टान उत्पन्न हुए और ट्टान के बटे असर ओर लतसी ओर लै।मी॥ ४ । और मिट्यान के बेटे ऐफः और गिफ्र और हनक और अंविदाः और इल्टाओ उत्पन्न हुए ये सव कतरः के लड़के थे। ५। और अबिरहाम ने अपना सब कुछ इजहाक का टिया॥ &। परनन््त टासियों के बटां का अबिरहाम ने दान दिये और अपने जीते जो उन्हें अपने बेटे इजहाक पास से पूरब टेश में भेज दिया॥ ७। और अविरहाम के जीवन के दिन जिन में वह जीता रहा एक से पचहत्तर बरस थे| ८। तब अबिरहाम ने अच्छ छट्ट बय में परिपर्ण और छड मनव्य हेके प्राण व्यागा और अपने लागों में बटारा गया॥ <। ओर उस के बेटे इज॒हाक ओर इसमअणएल ने मकफीलः की कंदला में छित्ती सुग्र के बेट ईफरून के खेत में जग ममरी के आगे हे उसे गाड़ा। २९०। यही खेत अबिरहाम ने हित्त के बेटों से मेल लिया था अबिरहाम ओर उस की पत्नी सरः वहीं गाडे गये ॥ ९५९५ । और अबिरहाम के मरने के पीछे यों हुआ कि ईस्पर ने उस के बेटे इजुहाक के आशीष दिया और इजहाक सजीवन देखवैया के कएं के पास रहता था॥ १५२। ओर अबिरहाम के बेटे इसमआअणल की
«२५ पर्व] की पस्तक । ४७
अब लकी |
शावली जिसे सरः की लोंडो मिस्ती हाजिर: अबिरहाम के लिये जनी थी ये ह्ैं। ९३। उन की बंशावली की रीति के समान इसमअणल के बेटों के नाम थे हैं इसमअएल का पहिलौंठा नबीत और कौटार ओऔर अट्विएल और मिबसाम॥ २९४ | और मिसमाअ ओर टृमः ओर मस्सा॥ २९४ । ओर हट्र और तेमा और इतर ओर नफौस और किट्मः॥ ९६। थे इसमअणएल के बेटे हें ओर उन के नाम उन की बसतियों और उन की गढ़िया में य हैं और य अपनी जातिगणों के बारह अध्यक्ष थे। ९२७। और इसमअएल के जीवन के बरस एक से सें तौस थे कि उस ने अपना प्राण त्याग और मर गया और अपने लोगों में बटर गया ॥ १५८। और वे हवीौलः से रूर ला जे अरूर के मार में मिस्त्त के आगे हे बसते थे उस ने अपने सारे भाइयें के आगे बास किया ॥ ९८। गैर अबिरहाम के बेटे इजहाक की बंशावली यह क्षे कि अविरहाम से इजहाक उत्पन्न हुआ ॥ २० । इजहाक ने चालीस बरस की बय में रिवकः से बिवाह किया वह फहानअराम के सरियानी बंतएंल की बेटी ओर सरियानी लॉबन की बहिन थी॥ २९॥ और इजहाक ने अपनी पत्नी के लिय परमेश्वर से बिनती किई क्योंकि वुच्द बांस थी ओर परमेग्थर ने उस की बिनती मानी और उस की पत्नी रिबकः गभिणी हुई॥ २२। ओर उस के पेट में बालक आपस में छेड़ा छेड़ी करने लगे तब उस ने कहा यदि यों ता णेसा क्यों हें। और बुह् परमेश्वर से बक्कने के! गई॥ २३। परमेश्वर ने उसे कहा कि तेरे गर्भ में टो। जातिगण कं और तेरी काख से दा रीति के लाग अलग होंगे और एक लाग टूस रे लाग से बलवंत हेगा ओऔःर जेछ कनिष्ठ की सेवा करेगा॥ २४॥ और जब उस के जन्न के दिन परे हुए तो क्या देखते हैं कि उस के गभ जमल थे ॥ २४ । से पहिला ऐसा जैसा रोम का पहिरावा होता हे बालों में छिपा हुआ लाल रंग का निकला ओर उन्हां ने उस का नाम एसो रक्खा॥ २६। उस के पीछ उस का भाई निकला और उस का हाथ एसे की एड़ी से लगा हुआ था और उस का नाम यअकब रण्ख़ा गया जब वह उन्हें जनी ता इजुहाक की बय साठ बरस की थी॥ २७। और लड़के बढ़े और एसे खेत का रहवैया
कक ड्त्पन्ति [२६ पब्ब
और चतर अहेरी था और यञअकब सधा मनव्य तंब में रहा करता था॥ र८। ओर इजहाक एसे को प्यार करता था क्योंकि वह उस के अह्ेर से खाता था परन्त रिबकः यअकब के चाहती थी॥ र२<। और यअकब ने लपसी पकाई और णसे खेत से आया ओर वह थक गया था॥ ३०। और एसे ने यअकब से कहा में तेरी बिनती करता हूं कि इस लाल लाल में से मुझे खिला क्योंकि में मूछित हूं इस लिये उस का नाम अट्टम हुआ ॥ ३९। तब यअकूब ने कहा कि आज अपना जन्म पट मेरे हाथ बेच ॥ ३२। तब णसेो ने कहा टेख मैं मरने पर हूं आर इस जन्म पद से मस्ते क्या लाभ हेगा॥ ३३। तब यअकब ने कहा कि आज मकर से किरिया खा उस ने उद्मे किरिया खाई और अपना जन्म पट यअकव के हाथ बेचा॥ ३४। तब यञकब ने रोटी और मरूर की टाल की लपसी दिई उस ने खाया और पीया और उठके चला गया यों एसेो ने अपने जन्म पट की निंटा किई।
२६ छब्बीसवां पत्बे ॥
ञ्ैः उस ट्श में पह्चिले अकाल के! छाड़ जे अविरहाम के दिनों में पड़ा था फिर अकाल पड़ा तब इज॒हाक अबिमलिक पास जे फिलस्तियें का राजा था जिरार के! गया॥ २। और परमेयग्पर ने उस पर प्रगट होके कहा मिस का मत उतरजा जहां में तमे कह्ू उस टेश में निवास कर॥ ३। त् इस देश में टिक और में तेरे साथ हेऊंगा और तस्समे आशीष टऊंगा क्योंकि में ते ओर तेरे बंश के। इन सारे देशों के देऊंगा और में उस किरिया के जो में ने तेरे पिता अबिरहाम से खाई है परी करूगा॥ ४। ओर में तेरे बंश के। आकाश के तारों की नाई बढ़ाऊंगा और थे समस्त देश तेरे बंश के देऊंगा और एथिवी के सारे जातिगण तेरे बंश से आशीष पावेंगे॥ ५। इस लिये कि अबविरहाम ने मेरे शब्द के! माना और मेरी आज्ञाओं और मेरी बाते और मेरी विधिन और मेरो ब्यवस्था के पालन किया॥ ६। से| इजहाक जिरार में रहा॥ ७। और वहां के बासियों ने उससे उस की पत्नी के विषय में पूछा तब वच् बोला कि
२६ पब्बे] की पस्तक । 8८
वह मेरी बहिन हो क्योंकि वह उसे अपनी पत्नी कहते हुए डरा न हे कि वहां के लेग रिबकः के लिये उसे मार डालें क्यांकि वह दखने में संदटरी थी॥ ८। और यों हुआ कि जब व॒चह वहां बहुत दिन लॉ रहा तो फिलस्तियां के राजा अबिमलिक ने कराखे से दृष्टि किई और देखा ते क्या देखता कै कि इजहाक अपनी पत्नी रिबकः से कलेल करता कहैे॥ <। तब अविमलिक ने इजहाक के बुलाके कहा हेख बुच्द निश्चय तेरी पल्ञी है फिर तू ने क्यांकर कहा कि वुच्ट मेरी बहिन के इजुहाक ने कहा इस लिये में ने कहा न हे। कि में उस के लिये मारा जाऊं। ५०। और अविमलिक बोला यह क्या है जो तू ने हम से किया है यदि लागे में से काई तरी पत्नी के साथ अकस्भ करता तब तू यह दोष हम पर लाता ॥ १५९५। तब अविमलिक ने अपने सब लागा के यह आज्ञा किई कि जो काई इस परुष के! अथवा उस की पत्नी का छयेगा निशड्यथ घात किया जायगा॥ ९१५२। तब इज॒हाक ने उस देश में खेती किई और उस बरस से गना प्राप्त किय. और परमेग्वर ने उसे आशोष दिया॥ १३। और वह मनव्य बढ़ गया ओर उस की बढ़ती हेतती चली जाती थी यहां ला कि वह अत्यंत बड़ा घनी हे। गया ॥ ९४। क्योंकि वह मंड और ढेर और बहुत से सेवकों का खानी हुआ और फिलिस्तियों ने उस्शे डाह किया॥ १५५४। और सारे कएं जो उस के पिता के सेवकों ने उस के पिता अविरहाम के समय में खाद थे फिलिस्तियों ने ढांप दिये और उन्हें मही से भर दिथि॥ २१६। से अबि- मलिक ने इजहाक से कहा कि हमारे पास से जा क्योंकि त हम से भी सामर्थों हे॥ १५७। ओर इजहाक वहां से गया और अपना तंब जिरार कौ तराई में खड़ा किया और वहीं रहा॥ ९८। और इज॒हाक ने उन जल के कओं का जो उन््हों ने उत्त के पिता अबिरहाम के दिनों में खादेथ फिर खाद क्योंकि फिलिस्तियों ने अविरहाम के मरने के पीछे उन्हें ढांप दिया था ओर उस ने उन के वही नाम रकखे जेए उस के पिता ने रक्खे थे ॥ ९९ ।और इजहाक के सेवकों ने तराई में खादा और वहां एक कुआं जिस में जल का सेता था पाया।॥ २०। ओर जिरार के अच्दौरों ने इजहाक के अक्दी रों से यह कहके मगड़ा किया कि यह जल हमारा हे ओर उन के 7 (&.78/8,]
५० उत्पत्ति [२६ पब्ब
मूगड़ा करन के लिये उस ने उस कएं का नाम सकगड़ रकता॥ २९।. ओर उन्हों ने दूसरा कआं खादा और उस के लिये भी स्कगडा और उस ने उसका नाम विराोघ रक्खा ॥ २२। और वह वहां से आगे चला और द्ृसरा कआं खादा उन््हां ने डस के लिये मगड़ा न किया और उस ने उस का नाम ठिकाना रक््खा ओर उस ने कहा कि अब परमेश्र ने हमार लिय ठिकाना किया ह ओर हम इस भमि में फलवंत होंगे ॥ २३। ओर वह वहां से बीअरसबअ के गबा॥ २४। ओर परमेग्यर ने उसो रात उसे टशन टके कहा कि में तरे पिता अबिरहाम का इंश्र कल मत डर क्योंकि में तरे संग कु ओर तक आशीष दृऊंगा और अपने टास अबविरहाम के लिये तेरा बंश बढ़ाऊंगा ॥ २४ । ओर उस ने वहां एक बेदी बनाई और परमेश्वर का नाम लिया ओआर वहां अपना तंबू खड़ा किया ओर इजहाक के सेवकों ने वहां एक बाज खाटा ॥ २६ । तब जिशार से अधिमॉलिक जोर एक्जलोकि मित्रां में से अखजत ओर उस के सेनापति फीकुज्न उस पास गये ॥ २७। और इजहाक ने उन्हें कहा कि तम किस लिये मस्तक पास आय हो यद्यपि तम मस्क से बैर रखते हे। और तम ने मम अपने पास से निकाल दियाह॥ र८। आर वे बाल कि देखते हुए हम ने ट्खा कि परमेगख्र निःसन्द ह तर संग हे सो हम ने कहा कि हम और १ आपस में किरिया खात्र और तेरे साथ बाचा बांघ ॥ २६८ । जैसा हम ने तस्के नहीं छआ और तम्क से भलाई छोड़ कुछ नत्तों किया और तम्ते कुशल से भेजा त भी हमें न सता त अब परमेश्वर का आशीषित हे 8 ३०। और उस ने उन के लिये जंवनार वनाया और उन्हें ने खाया पीया॥ ३५। और बिह्ान का तड़के उठ और आपस में किरिया खाई ओर इजहाक ने उन्हें बिटा किया और वे उस पास से कुशल से गये॥ ३२। और उसी दिन ये हुआ कि इज॒हाक के सेवक आये और अपने खाद हुए कूएं के बिषय में कहा ओर बाले कि हम ने जल पाया॥ ३३। से उस ने उस का नाम सबअ रकदा इस लिय बह नगर आज लो बोअरसबञ कह- लाता है ॥ ३४। और एसा जब चालीस बरस का हुआ तब उसने हटीवीअरी की बेटी यहूदियत के ओर हत्ती ऐलन की बेटी बशामत
२७ पब्ब ] को पुस्तक । ४६९.
के पत्नी किया॥ ३५ । जा इजहाक और रिबकः के लिये मन के कड़वा हट का कारण हुई
२७ सत्ताइंसवां पब्बे ।
डो' थां हुआ कि जब इजहाक बढ़ा हुआ ओर उस की आंखें घन्धला गई एसा कि वक्त ट्खन सत्ताथा ता उस ने अपने जंट बेटे एसो के बलाया और कहा कि हे मेरे बेटे वह बाला देखा यहों हूं ॥ २। तब उस ने कहा कि देख में बढ़ा हूं ओर में अपने मरने का दिन नहीं जानता॥ ३। से अब त् अपना हथियार और तरकस और अपना धनण ले और बन का जा और मेरे लिये म्टग मांस अहेर कर ॥ ४त -ओर मेरी रुचि के समान खादित भेजन -पका के मेरे पास
जिसतें खाऊं ओर अपने मरने के आगे मन से तुर्के आशीष देऊं॥ ४ । ओर जब इजुहाक अपने बेट एसे से बातें करता था तब रिवक्ः ने सना ओर जब ण्से स्टग मांस अहेरने बन के! गया॥ ६। तब रिवकः ने अपने बेटे यअकब से कहा कि ट्ख में ने तेरे भाई एसा से तरे पिता के। यह कहते सना॥ ७। कि मेरे लिये म्टग मांस मार ला और मेरे लिये खाहित भेाजन पका जिसतें खाऊं और अपने मरने से पहिले परमेश्वर के आगे तुस्को आशीष दृजं॥ ८। से अब हे मेरे बेटे मेरो आज्ञा के समान मेरी बात को मान॥ € । अब कुंड में जा ओर वहां से बकरी के दो मेनन मुक्त पास ला और में तेरे पिता की रूचि के समान डस के लिये खादित भाजन बनाऊंगौ॥ २१५०। और त अपने पिता के पास ले जाइये। जिसते वह खाय और अपने मरने से आगे तम्फे आशीष ट्वे। १५१५। तब यअकब ने अपनी माता रिवकः से कहा ट्ख मेरा भाई एसे राआर मनव्य है और में चिकना # ॥ ९२। क्या जाने मेरा पिता मर्के टटोले और में उस पास छली की नाई ठहरू ओर आशीष नहों परन्त अपने ऊपर स्वाप लाऊं॥ १५३। उस की माता ने उसे कहा कि तरा स्वाप मझ्क पर होवे हे मेरे बेटे त केवल मेरी बात मान ग्ार मेरे लिये जाके ला॥। ९४ । से वह गया और अपनो माता पास लाया और उस की माता ने उस के पिता की रूचि के समान
५२ उत्पत्ति [२७ पब्ले
खादित भाजन बनाया ॥ १५५ । ओर रिवकः ने घर में से अपने जेठे बेट एसा का अच्छा पहिरावा लिया और अपने काट बंटे यअकब को पहिनाया॥ २९६। ओर बकरी के मेम्नें का चमड़ा उस के हाथां और उस के गले की चिकनाई पर लपेटा॥ २१९७। और अपना बनाया हुआ खादित भेजन और रोटी अपने बेटे यग्मक॒ब के हाथ दिई ॥
९ ८। और बह अपने पिता के पास जाके बाला हे मेरे पिता और वह बाला में यहां व त कान हे हे मेरे बेटे ॥ १५७। तब यगअकब अपने पिता से बाला कि में आप का पहिलेंठा एसे क्ल आप के कहने के समान मैं ने किया ह उठ बेठिय और मेर स्टग मांस में से कुछ खाइये जिसतें आप का प्राण मक्हे आशीष ट्वे॥ २०। तब इजहाक ने अपने बेटे से कहा कि यह व्योंकर हे जात ने ऐसा बंग पाया हे मेरे बेटे और वह बे।ला इस लिय कि परमेश्वर आप का ईयर मेरे आगे लाया ॥ २९५ । तब इजहाक ने यअकब से कहा कि हे बंटे मेरे पासआ जिसतें में तम्फे टथटालों कि निश्चय त मेरा बेटा एसो हे कि नहों॥ २२। तब यअकब अपने पिता इजहाक पास गया ओर उस ने उसे टाल के कहा कि शब्द ते! यअकूब का शब्द है पर हाथ एसे। के हाथ हें। २३। और उस ने उसे न पह्िचाना इस लिये कि उस के हाथ उस के भाइ एसी के हाथों की नाई रोआर थे से उस ने उसे आशीष ट्या॥ २४। ओर कहा कि त मेरा वह्दी बेटा एसा ही हु वह बाला कि में वच्दी कह्लू॥ २५ ओर उस ने कहा कि त मेरे पास ला कि में अपने बेटे के म्टग मांस से कुछ खाऊं जिसते जी से तुक्क आशीष दऊं से बुह उत् पास लाया और उस ने खाया ओर वुच्द उस के लिये दाख रस लाया और उस ने पीया ॥ २६। फिर उस के पिता इजहाक ने उसे कहा कि बेटे अब पास आ ओर मस्त चम॥ २७। वह पास आया और उसे चमा और उस ने उस के पहिरावा की बास पाई और उसे आशीष दिया ओर कहा कि टेख मेरे बेटे का गंध उस खेत के गंध की नाई हु जिस पर परमेग्यर ने आशीष दिया है॥ श८। और ईआर तुम्मे आकाश कौ ओआस ओर एथिवी की चिकनाई ओर बहुत से अन्न और दाख रस टवे॥ र२<। लेग तेरी सेवा करें और जातिगण तेरे आगे कुके तू अपने भाइयों का
२७ पत्ब] की पस्तक । ५३
प्रभ है और तेरी मा के बेटे तरे आगे मके जे। तसे खापे से! स्ापित और जा तस्के आशीबाद टवे सो आशीषित हावे॥ ३०। ओर यों हआ कि जेउंहों इज॒हाक यअकब के आशीष टे चका ओर यअकब के अपने पिता इज॒हाक के आग से बाहर जाते ही उस का भाई एसो अपनी अरेर से फिरा। ३९। शऔर उस ने भी खादित भोजन बनाया और अपने पिता पास लाया और अपने पिता से कहा मेरे पिता उठटिये और अपने बेटे का स्टग मांस खाइये जिसतें आप का प्राण मसले आशीष हेवे॥। ३९। उस के पिता इजहाक ने उसे पूछा कित् कान हे वुच् बोला कि में आप का बेटा आप का पहिलोंठा एसेो क्ूं॥ ३३। तब इजहाक बड़ी कंपकंपी से कांप और बेला वह तो कौन था ओर कहां है जा म्टग मांस अहेर करके मक्क पास लाया ओर में ने सब में से तेरे आने के आगे खाथा है और उसे आशीष टिया है हां वुह्द आशीषित हागा॥ ३४। एसो अपने पिता की ये बातें सनके बहुत चित्नाया और फट फटके राया और अपने पिता से कहा मझे भी मस्फे हे मेरे पिता आशीष दीजिये ॥ ३४। और वह बाला कि तेरा भाई छल से आया और तेरा आशीष ले गया॥ ३६। तब उस ने कहा क्या वुह यअकूब ठौक नहों कहावता क्योंकि उस ने दोहराके मुस्यमे अड़ंगा मारा उस ने मेरा जन्म पट लेलिया और देखो अब उस ने मेरा आशीष लिया ह्े और उस ने कहा क्या तू ने मेरे लिये कोई आशीष नहीं रख छोड़ा ॥ ३७। तब इजहाक ने एसे के उत्तर देके कहा कि ट्ख में ने उसे तेरा प्रभु किया और उस के सारे भाइयों के! उस की सेवकाई में टिया और अन्न और टाख रस से उस का सहारा किया अब हे मेरे बेटे तेरे लिये में क्या करू॥ ३८। तब एसोा ने अपने पिता से कहा हे पिता क्या आप पास एकद्दी आशीष ह हे मेरे पिता मक्क भी मक्के आशीष दीजिये और एसे। चिल्ला चिल्ला रोया॥ ३८। तब उस के पिता इजहाक ने उत्तर टिया ओर उसे कहा कि देख भमि की चिकनाई और ऊपर से आकाश की ओस में तेरा तंब हैागा॥ ४०। और त अपने खज़ से जीयगा ओर अपने भाई की सेवा करेगा और यों हेगा कि जब त राज्य पावेगा ता उस का जआ अपने कांध पर से ताड़ फेंकेगा ॥ ४९ ।
५४ उत्पत्ति [९८ पन्ब
से। उस आशीष के कारण जिसे उस के पिता ने उसे दियाथा णसे ने यअकब का बेर रक्खा ओर एसे ने अपने मन में कहा कि मेरे पिता के शाक के दिन आते हैं कि में अपने भाई यअकब के मार डालंगा॥ ४०२ | और स्विक्र का उस के जो थे. बटे एसे7 की थे बाते कही गई तब उस ने अपने छटके बेटे बअकब का बला भेजा और कहा कि देख तेरा भाई एसा तम्फे घात करने को तेरे बिषय में अपने का शांति देता हे॥ ४३। सा इस लिये हे भेरे बेटे त अब मेरा कहा मान उठ और मेरे. भाई लावन.पास/हरान, के. भोग जा ॥. ४ ४ । और थाड़े दिन उस के साथ रह जबलों तरे भाई का काप जाता रहे॥ ४५ । जबलों तरे भाई का क्राघ तक से न फिरे आर जो त ने उस्मु किया हे से _ भल जाय तब में तर्क वहां से बला भेजंगी किस लिये एकही टन में तुम दानां का खेऊं ॥ ४६ । तब रिबकः ने इजहाक से कहा कि म हिक्त की बटियां के कारण अपने जीवन से सकेत हू से यदि यअकूब हित्त कौ बेटियों में से जेसी उस देश कौ लड़कियां हें लेवे तो मेरे जीवन से क्या फल हहे॥
२८ अटाइसवा पत्न॑ ।
ञ्ज'ः इजहाक ने यअकब के बलाया ओर उसे आशीष ट्या ओर उसे कहा कि तू कनआजी लड़कियों में से पत्नो न लेना ॥ २। उठ और फद्टानअराम में अपने नाना बतूएल के घर जा ओर वहां से अपने माम् लॉवन की लड़कियों में से पत्नी ले॥ ३। ओर सबसामथों इंस्वर तक आशीष ट्वे और तम्के फलमान करे और तस्के बढ़ावे जिसतें त् लागां की संडली हेवे॥ ४। ओर अबिरहाम का आशीष तस्फे और तेरे संग तेरे बंश के ट्वे जिसतें तू अपनी टिका की भूमि में जा इंश्वर ने अबिरहाम का टिई अधिकार में पावे॥ ५। फिर इज॒हाक ने यञकव के बिदा किया ओर वबुह् फद्टानअराम में रूरियानी बतएल के बेटे लाबन पास गया जे। यअकब ओर णएते। की माता रिबकः का भाई था॥ ६ । और एसे ने जब देखा कि इजहाक ने यग्यकव के आशीष दिया ओर उसे फद्दटानअराम से पत्नी लेने का वहां भेजा ओर कि उस ने
२८ पब्ब] कौ पस्तक । ३३
डसे आशीष टहेके कहा कि ते कनआन कौ लड़कियों में से पत्नी न लेना ॥ ७। ओर कि यअकब ने अपने माता पिता की बात मानी और फद्दानअराम का गया ॥ ८। और एसे ने यह भी टेखा कि कनआनी लड़की मेरे पिता की दृष्टि में बुरी हैं॥ €। तब एतो इसमंअएल कने गया ओर अबिरहाम के बेटे इसमअएल की बेटी महलत को जो नबीत की बहिन थी अपनी पत्नियों में लिया ॥ ९ ० । और यअकव वीअरसबअ से निकल के हरान की ओर गया॥ २९१५। और णक स्थान में टिका और रात भर रहा क्योंकि सर्व अस्त हुआ था और उस ने उस स्थान के पत्थरों के! लिया और अपना उसीसा किया ओर वह सोने के लेट गया॥ २९२। ओर वह खप्न में क्या देखता हँ कि एक सोढी एथिवी पर घरी है ओर उस की टांक खभे से लगी थी और क्या देखता है कि ईश्वर के टूत उस पर से चढ़ते डतरते हैं ॥ १५३। ओर क्या देखता है कौ परमेश्वर उस के ऊपर खड़ा है और यो बाला कि में परमेश्वर तेरे पिता अविरहाम ओर इजहाक का ईशर हुं में यह भमि जिस पर त लेटा कहे तसमे ओर तरेबंश का टेऊंगा॥। १५४। और तरे बंश एथिवी की घल की नाई होंगे ओर त पस्च्िम पबे उत्तर दक्षिण का फट निकले गा ओर तक में और तेरे बंश में एथिवी के सारे घराने आशीष पावेंगे॥ ९५ | और दख में तरे साथ हु और सबेच जहां कहीं त जायगा तेरी रखवाली करूंगा और तमोे इस हृश में फिर लाऊंगा ओर जबलें मैं तुझ से अपना कहा हुआ प्रा न कर लेऊं तक न छोड़ंगा॥ ९६। तब यअकव अपनी नोंद से जागा और कहा कि निच्यय परमेश्वर इस स्थान में है और में न जानता था॥ २९७। तब बह डर गया ओर बाला कि यह क्याही भयानक स्थान ह इंशर के मंटिर के छाड़ यह और कुछ नहीं है ओर खगी का फाटक है ॥
९८। और यअकूव विहान के तड़के उठा और उस पत्थर के जिसे उस ने अपना उलीसा किया था खंभा खड़ा किया और उस पर तेल ढाला ॥ ९९ । ओर उस स्थान का नाम वैतएल रक्खा पर उच्चो पहिले उत नगर का नाम लोाज था॥ २०। ओर यअकब ने मनीती मानी और कहा कि यदि ईश्वर मेरे साथ रहे और मेरे जाने के मार में मेरा रखदाल च्हे
५ उल्पत्ति [२८ पच्बे
ञर मके खाने के रोटी और पदितन्ने के कपड़ा टवे॥ २९। एसा कि में अपने पिता के घर कुशल से फिर आऊं तब परमेश्वर मेरा इंश्वर हेगा॥ २२। और यह पत्थर जो में ने खंभा सा खड़ा किया ईश्वर का मंदिर होगा और सब में से जो त मुझ टेगा ट्सवां भाग अवश्य तुमे देंडंगा। &
२८ उन््तौोसवां पब्बे।
त्् ब यअकब ने पांव उठाया ओर परी पत्रों के देश में आया॥ २ । उस ने दृष्टि किई गैर खेत में एक कआं टेखा ओर ले कि क॒एं के लग भेड़ों के तीन मांड बैठे हुए हें क्यांकि वे उसी कएं से मकंडां के पानी पिलाते थे और कएं के मंह पर बड़ा पत्थर धरा था॥ ३। और वहां सारी कुंड एकट्टी हांतो थी और वे उस पत्थर के कूएं के मुंह पर से ढुलका देते थे और भेढ़ें के! पानी पिलाके पत्थर के। उस के मुंह पर फिर रखते थे ॥ ४ । तब यअकब ने उन से कहा कि मेरे भाइयो तम कहां के हे ओर वे बे।ले कि हम हरान के हें ॥ ५। फिर उस ने डन से पक्का कि तम नहूर के बेटे लाबन के जानते है। और वे बोले जानते हें ॥ ६ । और उस ने उन्हें कहा कि वह कुशल से है ओर वे बेलले कि कुशल से हे ओर टेख उस की बेटी राखिल भेड़े। के साथ आती हैे॥ ७। तब वुह बाला देखे। दिन अब भी वहुत है ओर ठोरों के एकट्े करने का समय नहीं तम भेड़ां के! पानी पिलाके चराई पर ले जाओ॥ एछ। वे बाले हम नहीं सक्ते जब लें किसारे कांड एकट्टे न हावें और पत्थर के कुएं के मुंह पर से न हुलकां तब हम भेड़ों के। पानी पिलाते हैं॥ €। बुच्द उन से यह कहि रहा था कि राखिल अपने पिता की भेड़ों के लेके आईं ॥ ९१०। क्यांकि वह उन की रखवालनी थी और यां हुआ कि यअकब अपने माम लाबन की बंटी राखिल के! और अपने माम लाबन की भेड़ों के! टेखके पास गया ओर पत्थर के! कएं के मह पर से ठल- काया और अपने माम लाबन की भेड़ों के पानी पिलाया ॥ २९९ और यअकूब ने राखिल के। चूमा ओर चिल्ला के रेया ॥ १५२ ॥ और यअकूब ने राखिल से कहा कि मैं तेरे पिता का कुटख और रिवकः
२८ पब्बे] की पस्तक । ५७
का बेटा हू उस ने दौड़के अपने पिता से कहा ॥ ९३ | और यों हुआ कि लाबन अपने भांजे यअकब का समाचार सनके उस्मु मिलने के! हैड़ा और उसे गले लगाया ओर उसे अपने घर लाया और उस ने थे सारी बातें लाबन से कहीं ॥ १४ । तब लाबन ने उसे कहा कि निश्चय त मेरी हड्डी और मांस है और वह एक मास भर उस के यहां रहा ॥ १५५४ । तब लाबन ने यअकृब से कहा कि मेरा भाई होने के कारण क्या त संत से मेरी सेवा करेगा से। कह में तुर्के क्या टेऊं॥ ९६ । और लाबन की दे बेटियां थीं जेठी का नाम लियाह और लहुरी का नाम राखिल था ॥ ९७। ओर लियाह की आंखें चन्धली थों परन्त राखिल सन््द री और रूपवरती थी ॥ २९८। और यञअकब राखिल के प्यार करता था ओर उस ने कहा कि तेरी लहुरी बेटी राखिल के लिये में सात बरस तेरी सेवा करूगा ॥ १५८ । तब लाबन बोला कि उसे ट्ूस रे के देने से तकी का देना भला हे से त मेरे साथ रह॥ २०। और यञअकब ने सात बरस लॉ राखिल के लिय सेवा किई और उस प्रौति के मार जो वह उस्सम रखता था थाड़ दिन की नाई समभ्क पड़े ॥ २९॥ और यअकब ने लाबन से कहा कि मेरे ट्नि परे हुए मेरी पत्नी म॒स््छे दौजिय जिसतें में उसे ग्रहण करू॥ २२। तब लाबन ने वहां के सार मनव्यों का एकड़ करके जेवनार किया॥। २३। और सांम्क का यों हुआ कि वह अपनी बेटो लियाह के! उस पास लाया और उस ने उसे ग्रहण किया॥ २४। ओर टासी के लिये लाबन ने अपनी टासो जीलफः के अपनी बेटी लीयाह के दिया॥ २५। और ऐसा हुआ कि बिहान के। क्या देखता हे कि लियाह है तब उस ने लाबन के! कहा कि आप ने यह मम्क से क्या किया क्या में ने आप की सेवा राखिल के लिये नहीं किई फिर आप ने किस लिये मे छला॥ २६। तब लाबन ने कहा कि हमारे टेश का यह ब्यवहार नहीं कि लहुरी के जेठी से पहिले ब्याह टेव॥ २७। उस का अठवारा परा कर ओर तेरी और भी सात बरस की सेवा के लिये हम इसे भी तमके टंगे॥ २८। ओर यअकब ने एऐसाही किया ओर उस का अटठवारा परा किया तब उस ने अपनी बेटी राखिल के भी उसे पत्नी में टिया ॥ २८। और लाबन ने अपनी दासी बिलहः हि [0 0, 0]
प्र उत्पत्ति [ ह्० पब्बे
के। अपनी बेटी राखिल को दासी हाने के लिये दिया॥ ३०। तब यञअकब ने राखील के भी ग्रहण किया और वह राखिल के लियाह से अधिक प्यार करता था और सात बरस अधिक उसने उस की सेवा किई ॥ ३९। और जब परमेग्वर ने टेखा कि लियाह घिनित हुई उस ने उस की केाख खेली और राखिल बांक रही ॥ ३२ | और लियाह गर्भिणी हुई और बेटा जनी और उस ने उस का नाम रूबिन रक्घा क्योंकि उस ने कहा कि नि्यय परमेश्वर ने मेरे दुःख पर दृष्टि किई है कि अब मेरा पति मुस्झे पार करेगा ॥ ३३। ओर वुह फिर गर्भिणी हुई ओर बेटा जनी ओर बोली इस लिये कि परमेम्बर ने मेरा घिनित हेशना सनके मस्के इसे भी दिया से उस ने उस का नाम समऊून रकद्वा॥ ३४। और फिर वह गर्भिणी हुई ओर बेटा जनी और बोली कि इूस बार मेरा पति मम्क से मिल जायगा क्योंकि में उस के लिये तौन बेटे जनी इस लिये उस का नाम लावी रकदा गया॥ ३५ । और वह फिर गर्शेणी हुई और बेटा जनी और बाली कि अब में परमेश्वर की स्त॒ति करूंगी इस लिये उस ने उस का नाम यहूदाह रक््खा और जतन्नेसे रह गई ॥
३० तौसवां पब्बे ।
ञः जब राखिल ने ट्ेखा कि यअकब का बंश मरू से नहों हे।ता ते। उस ने अपनी बहिन से डाह किया औप यअकब के कहा कि मस्फे बालक दे नहों ता में मर जाऊंगी॥ २। तब राखिल पर यञअकब का क्राघ भड़का ओर उस ने कहा क्या में इंश्वर की संती हुँ जिस ने तस्मे केख के फल से अलग रक्खा ॥ ३। ओर व॒चद्द बाली कि मेरी टासी बिलहः के टेख और उसे ग्रहण कर और वह मेरे घटनों पर जनेगी जिसतें में भी उससे बन जाऊं ॥ ४। ओर उस ने उसे अपनी टासी बिलहः के पत्नी के लिये दिया और यअकब ने उसे ग्रहण किया ॥ ५। गैर बिलहः गमिणी हुई ओर यअकब के लिये बेटा जनी ॥ ६। तब राखिल बाली कि ई स्वर ने मेरा बिचार किया और मेरा शब्द भी सुना और मुस्के एक बेटा दिया इस लिये उस ने
३० पब्ब] कौ पस्तक । धू<
उस का नाम दान रक्खा॥ ७। ओर राखिल कौ ट्रसी बिलह्त: फिर गर्भिणी हुई ओर यचकूब के लिये दूसरा बेटा जनी ॥ ८। और राखोल बाली कि में ने अपनी बहिन से ईस्थरीय मज्न युद्ध किया और जौता गैर उस ने उस का नाम नफताली रक़्वा॥ «। और जब लियाह ने टेखा कि में जन्ने से रह गई ता उस ने अपनो दासी जिलफः का लेके यञझकब के पत्नौ के लिये दिया॥ १५०। से लियाह की दासी जिलफ:ः भी यअकब के लिये एक बेटा जनी ॥ २१५९॥। तब लियाह बोली कि जथा आती है और उस ने उस का नाम जद रक्वा ॥ १२। फिर लियाह कौ दासी जिलफः यअुकब के लिय एक टूसरा बेटा जनो॥ ९३ । और लियाह बोली कि में आनंदित हूँ पत्रियां मस्फे घन्य कहें- गी और उस ने उस का नाम यशर रक््खा॥ ९१५४। ओर गेहूं के लवने के समय में रूबिन घर से निकला और खेत में दृद्मफणल पाया और उन्हें अपनी माता लियाह के पास लाया तब राखिल ने लियाहइ से कहा कि अपने बेटे का दृदाफल मर ट्॥ १५४। उस ने कहा क्या यह छोटी बात है जो त ने मेरे पति के! ले लिया और मेरे पत्र के टृटाफल का भी लिया चाहती हे. राखिल बाली कि वह आज रात तेरे बेटे के दृदाफल की संती तेरे साथ रहेगा॥ १६। और जब यअकूब सांस्क्र का खेत में से आया लियाह उसे आगे से मिलने के गई और कहा कि आज आप को मुम्क पास आना होगा च्योंकि निे्य में ने अपने बेटे का ट्ृद्ाफल देके आप के भाड़े में लिया हे से बुह्द उस रात उस के साथ रहा॥ ९७। और ईउ्वर ने लियाह कौ सुनी ओर बह गर्भिणी हुई और यअकब के लिये पांचवां बेटा जनी ॥ १८। ओर लियाह बाली कि ईसर ने मेरी बनी मम्फे दिई क्योंकि में ने अपने पति के! अपनी टासी दिई कह्ै और उस ने उस का नाम इशकार रक्वा॥ १८। ओर लियाह फिर गर्भिणी हुई और यञ्कब के लिये छटवां बंटा जनी॥ २०। ओर बाली कि ईअर ने मे अच्छा देजा दिया क्षे अब मरा पति मेरे संग रहेगा क्योंकि में उस के लिये छः बेटे जनी और उस ने उस का नाम जबलून रक्वा॥ २९। ओर अंत में बचद्द बेटी जनी ओर उस का नाम टौनाह रक्खा॥ २२। ओर ईश्वर ने
हू ० उत्पत्ति [३० पब्बे
राखिल को सारण किया और उस की सुनके उस की केख के। खेला । २३ । वह गर्भिणी हुई और बेटा जनी ओर बोली कि ईय्थर ने मेरी निन््दा टूर किईं ॥ २४। ओर उस ने उस का नाम यसफ् रक्वा और बाली कि परमेग्रर मस््पे ट्रंसरा बेटा भी टेवेगा ॥ २५। और जब राखिल से यसफ उत्पन्न हुआ तो यों हुआ कि यअकब ने लाबन से कक्ा कि मरे मेरे स्थानओर मेरे दश के। विद्या कीजिये ॥ २६। मेरी स्त्रियां और मेरे लड़के जिन के लिये में नेआप की सेवा किई हे मुम्ते टीजिय ओर बिदा करिये क्योंकि आप जानते हैं कि मैं ने आप की कैसी सेवा किई हे॥ २७। लाबन ने उसे कह्दा कि जो में ने तेरी दृष्टि में अन ग्रह पाया हे ता रह जा क्योंकि में ने ट्ेख लिया है कि पर मे- ख्यर ने तेरे कारण से मे आशीष टिया क्ै॥ २८। ओर उस ने कहा कि अब त अपनी बनी मस्क से टहरा ले में तमे ट्ऊंगा॥ २९ । उस ने उसे कहा आप जानते हें कि म॑ ने क्योंकर आप की सेवा किई कै और आप के टार कैसे मेरे साथ थे॥ ३०। क्यांकि मेरे आने से आग वे थाड़ थे आर अब कुंड के भकुंड हो गये और मेरे आन से परमेग्वर ने आप का आशीष टिया है अब में अपने घर के लिये भी कब टिकाना करूगा॥ ३९। और वह बोला कि में तमक क्या टेऊः और यअक ब ने कहा कि आप मस्क कुछ न टौजिये जो आप मेरे लिय एसा करेंगेता में आप के म्ंड के। फिर चराऊंगा और रखवाली करूंगा॥ ३२। मैं आज आप के सारे कंड में से चल निकलंगा ओर भेड़ों में से सारी फटफरटियाों ओर चितकबरियों और भरियों का और बकरियों में से फटफटियाो और चितकबरियों के अलग करूंगा और मेरी बनी वैसी हागी॥ ३३। और कल को मेरा घधम मेरा उत्तर देगा जब कि मेरी घनी आप के आगे आवे ते वह जा बकरियों में चितकबरी और फटफरटिया और भेड़ में भरी नहे तो वह मेरे पास चारी की गिनी जाय॥ ३४। तब लावन बोला देख में चाहता हू कि जैसातू ने कहा नेसाहीं हावे। ३५।१ ओर उस ने उस टन पट्टेवाले और फटफटिया बकरे और सब चितकबरी और फटफरटिया बकरियां अर्थतत् हर एक जिस में कछ उजलाई थी और भड़ों में से भरी अलग किई
३९ पब्ब] की पस्तक । २
औरर उन्हें अपने बेटों के हाथ सौंप टिया॥ ३६। और छउस ने अपने और यअकब के मध्य में तौन दिन की यात्रा का बीच ठहराया और यञकब लाबन के जबरे हुए भांडां के चराया किया॥ ३७। और यअकब ने हरे लवने लस ओर अरमन की हरी छड़ियां ले ले उन्हें गंडवाल किया ऐसा कि छड़ियां की उजलाई प्रगट हऊुई॥ ह८। ओर जब म्कंड पानी पीम का आती थों तब वह उन छड़ियां का जिन पर गंडे बनाये थे कंंडां के आगे कठरों और नालियों में घरता था कि जब वे सब पीने आवे तो गर्भिणी हावें ॥ ३८ । और छड़ियों के आगे मंड गर्भिणी हुई ओर वे गंडबाले और फटफ्रटियां और चिंतकबरे बच्चे जनों ॥ ४०। और बअकब ने मेम्नां के अरूूग किया और म्ंड के मंह के चितकबरों के ओर भरों के और जा लावन की म्कंड में थे किया और उस ने अपने स्कंड को अलग किया और लाबन के म्कंड में न मिलाया॥ ४२९। और यों हुआ कि जब पष्ट ठार गभिणी हेाती थी ता यअकब छड़ियों का नालियों में उन के आगे रखता था कि वे उन छूड़ियों के आगे गरभिणी हावं॥ ४२। पर जब टुबेल ढार आते थ वुह् उन्हें वहांन रखता था से दुबंल दुबल लावन की ओर मोटी मेटो यअकब की हुई और उस परुष की अत्यंत बढ़ती हुई ग्यार वह बहुत पशण ओर दास और दासिथां और ऊंटां और गटहे का खामी हुआ।
३९ एकतीसवां पच्बे ॥
ञ्रः उस ने लाबन के बेटा का ये बातें कहते सना कि यअकब ने हमारे पिता का सब कुछ ले लिया और हमारे पिता को संपत्ति से यह सब बिभव प्राप्त किया॥ २। ओर यअकूब ने लाबन का रूप ट्खा आर क्या ट्खता क्ञषे कि कल परसें की नाई वह मेरी ओर नहीं कहैे॥ ३। झऔर परमेग्वर ने यअकब से कहा कि त् अपने पितरों ओर अपने कुटम्वां के देश का फिर जा और में तरे संग जाऊंगा ॥ ४। तब यअकब ने राखिल ओर लियाह के अपनी म्कंड पास खेत में बला भेजा॥ ५। ओर उन्हें कहा किमें ट्खता हूँ कि
हर जन्पत्त [३९ पन्ने तुम्हारे पिता का रूप आगे की नाई मेरी ओर नहीं ह्ले परन्त मेरे पिता का इंसश्वर मस्क पर प्रगट हुआ॥ ६। और तम जानती हे कि मे ने अपने सारे बल से तम्हारे पिता की सेवा किई हे ॥ ७। और तम्हारे पिता ने मस्से छला क्षे और ट्स बार मेरी बनी बटल टिई पर ईय्यर ने मस्क दुख दने का उसे न छाडा॥ ८। यदि वुह्द यों बोला कि फटफरियां तेरी बनी होंगी तो सारे ठोर फटफयां जने और यदि उस ने यां कहा कि पद़्रेवाली तेरी बनी में हांगी तो ढोर पट्ढंवाले जने॥ <। यों ईम्पर ने तम्हारे पिता के छोर लिये और मुस्के दिये ॥ ९ ०। और ये हुआ कि जब ढटार गभिणी हुए ता में ने खन्न में अपनी आंख उठाके रेखा और क्या टेखता हूँ कि मेढ़े जो ढार पर चढ़ते हें से पद्वेवाले और फटफरटिये और चितकबरे थे। ५९५। और ईय्वर के ट्रत ने खन्न में मुभ्त्त कहा कि हे यअकब में बोला कि यहों छूं॥ ९२।
ब उस ने कहा कि अब अपनी आंखे उठा और देख कि सारे मेंढ जा भेड़ों पर चढ़ते हैं पद्वेवाले और फुटफुटिये और चितकबरे हैं क्यां कि जे कुछ लाबन ने तु से किया मैं ने देखा है॥ ९३। बेतएल का ईश्वर जहां त् ने खंभे पर तेल डाला और जहां तू ने भेरे लिये मनाती मानी मैं हूं अब उठ इस देश से निकल जा और अपने कुटु म्ब के देश के फिर जा॥ १४। तब राखिल और लियाह ने उत्तर टेके उसे कहा क्या अब लो हमारे पिता के घर में हमारा कुछ भाग अथवा अधिकार हे ॥ ९५ । क्या हम उस के लेखे पराये नहीं गिने जाते हैं क्योंकि उस ने तो हमें बेच डाला हे ओर हमारी रोकड़ भी खा बेटा ह्े। १९६। परन्त ईस्थर ने जे घन कि हमारे पिता से लिया और हमें ट्या वही हमारा और हमारे बालकों का के से अब जो कुछ कि ईम्वर ने आप से कहा है से! करिये॥ १९७। तब यअकब ने उठके अपने बेटों ओर पत्नियों के ऊंटां पर बठाया॥ ९८। और अपने सब चेपाए और सामग्री जे उस ने पाई थी अपनी कमाई के चेपाए जो उस ने फद्दानअराम में पाए थे ले निकला जिसतें कनआन देश में अपने पिता इजहाक पास जावे॥ ९९। और जाबन अपने भेड़ां का रोम कतरने के गया ओर राखिल मे अपने पिता कौ कई एक मुक्ति चरा लिई॥ २०। और
९ पत्बे] कौ पस्तक । ३
यञकब अरामी लाबन से अचानक चराके भागा यहां लां कि वह उद्मे न कहिके भागा॥ २२ । से वह अपना सब कुछ लेके भागा और उठके नदी पार उतर गया और अपना मंह जिलिअद पहाड़ की ओर किया ॥ २। ओर यद्यकब के भागने का संटेश लाबन के तौसरे दिन पहुंचा ॥ २३। सो बुच्त अपने भाइयों के लेके सात दिन के मा लॉ उस के पीछ गया और जिलिअट पहाड़ पर उसे जा लिया॥ २४। परन्त ईयस्पर अरामी लाबन कने खप्न में रात को आया और उसे कहा कि चेकस रह ते यअकब के भला बरा मत कहना॥ २५४ । तब लाबन ने यअकब के! जा लिया और यअकब ने अपना डेरा पहाड़ पर किया था और लाबन ने अपने भाइयों के साथ जिलिअद पहाड़ पर डरा खड़ा किया॥ २६। तब लाबन ने यअकूब से कहा कि तू ने क्या किया जा तू एका एक मूक से चरा निकला और मेरी पत्रियों को खड़' में की बंधआई कौ नाई ले चला ॥ २७। तू किस लिये चुपके से भागा ओर चोरी से मस्क से निकल आया और मस््फते नहों कहा जिसतें में तमे आनंद मंगल से भेरी और ठेाल के साथ बिदा करता ॥ २८। और तू ने म॒स्के अपने बेटों ओर अपनी बेटियों के चमने न दिया अब त ने मृखता से यह किया है ॥ २८। तम्े दःख टने को मेरे बश में हे परन्त तेरे पिता के ईम्मर ने कल रात मस्से यों कहा कि चोकस रह त् यअकब का भला ब्रा मत कहना ॥ ३०। और अब तुस्के तो जाना हे क्योंकि तू अपने पिता के घर का निपट अभिलाणी है पर त न किस लिय मेरे द्वों के चराया क्षे । ३९५। और बअकब ने उत्तर दिया और लाबन से कहा कि डरके में ने कहा क्या जाने आप अपनी पत्रियां बरबस मम्कसे छीन लेंगे ॥ ३२५ । जिस किसी के पास आप अपने दवे के! पावें डसे जौता मत छाड़िये और हमारे भाइयों के आगे ट्ख लीजिये कि आप का मेरे पास क्या क्या हे और अपना लीजिये क्यांकि यअकब न जानता था कि राखिल ने उन्हें चुराया था॥ ३३। और लाबन यअकब के तंब में गया ओर लियाह के तंब में और दोने टासियों के तंब में परन्त न पाया तब वुच्द लियाह के तंब से बाहर जाके राखिल के तंब में गया ॥ ३४। ओर राखिल मूर्त्तिन को लेकर जंट की सामग्री में रखके उन
हू ४ उत्पत्ति [३९ पब्ये
पर बेठो थी और लाबन ने सारे तंब का टेख लिया और न पाया ॥ ३४ । तब उसने अपने पिता से कहा कि मेरे प्रभ इस्सू उदास न होवं कि में आप के आगे उठ नहों सत्ती क्यांकि मस्त पर स्त्रियां की रीति है से उस ने दृढ़ा पर मृत्तिन के न पाया॥ ३६। ओर यअकब क्र हुआ और लाबवन से विवाद करके उत्तर दिया और लाबन का कहा कि मेरा क्या पाप ओर क्या अपराध है कि आप इस रौति से मेरे पीछे म्पट ॥ ३७। आप ने जो मेरो सारी सामग्री दंढी आप ने अपने घर की सामग्री से क्या पाई मेरे भाइयों और अपने भाइयों के आगे रखिये जिसते वे हम ट्रटानों के मध्य में बिचार करें॥ ३८८। यह बीस बरस जा में आप के साथ था आप की भंड़ां और बकरियों का गभे न गिरा और में ने आप की मुंड के मेंढे नहों खाय॥ ह९। बुच्द जा फाड़ा गया में आप पास न लाया उस की घटी में ने उठाई वह जो दिन का अथवा रात का चारो गया आप ने मस्त से लिया ॥ ४ ० । मेरी यह दशा थी कि दिन के घाम से भस्म हुआ और रात के पाला से और मेरी आंखों से मेरी नौंट जाती रही ॥ ४९ । या मुस्ते आप के घर में बीस बरस बीते में ने चोट्ह बरस आप कौ दाना बेटियों के लिये ओर छःबरस आप के पशु के लिये आप की सेवा किई और आप ने दस बार मेरी बनी बदल डाली ॥ ३२। यदि मेरे पिता का ईश्वर और अबविरहाम का ईग्वर और इजहाक का भय मेरे साथ न हे।ता ते। आप निश्चय मुझ अब छुंछ हाथ निकाल देते ईम्थर ने मेरी बिपत्ति और मेरे हाथों के परिश्रम के देखा क्षे और कल रात आप के डांटा॥ ४३। लाबन ने उत्तर टिया और यअकब से कहा कि थे बेटियां मेरी बेटियां ओर ये बालक मेरे बालक ओर थे चैपाए मेरे चैपाए और सब जो त ट्ेखता हे मेरे हैं ओर आज के टन अपनी इन बेटियों अथवा इन के लड़कों से जो वे जनी हैं क्या कर सक्ता हूं । ४४। से अब आ में ओर तू आपुस में एक बाचा बांध और वही मेरे ओर तेरे मध्य में खाक रहे॥ ४५ । तब यअकब ने एक पत्थर लेके खंभा सा खड़ा किया॥ ४६ । और बञअ॒कूब ने अपने भाइयों से कहा कि पत्थर एकट्टा करे उन्हें ने पत्थर एकट्ठा करके एक ठेर किया ओर उन््हों ने उसी ढेर पर खाया ॥
३२ पत्ब] की पस्तक । ह्ष्धू
४७। और लाबन ने उस का नाम साच्वी का ढेर रक््खा परन्त यअकब ने उस का नाम ज्ञिलिअट रक्वा॥ ४८। और लाशबन बाला कि यह ढेर आज के टिन मस्त में और तम् में साक्षी के इस लिये उस का नाम ज्ञिलिग॒टद् ॥ ४८। और चैकस का गुस्मट हुआ क्योंकि उस ने कहा कि जब हम आपस से अलग होयें तो परमेश्वर मेरे तेरे मध्य में चेकसी करे॥ ५० । जा त् मेरो बेटियों का दुख टेवे अथवा उन से अधिक स्त्रियां करे देख हमारे साथ कोई टूसरा नहीं इंश्वर मेरे और तेरे मध्य - में साक्षी त्चे। ५९। ओर लावन ने यअकब से कहा ट्ख यह ढेर और खंभा जो में ने अपने ओर आपके मध्य में रझवा क्षे 8 ५२। यही ढेर और खंभा साक्ष्ती क्षे कि में इस ढेर से पार तऊे और त इस ढेर और इस खंभ से पार मर्के दख टेने का न आवेगा॥ ५३। अबविरहाम का ईश्वर ग्लार नहर का ईस्वर और उन के पिता का ईयर हमारे मध्य में विचार करे और यअकव ने अपने पिता इज॒हाक के भय की किरिया खाई ॥ ४४। तब यअकब ने उस पहाड़ पर बलि चढ़ाया और अपने भाईयों के रोटी खान के। बलाया और उनन््हों ने रोटी खाई और सारो रात पहाड़ पर रहे॥ ५४। ओर भार के तड़के लाबन उठा और अपने बेटों और बेटियों के चूमा और उन्हें आशीष ट्यि ओर लाबन बिदा हुआ और अपने स्थान के फिरा ॥
३२ बत्तीसवां पब्मे ।
८ हु यञअकब अपने मार्ग चला गया और ई ग्बर के ट्ूूत उसे आ मिले ॥ २। ओर यअकब ने उन्हें टेख के कहा कि यह ईयर की सेना हे और उस ने उस स्थान का नाम ट सेना रक्वा॥ ३। और यअकब ने अपने आगे अट्टम के देश ओर शऔर की भूमि में अपने भाई एसे पास हुतों को भेजा॥ ४। और उस ने यह कहिके उन्हें आज्ञा किई कि मेरे प्रभ एसो का यां कहिया कि आप का दास यअक ब यों कह ता हे कि में लाबन कने टिका और अब लो वहीं रहा॥ ५ । और मेरे बैल और गदरहे और कुंड ओर दास और दासियां हैं और मैं ने अपने प्रभु के कहला भेजा क्षे जिसते में आप कौ दृष्टि में अनग्रह पाऊं॥ ६। और दूतों ने 9 3 8, है
न उत्पत्ति [३२ पब्बे
यञअकब पास फिर आके कहा कि हम आप के भाई एसे। पास गये और वह ओर उस के साथ चार से! मनव्य आप की भंट के भी आते हैं ॥ ७। तब यअकब निपट डर गया और ब्याकुल हुआ और उस ने अपन साथ के लागों ओर मंंडों और टठोरों और ऊंटों के टो। जथा किये ॥ ८। और कहा कि यदि णसे एक जथा पर आवे औरर उसे मारे ता हूसरा जथा जो बच रहा है भागेगा ॥ €। फिर यअकूब ने कहा कि हे मेरे पिता अबिरहाम के ईम्वर और मेरे पिता इज॒हाक के ईस्प्रर वह परमेग्वर जिस ने मस्के कहा कि अपने देश और अपने कुनबे में फिर जा और में तेरा भला करूंगा॥ २९५०। में तो उन सब दया और उन सब सत्यता से जा त ने अपने दास के संग किई तच्छ हू क्योंकि में अपने डंड से इस यरट्न पार गया ओर अब में दा जथा बना हूं॥ १९। में तरी बिनती करता हूं मस्के मेरे भाई के हाथ अथात एसी के हाथ से बचा ले क्योंकि में उस्स डरता हूं न होवे कि वह आके मर्क और लड़कों का माता समेत मार लेवे॥ १५२। ओर त ने कहा कि में निश्चय तर्क से भलाई करूंगा ओर तेरे बंश के समद्र के बाल की नाई बनाऊंगा जो बहुताई के मारे गिना नहीं जायगा॥ १५३। ओर वह उस रात वहीं टिका और जो उस के हाथ लगा अपने भाई एसी के भेंट के लिये लिया ॥ ९४। ट! से! बकरियां ओर बीस बकरे दो ते भेड़ें और बीस मेंढे॥ ९५ | और तौस ट्धवाली ऊंटिनियां उन के बच्चे समेत चालौस गाय और दस बैल बीस गदहियां और दस बच्चे॥ १५६। ओर उस ने उन्हें अपने सेवकों के हाथ हर जथा के। अलग अलग सौंपा ओर अपने सेवकों के कहा कि मेरे आगे पार उतरो और जथा के। जथा से अलग रक््खे॥ ९७। और पहिले के उस मे कहा कि जब मेरा भाई एसो तुम्फे मिले और पछे कि तू किस का है और किधर जाता है और ये जो तेरे आगे हैं किस के हैं॥ ९८। ते कहिये। कि आप के सेवक यअकूब के हें यह अपने प्रभ एसे के लिये भट के ओर देखिये वह आप भी हमार पीछे हे॥ ९८। और वैसा उस ने टूसरे और तीसरे के ओर उन सब के जो जथा के पीछ जाते थे यह कहिके आज्ञा किई कि जब तम एसा का पाओए तो इस रोौति से कहियो ॥ २०। और अधिक यह कहिया कि
३३ पन्बे] की पुस्तक । ६७
ह्ेखिथे आप का सेवक यअकब हमारे पीछ आता हे क्यांकि उस ने कहा है कि में उस भेट से जो। मस्त से आग जाती क्ञे उससे मिलाप कर लेऊंगा तब उस का मंच ट्खंगा क्या जाने वह मम्फे ग्रहण करे॥ २९१। से वह भेंट उस के आगे आगे पार गई और वह आप उस रात जथा में टिका ॥ २२। ओर उसी रात उठा और अपनी टो पत्नियों और दो सहेलियों और ग्यारह बट के! लेके थाह यबक से पार उतरा॥ २३। ओर उस ने उन्हें लेके नाली पार करवाया और अपना सब कुछ पार भेजा ॥ २४। और यअकब अकेला रह गया और वहां पे फट ले एक जन उत्े मल्न यद् करता रहा॥ २४। ओर जब उस ने टेखा कि वह उस पर प्रवल न हुआ तो उस की जांघ के भौतर से छुआ तब यञकूब के जांघ की नस उस के संग मत्न यड्र करने में चढ़ गई ॥ २६। तब वह बाला कि मस्क जाने र क्योंकि पा फटती हू वह बाला कि म ते जाने न रेऊंगा जब ला त म्मे आशोष न ट्वे।॥ २७। तब उस ने डसे कहा कि तेरा नाम क्या वह बेला कि यअकब॥ २८। तब उस ने कहा कि तेरा नाम आगे के यअकब न होगा परन्त इसराणएल क्योंकि तू ने ईस्थर के और मनव्य के आगे राजा की नाई मज्ञ यड्थ किया और जीता॥ २७८ । तव यअ॒कब ने यह कहिके उस्झो पका कि अपना नाम बताइये वह वेलला कि तू मेरा नाम क्यों पछता है ओर उस ने उसे वहां आशीष ट्या॥ ३०। और यञकब ने उस स्थान का नाम फनणल रक््वा क्यांकि में ने ईश्वर को प्रत्यक्ष ट्खा और मेरा प्राण बचा हे ।॥ ३९। और जब वह फनणएल से पार चला तो रूय्ये की ज्योति उस पर पड़ी और वह अपनी जांघ से लंगड़ाता था ॥ ३२ । इस लिये इसराणएल के बंश उस जांघ की नस का जो चढ़ गई थी आजलों नहों खाते क्योंकि उस ने यञकव के जांघ की नस का जो चढ़ गई थी छआ था ॥
३३ तेतीसवां पच्वे । 7र यअकब ने आंखें ऊपर उठाई ओर क्या रेखता हे कि एसेा
और उस के साथ चार से मनप्य आते हैं तब उस ने लियाह के और राखिल के ओर दे सहेलियों के लड़के वाले बांट दिये॥ २।
प्र खत्पत्ति [३३ पब्ब
और उस ने सहेलियां ओर उन के लड़का के! सब से आगे रक्वा ओर लियाह और उस के लड़कों के। पीछ और राखिल ओर यस॒फ् के! सब के पीछे ॥ ३। और वह आप उन के आगे पार उतरा और अपने भाई पास पहुंचते पहुंचते सात बार भमि ले टंडवत किई॥ ४। ओऔर ण्से। उसे मित्नने को दैौड़ा और उसे गले लगाया ओर उस के गले से लिपटा ओर उसे चमा ओर वे रोये॥ ५। फिर उस ने आंखे उठाई और स्तियों के और लड़कों के दखा और कहा कि ये तेरे साथ कौन हैं और वह बाला संतान जो ईच्चर ने अपनी कृपा से आप के सेवक का टदियि॥ ६। तब सहेलियां और उन के लड़के पास आय और टंडवत किई॥ ७। फिर लियाह ने भी अपने लड़के समेत पास आके हंडवत किई अंत के यसफ् और राखिल पास आये और दढंडवत किई ॥ ८। ओर उस ने कहा कि इस जथा से जो मस्क के मिली तसे क्या और वच बाला कि अपने प्रभ की दृष्टि में अनग्रह पाऊं ॥ €। तब एस बे।ला कि हे भाई मस्क पास बहुत हें तेरे तर ही लिये हावें॥ १५०। तब यअकब बोला कि में आप की बिनती करता 'ं याद मे ने आप की दृष्टि में अनग्रह पाया हे ता मेरी भेंट मेरे हाथ से ग्रहण कीजिय क्यांकि में ने जे आप का मंच ट्खा है जाना में ने ईश्वर का मंद टेखा ओर आप मण्क से प्रसन्न हुए ॥ १५९ । मेरे आशोष के! जे। आप के आग लाया गया हे ग्रहण कीजिये कि ईम्यर ने मस्त पर अनग्रह किया हे और इस लिये कि मम्क पास सब कुछ क् सो वह यहां लॉ गिडगिड़ाया कि उस ने ले लिया। १५२९। ओर कहा कि आओ कंच करें और चलें और में तेरे आगे आगे चलंगा॥ ९५३॥। तब उस ने उसे कहा कि मेरे प्रभ जानते कं कि बालक केमल हैं और स्ंड ओर ढार ट्र्घ पिलानेवालियां मेरे साथ हें ओर जो वे ट्नि भर हांके जायें ता सारे कंड मर जायंगे ॥ १४। से मेरे प्रभ अपने सेवक से पहिले पार जाइय और में घीरे धीरे जैसा कि ढेर आगे चलेंगे आर बालक सह सकगे चलंगा यहां लां कि शऔर का अपने प्रभ पास आ पहकुचा॥ ५५ । तब से बेला अपने संग के कई एक तेरे साथ छोड़ जाऊं वह बला कि किस लिय में अपने प्रभ को दृष्टि में अनग्रह पाऊं॥ ९६॥
३४ पत्ब] कौ पस्तक । न
तब एसे। उसी दिन शऔर के मार्ग लौट गया॥ ९७। और यअकब चलते चलते सक्कात के आया और अपने लिये एक घर बनाया ओर अपने ठार के लिये पतछप्पर बनाये इसी लिय उस स्थान का नाम सक्कात हुआ ॥ २९८ | और यअकुब फटद्टानअराम से बाहर हे(्के कनआन देश के सालिम के नगर सिकम में आया ओर नगर के बाहर अपना तंब खड़ा किया ॥ ९५८। और जिस पर उस का तंब खड़ा था उस ने उस खेत का हमर के पिता सिकम के सनन््तान से से। टकड़े रोकड़ पर मेल लिया॥ २०। और उस ने वहां एक बेदी बनाई ओर उस का नाम ई ग्वर इसराएल का ईगब्वर रक््खा ।
३४ चौंतीसवां पब्म ।
झ्' लियाह की बंटी दौनः जिसे वह यअक्व के लिये जनी थी
उस देश की लड़कियों के देखने का बाहर गई॥ २। ओर जब उस ट्श के अध्यक्ष हवी हमर के बेटे सिकम ने डसे ट्ेखा तो डसे ले गया ओर उसमे मिल बेठा और उसे तचऋ किया॥ ३। ओर उस का मन यञअकव की बेटी दौनः से अटका ग्यार उस ने उस लड़की के प्यार किया और उस के मन कौ कह्दी ॥ ४। और सिकम ने अपने पिता हमर से कहा कि इस लड़की को मर्के पत्नी में दिलाइये ॥ ५। और यअुकब ने सना कि उस ने मेरी बेटी दौनः के अशडू किया उस समय में उस के बेटे उस के ढार के साथ खेत में थे और उन के आने लां यअकब चप रहा॥ ६। और सिकम का पिता हमर बातचौत करने के यअक॒ब पास आया॥ ७। ओर सनते ही यअकब के बेटे खेत से आ पहुंच और वे उदास हेके बड़े कापित हुए क्योंकि उस ने इसराएल में अपमान किया कि यअकब की बटी के -साथ अनचित
रीति से मिल बैठा॥ ८। और हमर ने उन के साथ यों बातचीत. किई कि मेरे बेटे सिकम का मन तम्हारोीं बेदी से,लालसित हे से उसे +
उस को पत्नी में टीजिये ॥ <। और हमारे साथ समधियाना कीजिये अपनी बेटियां हमें टीजिये ओर हमारी बेटियां आप लीजिये ॥ ९०। और तुम हमारे साथ बाप करेगे और यह भूमि तुस्हारे आगे हेगी
हक ््
9० सत्पत्ति [३४ पब्बे
उस में रहे। और व्यापार करो और इस में अधिकार प्राप्तकरो ॥ २१। और सिकम ने उस के पिता और भाइयों से कहा कि तम्हारी दृष्टि में में अनग्रह पाऊं ओर जा कुछ तम लेग मस्फे कहेगे में टेऊंगा ॥ ५२। जितना देजा और भेंट चाहे में तम्हारे कहने के समान टेऊंगा पर लड़की का मम्ह पत्नी में ट्ओ।॥ ९३। तब यअकब के बंटां ने सिकम ओर उस के पिता हमर का छल से उत्तर टिया क्यांकि उस ने उन की बहिन टौनः के। अशड् किया था॥ १५४। और कहा कि हम यह नहीं कर सक्ते कि एक अखतनः के! अपनी बहिन ट्वें क्यांकि इस्स हमारी निन््दा हेगी॥ १५५। केवल इस में हम तम्हारी बात मानंगे कि तम में हर परुष हमसरीखा खतनः करावे ॥ ९ ६ । तब हम अपनी बेटियां तम्हे टेंगे और तम्हारी बेटियां लगे और हम तम में निवास करेंगे और हम सब एक लोग होंगे॥ १५७। परन्त जो खतनः कराने में तम लाग हमारी न सनोगे ते। हम अपनी लड़की ले लेंगे और चले जायेंगे ॥ ९८। औरर उन की बातें सिकम और उस के पिता हमर को प्रसन्न हुई ॥ १८। और उस तरुण ने उस बात में अबेर न किया क्योंकि वह यअकब की बेटी से प्रसन्न था ओर वह अपने पिता के सारे घराने से अधिक कुलीन था॥ २०। ओर हमर और उसका बेटा सिकम अपने नगर के फाटक पर आये ओर उन्हें ने अपने नगर के लागों से यों बातचीत किई॥ २९। कि इन मनुय्यों से हम से मेल है से उन्हें इस ट्श में रहने देओ और इस में ब्यापार करें क्योंकि देखे! यह टेश उन के लिये बड़ा हे सेए आशे। हम उनकी वेटियें के पत्नियों के लिये लेवं और अपनी बेटियां उन्हें दवें॥ २२। परन्त हमारे साथ रहने के! और एक लाग हेने के केवल इसी बात से मानेंगे कि खतनः जैसा उन का किया गया हे हम में हर परुष खतनः करावे॥ २३। क्या उन के ढार और उन की संपत्ति और उन का हर एक चैपाया हमारा न हेगा केवल हम उन की उस बात के मान लेवें और वे हम में निवास करेंगे ॥ २४। और सभों ने जा _ नगर के फाटक से आते जाते थे हमूर और उस के बेटे सिकम की बात के! माना और उस के नगर के फाटक से सब जो बाहर जाते थे उन में से हर पुरुष ने खुतनः करवाया॥ २५। ओर तीसरे दिन जब लो वे
३५ पच्चे] की पस्तक । ७९
घाव में पढ़ थे यां हुआ कि यअकब के बंटां में से टौनः के दा भाई समऊन गओऔर लावी हर एक ने अपनी अपनी तलवार लिई ओर साहस से नगर पर आ पड़े और सारे परुषों के मार डाला॥ २६। और उन्हां ने हमर गओजर उस के बेटे सिकम के। तलवार की धार से मार डाला ओर सिकम के घर से टौनः का लेके निकल गये ॥ २७। और यऊकब के बेटे जस्ते हुए पर आये ओर नगर के लट लिया क्योंकि उनन््हों ने उन की बहिन का अशडू किया था ॥ २८। उन््हां ने उन की भेड और उन की गाय बैल और उन के गदहे और जो कुछ कि नगर में और खेत में था लट लिया॥ २९ । और उन के सब घन और उन के सारे बालक ओर उन को पत्नियां बन्चआई में लाये और घर में का सब कुछ लट लिया॥ ३०। और यअकब ने समऊजन ओर लावी से कहा कि तुम ने मम दुख दिया कि इस भूमि के बासियों में कनआनियों और फरिज्जोयां के मध्य में मस्मे घिनोना कर दिया और में गिनती में थाड़ा हूं ओर वे मेरे सन््मख ०कट्टू हांगे और मम्फ मार डालेंगे ओर मैं और मेरा घराना नष्ट हेवेगा॥ ३९। तब वे बाले क्या उसे उचित था कि हमारी बहिन के साथ बश्या की नाई ब्यवहार करे। ३५ पेतीसवां पब्ब।
जो ईस्घर ने यअकब से कहा कि उठ बैतएल के जा ओर वहीं
रह ओर उस ईगश्र के लिये जिसने तम्मे दर्शन टिया था जब ते अपने भाई एसे के आग से भागा था एक बंटी बना॥ २। तब यञकब ने अपने घराने से और अपने सब संगिये से कहा कि उपरी ढेवों का जा तम में हैं दूर करो ओर शब्व हाओ ओर अपने कपडे बदले॥ ३। और आओ हम उठें और बेतएल के जायें और में वहां उस इंस्थर के लिय बेदौ बनाऊंगा जिस ने मेरी सकेती के टन मर्मे उत्तर टिया ओर जिस मागे में में चला बह मेरे साथ साथ था ॥ ४ । ओर उन््हों ने सारे उपरी ट्वों के जो उन के हाथां में थे और कंडल जो उन के कानों में थे बअ॒कब को दिये औएर यअकब ने उन्हें बलत पेड़ तले सिकम के लग गाड़ दिया ॥ ५। और उन्हें ने कंच किया
७२ उत्पत्ति [३५ पब्बे
तीसफकॉन्ल््ॉी:स सस असल तीन नननमनननन-नाननननननननन-नीननयनयया-तनननननन-म-म- मनन न कन+ 3 नन+-+-नन-++--+-33>>>-क>+->री
और उन के आस पास के नगरो पर ईंगर की “डरे पलीऔरर उन्हें ने यअकब के बेटों का पीछा न किया ॥ ६। से! यअकब और जितने लाग उस के साथ थे कनआन की भरमि में लाज का जा बेतएल हे आय ॥ ७ और उस ने वहा एक बेटी बनाई और इस लिये कि जब बुच्द अपने भाई के पास से भागा तो वहां उसे ईश्वर ट्खाई दिया उस ने उस का नाम बैतएल का ईश्वर रक्खा ॥ ८। ओर रिवकः की टाई ट्बूरः मर गई और बैतएल के लग बलत पेड़ तले गाड़ी गई और उस का नाम राने का बलत रक्वा॥ <। और जब कि यअकब फटद्टानअराम से निकला ई स्वर ने उसे फेर ट्शन दिया और उसे आशीष ट्यि[॥ १०। और ईयर न उसे कहा कि तेरा नाम वबञ्र॒कब ह्े तेरा नाम आगे के! यअकब न हेगा परन्त तरा नाम इसराएल हेोगा से! उस ने उस का नाम इसराएल रक्खा॥ २११५। फिर ईस्र ने उसे कहा कि में ईम्वर सबसामथीं हूं त॑ फलमान हो ग्रौर बढ़ तक से एक जाति और जातिन की जाति और तेरी कटि से राजा निकलेंगे॥ ९५२। ओर यह भमिजो में ने अबिरहाम और इजहाक के टिई हे तुमे और तेरे पीछ तेरे बंश के हेऊंगा।॥ १३॥ और ईस्वर उस स्थान से जहां उस ने उसे बातें किई प्री उस पास से उठ गया॥ ९५४। और यअकब ने उस स्थान में जहां उस ने उसमे बातें किई पत्थर का एक खंभा खड़ा किया और उस पर पीने की भेंट चढ़ाई और उस पर तेल डाला॥ १५५। और यञअकूब ने उस स्थान का नाम जहां ईश्वर उससे बाला था बेतएल रक्वा॥ २६। और उन््हों ने बैतएल से कंच किया ओर वहां से इफ्रातः बहुत टूर न था और राखिल के पीर लगी और उस पर बड़ी पीड़ा हुई॥ ९७। और उस पीड़ा की दशा में जनाई दाई ने उसे कहा कि मत डर अब की भी तेरे बेटा हेगा।॥ १८। और यों हुआ कि जब उस का प्राण जाने पर था क्योंकि वुह मर ही गईं ते। उस ने उस का नाम अपने उदास का पुत्र रकवा पर उस के पिता ने उस का नाम विनयमीन रक्खा॥ २१८। से राखिल मर गई ओर इफरातः के मा में जे बेतलहम है गाड़ी गई ॥ ०। श्र यअकब ने उस के समात्रि पर एक खंभा खड़ा किया वह्दी खंभा राखिल के समाधि का खंभा आज ला है॥ २९१। फिर इूसराएल
३६६ पब्बे ] की पस्तक । 98
ने कंच किया और अपना तंब अट्र के गम्मट के उस पार खड़ा किया ॥ २२। ग्रार जब इसराएल उस देश में जा रहा ता यां हुआ कि रूविन गया और अपने पिता की सरैतिन के संग अकस्मे किया और इसराएल ने सना अब यअकब के बारह बंटे थ॥ २३। लोयाह के बट रूबिन यअकब का पहिलेंटठा और समऊन जओर लावी ओर यहूदाह ओर इशकार ओऔर जबलन ॥ २४। और राखिल के बेट यरूफ ओर बिनय- मौन॥ २५। ओर राखिल की सहेली बिलह:ः के बंटे दान और नफताली॥ २६। और लियाह की सहेली जिलफः के बेटे जद और यसर यअ्कब के बेटे जा फहानअराम में उत्पन्न हुए ये हैं॥ २७। और यञअकब अरबः के नगर में जे! हबरून है ममरी के बोच अपने पिता इजहाक पास जहां अविरहाम ओर इजहाक ने निवास कियाथा आया॥ २८। ओर इजहाक एक सो अस्सी बरस का हुआ॥ २८। और इजहाक ने प्राण त्यागा और बढ़ा और दिनी हे।के अपने लागों में जा मिला और उस के बेटे एतो और यञकब ने उसे गाड़ा।
३६ छतीसवां पब्वे ।
॥॥। से। की जा अट्टम है बंशावली यह क्ै। २। एसे ने कनआन कौ लड़कियों में से ऐलन इत्ती की बेटी आदः के! ओर अचदलिबाम के जा अनाह की बेटो हवी सबऊन की बटी थी। ३। और इस- मअुएल की बेटी नबायाोत की बच्चिन बशामत को ब्याह लाया। ४। और एसे के लिये आटः इलौफज के जनी ओर बशामत से रफझशएल उत्पन्न हुआ॥ ५। जर अहलिवामः से यजश ओऔर यअलाम ओर करह उत्पन्न हुए ये एसो के बट हें जा उस के लिये कनआन की भूमि में उत्पन्न जुण॥ ६ । और एसे अपनी पत्नियां और बेटों और बॉटियों और अपने घर के हर एक प्राणी और अपने ढार के और अपने सारे पश के और अपनी सारी संपत्ति के जो उस ने कनआन देश में प्राप्त किई थी लेके अपने भाई यअकब पास से देश का निकल गबा। ७। क्यांकि उन का घन एसा बढ़ गया था कि वे एकड्टे न रह सक्त थे ओर उन के पशु के कारण से उन के परदृश की भूमि उन का भार न उठा ]0 [0,009 0]
3४ उत्पत्ति [३६ पब्थे
सत्ती थी॥ ८। ओर एसे। जे! अट्टम हे शओऔर पहाड़ पर जा रहा॥ <। से! एसे की बंशावली जा शओऔर पहाड़ के मनद्यों का पिता के यह क्षे ॥ ९०। एसी के बटां के नाम यह हें एसे की पत्नी आदः का बेटा इलीफज एसा को पत्नी बशामत का बटा रफऊएल ॥ २१५१॥। इलौफज के बेट नेमन ओर ओमर और सफ और जञताम और कनज ॥ ९५२। ओर एसे के बेटे इलीफज की सक्देली तिमनअ थी से! वह इलोफज के लिये अमालीक का जनी से! एसे की पत्नी आदः के बेटे ये थे। ९२३। और रऊणल के बेटे ये हैं नहत और शारिक और सम्माइह ओर मिष्जः जा एसा की पत्नी वशामत के बेट थे। १४। और ण्सो ही पत्नी सबकऊन की बंटी अनाह की बेटी अहलिबामः के बेट ये थे और वह एसा के लिय यऊस और यअलाम और करह जनी॥ १५४। णसो के बेटा में जे अध्यक्ष हुए थे हें णसा के पहिलींठ इलीफज के बेटे अध्यक्ष तैमन अध्यक्ष आमर अध्यक्ष सफ् अध्यक्ष कनजु॥ ९६। अध्यक्ष करह अध्यक्ष जञ्रताम अध्यक्ष अमालीक य वे अध्यक्ष हें जा इलोफज से अद्टम की भर्मि में उत्पन्न हुए और आदः के बटे थ॥ १५७। और ए्से के बेटे रऊण्ल के बेटे थे हें अध्यक्ष नहत अध्यक्ष शारिक् अध्यक्ष शर्माह अध्यक्ष मिज्जः ये वे अध्यक्ष हैं जा रजण्ल से अट्टम दृश में उत्पन्न हुए और एसे की पत्नी बशामत के बेटे थ। २९८। और एसी की पत्नी अचहलिबामः के ये बेटे हैं अध्यक्ष यझूस अध्यक्ष यअलाम अध्यक्ष क्रह ये वे अध्यक्ष हैं जेए एसा की पत्नी अनाह की बेटी अहलिबामः से थे ॥ ९८ । से एसे के जा अट्म ह्षे य बेट हैं ये उन के अध्यक्ष हैं॥ २०। शऔर के बेटे छूरी जो इस भमि के बासी थे ये हैं लैतान ओर सेबल और
बऊन जऔर अनाह ॥ २९ । ओर ट्ेसन और असर ओर दैसान ये सब हकूरियां के अध्यक्ष हैं और अट्टम की भमि में शऔर के बट हें ॥ २२ । और लै।तान के सन््तान हरी और हेमान और लैतान की बहिन का नाम तिमनअ था ॥ २३। ओर सेवल के सनन््तान ये क्लें अलवान औपर मनहत ओर ऐबाल और सफ् ओर ओऔनाम ॥ २४ । ओर सबऊुन के रुन्तान ये हें एयाह ओर अनाह यह वुह अनाह हे जिस ने बन में जब वुच्ठ अपने पिता सबऊन के गदहों के। चराता था खच्चर पाये ॥
३६ पर्न्ब] की पस्तक । पू
२५ । ओर अनाह के सन्तान थे हें टैस्टन और अहलिबाम: अनाह की बेटी ॥ २६। ओर द्सर्हन के सन्तान हमटान और इशबान और यथरान और करान॥ २७। अमर के सनन््तान थे क्ें बिलहाम जुअवान ओर अकन ॥ २८। देस्हन के सनन््तान ऊज और अरान॥ २८। वे अध्यक्ष जो छरियों में के थे ये हें अध्यक्ष लैतान अध्यक्ष साबल अध्यक्ष सबऊन अध्यक्ष अनाह॥ ३०। अध्यक्ष टेर्हन अध्यक्ष असर अध्यक्ष टेसान ये उन हरियों के अध्यक्ष हें जे! शऔर की भूमि में थे। ३९। और राजा जो अट्टम पर राज्य करता था उसमे पहिले कि इसराएल के बंश का काई राजा हुआ ये हैं॥ ३२। बग्यूर का बेटा बालिग जो अट्टूम में राज्य करता था और उस के नगर का नाम ट्निहबः था॥ ३३ | और वालिग मर गया ओर शारिक् के बटे यबाब ने जो! बसरः था उस की संती राज्य किया॥ ३४ । और यबाब मर गया और हक्ूशाम ने जो तमन्नौ की भमि का था उस की संतो राज्य किया ॥ ३५ | ओर ह्ूशाम मर गया और बिरृद का बेटा हटद जिस ने माअब के चागान में मिद्यानियां के मार डाला उस कौ संती राज्य किया और उस के नगर का नाम गवीत था॥ ३६। और हट्द मर गया और मसरीकः के समलः ने उस की संती राज्य किया ॥ ३७। ओर समलः मर गया और नदी के लग के रह्बात के साजल ने उस की संती राज्य किया॥ ३८। ओर साऊल मर गया और अकबर के बेटे बअ॒लहनान ने उस की संती राज्य किया॥ ३८। और अकबर का बेटा बअुलहनान मर गया ओर हट्र ने उस की संतो राज्य किया उस के नगर का नाम फाग था और उस की पत्नी का नाम मह्ठेतबिएल था जे। मतरिट की बंटी मेजहब की बेटी थी ॥ ४०। से उन के घरानों और उन के स्थानां ओर उन के नाम के समान एसी के अध्यक्षों के ये नाम है अध्यक्ष तिमनः अध्यक्ष अलियाह अध्यक्ष यतीत ॥ ४९। अभध्यक्ष अददलि- बामः अध्यक्ष इलाह अध्यक्ष फैनून ॥ ४२ । अध्यक्ष कुनज अध्यक्ष तौमान अध्यक्ष मिबसार ॥ ४३। अध्यक्ष मजट्णल अध्यक्ष ईराम ये अपने अपने स्थान में अपने अपने निवास के समान अट्टूम के अध्यक्ष थे जा अट्टमियों का पिता य्से के ॥
3७६ उत्पत्ति - [३७ पब्बे
३७ सेंतीसवां पब्बे ।
५ हा यञअकब ने कनआन दृश में अपने पिता के टिकने की भमि में
बास किया ॥ २। यअकब की बंशावलो यह हु यसफ सत्रह बरस का हेके अपने भाइयों के साथ स्कंड चराता था और वह तरुण अपने पिता कौ पत्नी बिलहः ओर जिलफः के बेटों के सग था और यसफ ने उन के पिता के पास उन के बर कामों का संट श् पहुंचाया ॥ ३। अब इस राएल यसफ के अपने सारे लड़कों से अधिक प्यार करता था इस लिये कि वह उस के बढ़ापे का बेटा था और उस ने उस के लिये रंग रंग का पहिरावा बनाया ॥ ४ | ओर जब उस के भाइयों ने ट्खा कि हमारा पिता हमारे सब भाइयों से उसे अधिक प्यार करता हे तो उन््हों ने उस्स बेर किया ओर उससे कुशल से न कह सक्त थे। ५। और यसफ ने णक खन्न देखा और अपने भाइयों से कहा और उन््हों ने उससे आधिक बैर रक्वा॥ ६। ओर उस ने उन्हें यं कहा कि जा खप्न में ने ट्खा हे से सनिये॥ ७। क्योंकि देखिये कि हम खेत में गट्ठियां बांघते थे और क्या इंखता हूं कि मेरी गद्ठी उठी और सौधी खड़ी हुई और क्या टेखता हूं कि तुम्हारी गद्गियां आस पास खड़ी हुई और मेरी गद्दी के दंंडवत किई॥ प८ू। तब उस के भाइयों ने उसे कहा क्या तू सच मच हम पर राज्य करेगा अथवा तू हम पर प्रभता करेगा और उन्हें ने उस के खन्न ओर उस की बातों के कारण उससे अधिक बेर किया॥ €। फिर उस ने टूसरा खप्न टेखा और उसे अपने भाइयों से कहा कि देखो में नेएक ओर खनन टेखा और क्या टेखता हूँ कि सूब्ये और चन्द्रमा और ग्यारह तारों ने मम्ते टंडडत किई॥ २९०। और उस ने यह अपने पिता ओर भाइयें से कहा पर उस के पिता ने उसे डपटा ओर कहा कि यह क्या खन्न हे जात ने टेखा हे क्या में ओर तेरी माता और तेरे भाई सच मच तेरे आगे भमि पर म्कके तम्मे टंडवत करेंगे। ९९। और उस के भाइयों ने डाह किया परन्त उस के पिता ने उस बात का सोच रक्खा ॥ १२ । फिर उस के भाई अपने पिता की म्कंड चराने सिकम का गये ॥ १५३ । तब इसराएल ने यसुफ्
३७ पब्ब] की पस्तक । 9७9
से कहा क्या तरे भाई सिकम में नहों चराते आ में तम्फके उन के पास भेज गैर उस ने उसे कहा कि में यहों ह्ुं॥ १५४। फिर उस ने उसे कहा किजा अपने भाइयों ओर रूंडों की कुशलता टेख और मम्क पास संदेश ला से उस ने उसे हबरून की तराई से भेजा ओर वह सिकम में अआया॥।॥ २५ । तब किसी जन ने उसे पाया और उसे खेत में भ्वमते ट्खा तब उस परूष ने उसे पका कि त् क्या ढंढ़ता हैे॥ १६। वह बोला में अपने भाइयों का हठंठता हू मसम्क बताइये कि वे कहां चराते हैं॥ १७। गैर वह परुष बाला वे यहां से चले गये क्योंकि में ने उन्हें यह कहते सना कि आओ द्वतेन का जावें तब यसफ अपने भाइयों के पीछे चला और उन्हें ट्रेन में पाया॥ २९८। ओर ज्यांह्ों उन््हों ने उसे टूर से देखा तो अपने पास आने से पहिले उस के मार डालने के जगत किई॥ ९८। ओर वे आपस में बोले देखो वह खप्रशों आता क्षे। २०। से आओ अब हम उसे मार डालें और किसीौ कएं में डाल रवें और कहें कि कोई बन्य पश ने उसे भक्ष किया और ट्खगे कि उस के खश्नां का क्या हेगा॥ २९५। तब रूबिन ने सनके उसे उन के हाथों से छड़ाया और बाला कि हम उसे मार न डाले॥ २२। और रूबिन ने उन्हें कहा कि लाह् मत बहाओ परन्त उसे बन के इस क॒एं में डाल ट्गले और उस पर हाथ न डाले जिसतें वह उसे उन के हाथों से छड़ाके उस के पिता पास फिर पहुंचावे॥ २३। और यों हुआ कि जब यसफ् अपने भाइयों पास आया तो उन््हों ने उस का बहुरगी बस्तर उस्य उतार लिया॥ २४। और उन््हों ने उसे लेके कएं में डाल टिया और वह कआं अंधा था उस में कुछ पानी न था॥ २५। तब वे रोटी खाने बैठे और अपनी आंख उठाई और क्या द्खते हैं कि इसमअणलियें का एक जथा जिलिअद से सुगंध ट्रब्य और बलसाम और मुर ऊजटों पर लाद हुए मिस्र का उतर जाते हैं ॥ २६ । और यह्तटाह ने अपने भाइयों से कहा कि अपने भाइ के मारके उस का लेक्न छिपाने से क्या लाभ होेगा॥ २७ । आओ उसे इसमअएलियों के हाथ बेचें और उस पर अपने हाथ न डाल क्योंकि वह हमारा भाई और हमारा मांस है और उस के भाइयों ने मान लिया॥ २८। उस समय मिद्यानी
3८ डर्ब्पात्त [३८ पब्बे
ब्यापारी उधर से जाते थे से उन््हों ने यसफ के! कुएं से बाहर निकाल के इसमएलियां के हाथ बीस टकड़ चांदी पर बेचा और वे यसफ का मिस्र में लाथे॥ २७। तब रूबिन कुए पर फिर आया और यसफ के कएं में न टेखके उस ने अपने कपड़े फाड़े॥ ३०। शऔर अपने भाइयों के पास फिर आया ओर कहा कि लड़का तो नहीं अब में कहां जाऊं ॥ ३९। फिर उन््हों ने यसफ का पहिरावा लिया और एक बकरी का मेम्ना मारा और उसे उस के लाह्न में चभाड़ा॥ ३२। और उन्हें ने उस बहुरंगी बस्तर के भेजा और अपने पिता के पास पहुंचाया ओर कहा कि हम ने इसे पाया आप इसे पहिचानिये कि यह आप के बेटे का पहिरावा है कि नहीं ॥ ३३। ओर उस ने उसे पहिचाना और कहा कि यह तो मेरे बेटे का पहिरावा है किसी बन पश ने उसे फाड़ा है यसफ निःसन्दह फाड़ा गया ॥ ३४। तब यञअकब ने अपने कपडे फाडे और टाट बस्तर अपनी कटि पर डाला और बहुत ट्नि लॉ अपने बेटे के लिये शाक किया॥ ३५ । ओर उस के सारे बटे बेटियां उसे शांति टेने उठीं पर उस ने शांति ग्रहण न किई पर बाला कि में अपने बेटे के पास रोता छुआ समाधि में उतरूगा से उस का पिता उस के लिये रोया किया॥ ३६। और मिद्यानियों ने उसे मिख में फिरऊुन के एक प्रधान सेना पति फूर्तिफ्र के हाथ बेंचा
३८ अउठतीसवां पत्वे ।
जञैः उस समय में यां हुआ कि यहूदाह अपने भाइयों से अलग हेकर हौरः नाम एक अट्टलामी के पास गया॥ २। और यहूदाह ने वहां एक कूनआनी की लड़की का टेखा जिस का नाम रूआ था उस ने उसे लिया और उस के साथ संगम किया॥ ३। वह गशभिणी हुई और एक बेटा जनी और उस ने उस का नाम एर रक्खा ॥ ४। और वह फिर गर्भिणी हुई और बटा जनी और उस ने उस का नाम ओआनान रकवा ॥ ५। ओर वह फिर गर्भि णी हुई और बेटा जनी और उस का नाम सेलः रकक्वा गैर जब वह उसे जनी तो वह कजीब में था॥ ६। और यहूदाइ अपने पहिलोंट एर के लिये एक स्ली ब्याह लाया जिस का नाम तमर
३८ पत्ब] की पुस्तक ॥ ७6
था॥ ७। और यहृदाह का पहिलौंटा एरपरमेश्वर को दृष्टि में दुष्ट था से परमेम्घर ने उसे मार डाला॥ प८। तब यहूदाह ने ग्रानान का कहा कि अपने भाई कौ पत्नी पास जा और उससे ब्याह कर ओर अपने भाई के लिये बंश चला॥ «। और औओजनान ने जान! कि यह बंश मेरा न होगा और या हुआ कि जब वुच्द अपने भाई की पत्नी पास गया तो बीये का भूमि पर गिरा दिया न हावे कि उस का भाई उसे बंश पावे॥ १५०। और उस का वुष्द काये परमेश्वर की दृष्टि में बुरा था इस लिये उस ने उसे भो मार डाला॥ २१५१। तब यहकूदाह ने अपनी पताह तमर को कहा कि अपने पिता के घर में रांड बैठी रह जब लो कि मेरा बेटा सेलः बढ़ जाय क्यांकि उस ने कहा न हावे कि वह भी अपने भाइयों की नाई मर जाय से तमर अपने पिता के घर जा रही ॥ ९२। ओर , बहुत ट्नि बीते रूअः की बेटी यकह्ूदाह की पत्नी मर गई और यहूट्रह उस के शाक के भंला तब वह और उस का मित्र अट्टलामी हौरः अपनी भेड़ों के रोम कतरने तिमनास के गया॥ १५३। और तमर से यह कहा _ गया कि देख तेरा ससुर अपनो भड़ां के रोम कतरने तिमनास का जाता हे॥ १४। तब उस ने अपने रंडसाले के कपड़ों का उतार फका और घंचट ओढ़ा और अपने का लपेटा और तिमनास के मार्ग में एक खल हुए स्थान में बेठ गई क्यांकिउस ने टखा था कि सेल: सयाना हुआ और मस्फे उस की पत्नी न कर दिया॥ २९५४। जब यहट्ाह ने उसे रखा तो समस्या कि काई बेश्या है क्यांकि वह अपना मंह छिपाये हुए थी॥ ९६ । और मागे से उस की ओर फिरा ओर उसे कहा कि मे अपने पास आने दे और नजाना कि व॒ह मेरी पताह है वह बाली कि मेरे पास आने में त मक््त क्या टंगा॥ २७। वह बाला में मंड में से एक मेग्ना भेजंगा उस ने कहा कि त उसे भेजने लो म्॒क कुछ बंधक ट् ॥ ९ ८। वह बोला में तम्मे क्या बंधक ट्ेऊं वह बाली अपनी छाप और अपने बिजायठ और लाठी जा तरे ह/थ में है उस ने टिया और उस के पपस गया ओर वह उद्म गभिणी हुई ॥ २१८। फिर वह उठी और चली गई और घंघट उतार रक्वा ओर रंडसाले का बस्तर पहिन लिया॥ २०। और यहदटाह ने अपने मित्र अटूलामी के हाथ मेम्ना भेजा कि उस स्त्री के
ष्र्० उत्पत्ति [३८ पब्बे
हाथ से अपना बंधक फेर लेवे परन्तु उस ने उसे न पाया॥ २९। तब उस ने वहां के लागों से पक्ता कि जा बेश्या मागे में बैठो थी से कहां है वे बाले कि यहां बेश्या न थी॥ २२। तब वह यहूदाह के पास फिर आया और कहा कि में उसे नहीं पा सक्ता ओर वहां के लागों ने भी कहा कि बेश्या वहां न थ।॥ २३। यक्ूदाह बाला कि उसे लेनेट न हैे। कि हम निन्दित हेवें टेख में ने यह मेम्ना भेजा और त ने उसे न पाया॥ २४। और तीन मास के पीछ य॑ हुआ कि यहूटाह से कहा गया कि तेरी पताह तमर ने बेश्याई किई और टेख कि उसे छिनाले का गर्भ भी है यहूटाह बाला कि उसे बाहर लाओ और जला द॒ग्मे॥ २५। जब वह निकाली गई तो उस ने अपने ससर का कहला भेजा कि मम्मे उस जन का पेट हे जिस की थे बस्तें हैँ ओर कहा कि ट्ेखिये यह छाप और बिजायठ और लाठी किस की है ॥ २६। तब यहक्ूट्राह ने मान लिया और कहा कि वह मस्त से अधिक घर्मो हे इस लिये कि में ने उसे अपने बेट सेल: के न टिया पर वह आग को उद्हे अज्ञान रहा ॥ २७। ओर उस के जन्ने के समय में यं हुआ कि उस की कोख में जमल थ॥ २८। और जब वह पीड़ में हुई ते एक का हाथ निकला और जनाई टाई ने उस के हाथों में नारा बांध क कहा कि यह पहिले निकला॥ २९। ओर यूं हुआ कि उस ने अपना हाथ फिर खींच लिया गजर क्या देखता हू कि वहों उस का भाई निकल पड़ा तब वचह्ठ बोली कितू ने यह ट्रार क्यां किया इस लिये उस का नाम फाडस हुआ ॥ ३०। उस के पीक उत्तर का भाई जिस के हाथ में नारा बंधा था निकला और उस का नाम शारिक् रक्खा।
३८ उन््तालीसवां पब्बे।
ञ्" यसफ के मिस्र में लाये आर फर्तीफर मिलो ने जो फिरऊन का एक प्रधान ओर राजा का सेनापति था उस के इसमअ- एलियों के हाथ से जा उसे वहां लाये थ मेल लिया॥ २। परनन््त परमे आ्यर यसफ के साथ था ओर वह भाग्यमान हुआ ओर वह अपने मिखी
खामी के घर में रहता किया ॥ ३। और उस के खामी ने यह देखा कि _
३८ पब्ब ] की पस्तक । ष्प्श्
५3-3७ भ+&3»+ कक». <3«+>>»+--की
परमेश्वर उस के साथ है औपर यह कि परमेग्र ने उस के सारे काया में उसे भाग्यमान किया॥ ४। ओर यसफ ने उस की दृष्टि में अनग्नह पाया और उस ने उस की सेवा किई और उस ने उसे अपने घर पर करोड़ा किया और सब जे कुछ कि उस का था उस के हाथ में कर दिया ॥ ५। और थां हुआ कि जब से उस ने उसे अपने घर पर और अपनी सब बस्तन पर करोड़ा किया परमेमगख्र ने उस मिस्त्री के घर पर यसफ के कारण बढ़ती दिई और उस की सारी बस्तन में जेए घर में औ।र खेत में थीं परमेश्वर की ओर से बढ़ती हुई॥ ६। और उस ने अपना सब कुछ यसफ् के हाथ में कर दिया और उस ने राटी से अधिक जिसे खा लेता था कुछ न जानता था और यसफ् रूपमान ओर ट्खने में संदर था॥ ७। ओर उस के पीछे यें हुआ कि उस के खामी की पत्नी की आंख यसफ पर लगी ओर बह बाली कि मर्फे ग्रहण कर॥ ए८। परन्त उस ने न माना ओर अपने खामी की पत्नी से कहा कि टेख मेरा खामी अपनी रोटी से अधिक जिसे खा लेता क्ञे किसो बस्त का नहों जानता और उस ने अपना सब कुछ मेरे हाथ में सांप दिया॥ <। इस घर में मस्त से बड़ा काई नहीं ओर उस ने तक का छोड़ काई बस्त मस्क्त से अलग नहों रक्खी क्योंकि तू उस की पत्नी हे भला फिर में एसी महा दुष्टता कर क्यां ईश्वर का अपराधी हाज॑॥ २९५०। और ऐसा हुआ कि वुषह् यसुफ् का प्रतिदिन कहती रही पर वुद् उसे ग्रहण करने के अथबा उस के पास रहने के उस की न मानता था॥ २२। और एक समय एसा हुआ कि वह अपने कार्य के लिये घर में गया ओर घर के लोगों में से वहां कोई न था॥ ९२। तंब उस ने उस का पहिरावा पकड़के कहा कि मम्मे ग्रहण कर तब वह अपना पहिरावा उस के हाथ में छाड़ कर भागा और बाहर निकल गया॥ १५३ । अब जे उस ने टेखा कि बुच्द अपना पहिरावा मेरे हाथ में छोड़गया और भाग निकला ॥ १५४। तो उस ने अपने घर के लागां के बलाया और
कहा कि टेखे। वह एक इबरानी के हमारे घर में लाया कि हम से ठठाली करे वह मस्के अपत करने के! भीतर घस आया और मैं चिल्ला
उठो॥ २५ । और यों हुआ कि जब उस ने देखा कि में शब्द उठा ]] 00 9.
चक्र ड्त्पत्ति [४० पब्बे
के चिज्ञाई ते। अपना पहिरावा मेरे हाथ में छेड़ भागा और बाहर निकल गया॥ १५६। से! जब लो उस का पति घर में न आया उस ने उस का पहिरावा अपने पास रख छाड़ा॥ २९७। तब उस ने एसी हो बातें उस्मु कहों कि यह इबरी दास जात ने हम पास ला रक््खा घस आया कि मक्क से ठट्ठटा करे॥ १५८। ओर जव में चित्ला उठी ता वह आपना पहिरावा मेरे पास छाड़ कर बाहर निकल भागा ॥ ९८। जब उस के खामी ने ये बातें सनी जा उस की पत्नी ने कहों कि तर दास ने मस्क से या किया तो उस का क्राघ भड़का॥ २०। ओर यसफ के खामी ने उसे लेके बंदीगचह में जहां राजा के बंधए बंद थे बंधन में डाला और वह वहां बटौगह में था॥ २१५। परन्त परमेश्वर यसफ के साथ था और उस पर कृपा किई ओर बंदौगह के प्रधान के। उस पर ट्याल किया॥ २२। ओर बंदोगह के प्रधान ने बंदोगचह के सारे बंधओं के! यसफ के हाथ में सांप और जा कुछ वे करते थे उन का प्रधान वही था॥ २३। और बंटौगह का प्रधान उस के सार काव्यां से निश्चित था इस लिये कि परमेम्वर उस के साथ था ओर उस के काव्यां में जे। उस ने किये ई ख्र ने भाग्यमान किया ॥
४० चालीसवां पब्बे ।
ञोः इन बातों के पीछ यों हुआ कि मिस्र के राजा के पियाजऊ ने ओर रसे।इंया ने अपने प्रभ मिख के राजा का अपराध किया ॥ २। ओर फिरऊन अपने टो प्रधानों पर अथात प्रधान पियाऊ पर और प्रधान रसेइंया पर क्र हुआ॥ ३। और उस ने उन्हें पहरू के प्रधान के घर में जहां यसफ बंद था बंटीगह में डाला॥ ४। और पह्रू के प्रधान ने उन्हें यसफ के सौंप टिया और उस ने उन कौ सेवा किई और वे कितने टन लो बंद रहे॥ ५। और हर एक ने उन टानों में से बंदौगह में अथै।त् मिख॒ के राजा के पियाज ओर रसेइंया ने एक ही रात एक एक खप्न अपने अपने अथे के समान टेखा॥ ६। ओर बिह्ान के यसफ् उन पास आया और उन पर दृष्टि करके क्या ट्खता है कि वे उदास हैं॥ ७। तब उस ने फिरऊुन के प्रधानों से जे। उस
४० पब्बे ] की पक्तक । द््३्
के साथ उस के प्रभु के घर में बंद थे पूछा कि आज तुम क्यों कुरूप हे। | ८। वे बालेकि हम ने खन्न टेखा क्षे जिस का अर्थ करवैया नहीं तब यसफ ने उन्हें कहा क्या अथे करना इंग्वर का काय्ये नहों मस्त से . कहे।॥ ८। तब पियाज के प्रधान ने अपना खनन यसफ से कहा और उसे बाला कि अपने खश्न में क्या रखता 'हं कि एक लता मेरे आगे कहै॥ १५०। ओर उस लता में तोौन डालियां थीं उन में कलियां निकलीं ओर उस में फल लगे जर उस के गच्छऋ! में पक्क ट[ख निकंले॥ ९५९ | और फिरऊन का कथारा मेरे हाथ में था और में ने दाखां का लेके फिरिजन के कथा रे में निचाड़ा और में ने उस कटा रे के फ्रिकुन के हाथ में टिया ॥ १९५२। तब यूस॒फ ने उसे कहा कि इस का यह अर्थ है किये तीन डालियां तीन टिनतक्टें॥। ९१३। फ्रिजन अब से तीन टन में तेरा सिर उभाड़ेगा और तम्के अपना पट फिर टेगा और त आगे की नाई जब त फिरिजुन का पियाऊ था उस के हाथ में फिर कटारा टेगा॥। २९१४। परन्त जब तेरा भला होय तो मझस्के सारण कौजिये और मम्क पर ट्याल कृजिया और फिरऊन से मेरी चर्चा करिये। और मस्फे इस घर से छड़वाइये7॥ २५ । क्योंकि नि्यय में इबरानियों के टश से चराया गया था और यहां भी में ने ऐसा काम नहों किया कि वे मरे इस बंटौगह में रक्खें॥ १५६। जब रसेइंयों के प्रधान ने ट्खा कि अथ अच्छा हुआ तो यसफ से कहा कि में भी खप्न में था ओर क्या टेखताहूं कि मेरे सिर पर तीन स्थेत टोकरियां हं॥ १५७। और ऊपर को टोकरी में फिरिजन के लिये समस्त रीति का भेजन था और पंछी मेरे सिर पर उस टोकरी में से खाते थे। १८। तब यूसुफु् ने उत्तर दिया ओर कहा उस का अर्थ यह हे की ये तौन शेकरियां तीन ट्न हैं ॥ १६। फ्रिजन अब से तीन टन में तेरा सिर तेरे देह से अलग करेगा और एक पेड़ पर तस्ते टांग ट्गा और पंछी तेरा मांस नाच नाच खायेंगे॥ २०। और यों हुआ कि तीसरे दिन फिरिजन के जन्म गांठ का दिनथा और उस ने अपने सारे सेवकों का नेउ॑ता किया ओर उस ने अपने सेवकों में पियाऊ के प्रधान और रसेइंयों के प्रधान के उभाड़ा॥ २९। और उस ने पियाज के प्रधान के। पियाऊ
ष््४ उत्पत्ति [४९ पच्चे
कटनी न «मम 8 हर का पद फिर दिया और उस ने फ्रिजन के हाथ में कटरा द्या॥ २२। परन्तु उस ने यस॒फ के अर्थ करने के समान रसेइंयों के प्रधान का फांसी दिई॥ २३॥। तथापि पियाऊ के प्रधान ने यसफ के! छारण न किया परन्त उसे भूल गया ॥
४९ एकतालौसवां पत्बे ।
। दे! बरस बीते यों हुआ कि फिरज॒न ने खप्न टखा और क्या खता है कि आप नदी के तौर पर खड़ा क्षे। २। ओर क्या टेखता क्ञे कि नदी से सात संदर और मेटी मोटी गायें निकलीं और चराव पर चरने लगों॥ ३। आर क्या ट्खता क्ञ कि उन के पीक आर सात गायें कुरुप ओर डांगर नदी से निकलों और नदी के तीर पर उन सात गायों के पास खड़ी हुई ॥ ४। और उन कुरुप ओर डांगर गायों ने उन संदर ओर मेटी सात गायों के! खा लिया तब फ्रिजुन जागा॥ ५। और फिर से गया ओर दुृद्राके खनन टेखा कि अन्न से भरी हऊुई और अच्छी सात बालें एक डांठी में निकलों ॥ ६। ओर क्या दखता क्ञे कि और सात बालें छितरी और प रबी पवन से मरस्काई हुई उन के पीछे निकलों॥ ७। और वे छितरी सात बालें उन अच्छी भरी हुई खात बालों के निगल गई और फि्रिकऊन जागा और क्या देखता है कि खनन हे॥ ८। और बविहान के थां हुआ कि उस का जीव ब्याकुल छुआ तब उस ने मिस्र के सारे टॉनचोां और बड्चिमानों के बला भेजा और अपना खभ्न उन से कहा परन्त उन में से काई फ्रिजुन के खप्न का अथे न कर सका॥ «। तब प्रधान पियाऊ ने फिरऊन से कहा कि मेरा अपराध आज मस्क चेत आता है॥ २१०। फ्रिऊन अपने ट्ासों पर क्र था और मुझे ओर रसाइंये के प्रधान के बंटीगचह के पहरू के घर में बंद किया था॥ १५१५। ओर एकी रात हम ने अर्थात में ने और उस ने एक एक खपभ्न टेखा हम में से हर एक ने अपने खन्न के अर्थ समान खप्न ट्खा॥ ९२९ । ओर एक इबरानी तरुण पहरू के प्रधान का सेवक हमारे साथ था और हम ने उससे कहा और उस ने हमारे खप्न का अर्थ किया और उस ने हर एक के खभ् समान अर्थ किया॥ ९३। शेर जैसा उस ने हमारे
४९ पर्व] की पस्तक । ष्य्पू
लिये अर्थ किया तैसा हुआ मस्के आप ने पट फिर टिया और उसे फांसी हिई॥ १५४। तब फि्रिकन ने यूसफ का बलवा भेजा ओर उन्हें ने उसे बंटौगह से दौड़ाया ओर उस ने बाल बनवाया ओर कपड़े बदल फि्रिजन के आगे आया॥ ९१५५४। तब फिरऊन ने यसुफ से कहा कि में ने एक खप्न टे्खा जिस का अर्थ काई नहीं कर सत्ता और में ने तेरे बिषय में सुना क्षे कि तू खन्न के समुझके अर्थ कर सक्ता क्षे। २६। और यूसफ् ने उत्तर में फ्रिकुन से कहा कि मर्क से नहों ई स्वर हो फिरिजन के। कुशल का उत्तर टेगा। १५७। तब फिरजन ने यसफ से कहा कि मे ने खप्त देखा कि में नही के तौर पर खड़ा क्नू॥ १५८। और क्या देखता हूं कि मेटी ओर संदटर सात गायें नही से निकलीं और चराई पर चरने लगों ॥ १५८। और क्या देखता हूं कि उन के पीछ अत्यंत कुरूप और बरी और डांगर और सात गाय निकलीं णेसी बरी जो में ने मिख के सारे देश में ककी न ट्खा॥ २०। ओर वे डांगर और कुरूप गायें अगिली मेटटी सात गायों के खा गई ॥ २९। और जब वे उन के उदर में पड़ी तव समुस्कत न पड़ा कि वे उन्हें खा गई और वे बेसी ही कुरूप थीं जैसी पहिले थीं तब में जागा॥ २२ | और फिर खन्न में टेखा कि अच्छी घनी सात बालें एक डांठौ में निकलों ॥ २३। ओर क्या ट्खता हूँ कि और सात वालें मुरमकाई हुई और पतली पुरवी पवन से कुम्हलाई हुई उन के पीछ उगीं ॥ २४। और उन पतली बालों ने उन अच्छी सात बालों के निगल लियाओऔर मैं ने यह टानहें से कहा परन्तु काई अथे न कर सका॥ २४। तब यूसुफ ने फ्रिजुन से कहा कि फ्रिजन का खश्न एक ही हे जा कुछ इंश्यर का करना हे से उस ने फ्रिजन के ट्खिया के । २६। वे सात अच्छी गायें सात बरस हें और वे अच्छी सात बालें सात बरस हें खप्त एक हो है। २७। ओर वे डांगर और कुरूप सात गायें जा डन के पीछे निकलों सात बरस हें और वे सात छकी बालें जे! पुरवी पवन से कुम्हलाई हुई हैं से। अकाल के सात बरस हैं॥ २८। यही बात है जामें ने फिरजन से कही ईश्वर जो कुछ किया चाहता क्ञषे फ्रिजुन के ट्खाया ॥ २८ । ट्खिये कि सात बरस लॉ मिस्त के सारे देश में बड़ी बढ़ती हे|गी॥ ३०। और उन
ष्र्ई उत्पत्ति [४९ फब्बं
के पीछे सात बरस का अकाल हेगा ओर मिख देश की सारी बढ़ती भुला जायगी ओर अकाल देश के नष्ट करेगा॥ ३९ । और उस अकाल के मार वह बढ़ती टृश में जानो न जायगी क्योंकि वह बड़ा भारी अकाल हेगा॥ ३२। ओर फिरिकन पर जे खन्न हाहराया गया से इस लिये हे कि वह ई ग्थर से ठहराया गया है और ईश्वर थेएड़े ट्िन में उसे करेगा॥ ३३। से। अब फि्रिजन एक चतर बद्भिमान मनव्य ढंढे आर उसे मिद्ध टेशपर ठहरावे॥| ३४। फिरऊन यही कर ओर ट्श पर करोड़ा ठहरावे ओर सात बढ़ती के बरसे में मिस्र हेश का पांचवां भाग लिया करे ॥ ३५ । और वे अवैय अच्छ बरसे का सारा भेजन एकड्ठटा करें और फि्रिऊन के बश में अन्न घर रक्खें ओर वे अन्न नगरों में घर रक्व ॥ ३६। ओर वही भेजन मिख के दश में अकाल के अवैय सात बरसे के लिय दश के भंडार के लिये होगा जिसते अकाल के मारे देश नष्ट न हेन्॥ ३७। तब यह बात फ्रिजन की दृष्टि में और उस के सारे सेवकों की दृष्टि में अच्छी लगी॥ ह₹८। तब फि्रिजन ने अपने सेवकों से कहा क्या हम इस जन के समान पा सक्ते हैं जिस में ईश्वर का आत्मा हे। ३५८। और फिरऊजन ने यसफ से कहा जैसा किईस्र ने थे सारी बातें तसमे ट्खाई हें से! तरे तल्य बड़्िमान और चतर काई नहों है॥ ४०। त मेरे खर का करोड़ाहे। ओर मेरी सारी प्रजा तेरी आज्ञा में हेगी केवल सिंहासन पर में तम्क से बड़ा हुंगा॥ ४९। फिर फिरजन ने यसफ से कहा किट्ख में ने तम्मे मिस्र के सारे टश पर करोड़ा किया॥ ४२। और फिरजन ने अपनी अंगूठी अपने हाथ से निकाल के यूसुफ के हाथ में पहिना टिई और उसे कौना बस्तसे विभूषित किया और सेने की सिकरी उस के गले में डाली॥ ४३। ओर उस ने उसे अपने दूसरे रथ में चढ़ाया और उस के आगे प्रचारा गया कि सन्मान करा ओर उस ने उसे मिस्र के सारे टेशपर अध्यक्ष किया॥ ४४। और फिरजन ने यसफ से कहा कि में फिरिजन हूं आर तम्क बिना मिस्र के सारे ट्श में काई मनव्य अपना हाथ पांव न उठावेगा॥ ४५। ग्योर फि्रिजन ने यसफ् का नाम सफनथफानिअख रक्छा और उस ने ओन के नगर
४२ पन्ब] की पस्तक । ष्ट्छ
के याजक ए तिफरअ की बेटी आसनाथ के उद्मे ब्याह दिया और यसफ मिस्र देश में सबेत्र फिरा। ४६। ओर जब यसफ मिस्र के राजा फिरकन के आगे खड़ा हुआ तब वह तोस बरस का था और यसफ फिरकऊकन के आगे से निकलके मिस्र के सारे दृश में सबेत्र फिरा॥ ४७। और बढती के सात बरसों में भमि से मद्ठी भर भर उत्पन्न हुआ॥ ४८। तब उस ने उन सात बरसे का सारा भाजन जा मिस्र हेश में हुआ एकड्रे किया और भाजन के नगरों में धर रक््खा हर नगर के आस पास के खेतों का अन्न उसी बस्ती में रक्वा॥ ४८। ओर यसफ ने समद्र की बाल की नाई बहुत अन्न बटारा यहां ला किगिन्ना छाड़ टिया क्यांकि अगणितथा॥ ५०। ओर अकाल के बरसों से आगे यसफ के टा बट उत्पन्न हुए जो ओआन के याजक फरतीफरअ की बेटी आसनाथ उस के लिये जनी॥ ५९५। से यसफ मे पहिले का नाम मुनस्सो रक््खा इस लिये कि उस ने कहा ईश्वर ने मेरा ओर मेरे पिता के घर का सब परिश्रम भुलाबया॥ ५२। और दूसरे का नाम इफरायम रक्ख़ा इस लिय कि ईग्वर ने मझ्के मेरे दुख के टए में फलमान किया॥ ५३। और मिस्र टेश के बढ़ती के सात बरस बीत गये ॥ ५४ । ओर यसफ के कहने के समान अकाल के सात बरस आने लगे और सारे देशां में अकाल पड़ा परन्त मिस्र के सारे टृश में अन्न था॥ ५४ | पर जब कि मिखर के सार रेश भख से मरने लगे ता लाग रोटी के लिय फिरकन के आगे चिज्लाये तब फिरऊन ने सारे मिस््रियां से कहा कि यसफ् पास जाओ ओर उस का कहा मानोा॥ ५६। और सारी भमि पर अकाल था »&र यसफ ने खत्त खाल खाल मिसखियां के हाथ बेचा और मिस्र के टेश में कठिन अकाल पड़ाथा॥ ५४७। और सारे दृश्गण मिस्र में यसफ से मेल लेने आये क्योंकि सारे देशें में बड़ा अकाल था ।
४२ बयालौोसवां पब्बे ।
ञ्जै' जब यअकब ने टेखा कि मिस में अन्न क्षे तब उस ने अपने बेटों से कहा कि क्यों एक एक का ताकते हेस्॥ २। तब उस ने
ष््ष उत्पत्ति [४२ पब्बे
कहा ट्खा में सनता हल कि मिस्र में अन्न है उधर जाओ ओर वहां से हमारे लिये मेल लेओआ जिसतें हम जीवें और न मरें॥ ३। से! यसफ के टस भाई अन्न माल लेने का मिक्त में आय॥ ४। पर यअकब ने यसफ के भाई विनयमीन का उस के भादयां के साथ न भजा क्यांकि उस ने कहा कहीं ऐसा न हे। कि उस पर कुछ बिपत पड़े॥ ५। ओर इसराएल के बेटे ओर आनेबाले के साथ मे।ल लेने आय क्योंकि कमआन
ढेश में अकाल था॥ ६। और यसफु तो देश का अध्यक्ष था ओर बह देश के सारे लागों के हाथ बंचा करता था से! यसफ के भाई आये ओर उन्हें ने उस के आगे भमि लो प्रणाम किया॥ ७। ओर यसफ ने अपने भाइयों का ट्खके उन्हें पहिचाना पर' उस ने आप को अन पह्ि- चान किया और उन से कठारता से बाला और उस ने उन्हें पछा कि तम लाग कहां से आते हे। ओर वे बाले अन्न लेने का कमआन ट्श से॥ ८। यसफ ने तो अपने भाइयों के पहिचाना पर उन्हें ने उसे न पहिचाना ॥* 6 । ओर यसफ ने उन के बिषय के खप्नां का जा उस ने टेखे थे स्वरण किया ओरर उन्हें कहा कि देश की कुदशा देखने के भेटिये होकर आये हे। ॥ ९ ०। तब उन््हा ने उसे कहा नहीं मेरे प्रभ परन्तु आप के सेवक अन्न लेने आये हैं। ५५। हम सब एक ही जन के बेटे हें हम सच्चे हें आप के सेवक भेट्यि नहीं हैं ॥ ५२ | तब वुच्द उन से बाला कि नहीं परन्तु देश की कुटशा देखने आये हे ॥ १५३। तब उन्हें ने कहा कि आप के सेवक बारह भाई कनआन टृश में एक ही जन के बेटे हें और टेखिय कछटका आज के ट्नि हमारे पिता पास के और एक नहीं ह्ै॥ १५४। तब यसफ ने उन्हें कहा साई जा में ने तम्ह कहा कि तम लाग भेटिये हो॥ ९१५५। इसी से तम जांच जाओग फिरफन के जीवन की किरिया जब लॉ तम्हारा छोटा भाई न आवे तम जाने न पाओगे॥ २९१६। अपना भाई लाने का अपने में से एक के भेजो और तम लाग बंटोगह में रहे।गे जिसतें तम्हारी बातें जांचौ जाव कि तम सच्च हे। कि नहों नहों तो फि्रिजन के जीवन की किरिया तम लाग निश्यय भदटदिये हे।॥ १५७ । फिर उस ने उन के तोन दिन लो बंधन में रक्खा॥ ९८। ओर तौसरे दिन यूसफ ने उन््हं कहा यां करके जोते रहो में ईम्वर से डरता हें ॥
४२ पच्बे] की पस्तक । ष्र्ढ्
२९«। ज्ञा सच्च हो तो एक का अपने भाइयों में से बंदटीगह में बंद रहने टओ ओर तम अकाल के लिये अपने घर में अन्न ले जाओ ॥ २०। परन्त अपने छाटे भाई का मम्क पास लाओ7 से तम्हारी बातें यां ठहर जायंगी ओर तम न मरोगे सो उन्होंने एसा ही किया॥ २९५। तब उन्हों। ने आपस में कहा कि हम निच्यय उस बात के बिषय में टणो हें कि जब हमारे भाई ने बिनती किई और हम ने उस के प्राण के कष्ट का ट्खा ता उस की न सनी इस लिये यह बिपत्ति हम पर पड़ी है ॥ २२। तब _ रूबिन ने उत्तर में उन्हें कहा क्या में ने तम्हें नहों कहा कि इस लड़के के बिरुड़् पाप न करो और तम ने न सना इस लिये टेखे। उस के लाह का यही पलटा क्षे। २३। ओर वे न जानते थे कि यसफ् समझता क्षे क्योंकि उन के मध्य में एक टाभाषिया था॥ २४। तब वह उन में से अलग गया जर रोया और फिर उन पास आया और उन से बात चौत किई गौर उन में से समऊन के लेके उन की आंखों के आगे बांघा ॥
२५ । तब यसफ ने उन के बारों का अन्न से भरने की और हर जन का रोकड़ उस के बारे में फरने की ओर मागे के लिये उन््ह भाजन हेने की आज्ञा किई ओर उस ने उन्हें ऐसा ही किया॥ २६। और वे अपने गदहें पर अन्न लाटके चल निकले॥ २७। और जब उन में से एक ने टिकान में अपने गदहे का दाना घास टने के अपना बारा खेला ते उस ने अपना रोकड ट्खा क्योंकि वह बारे के मंह परथा॥ २८। तब उस ने अपने भाइयों से कहा कि मेरा रोकड़ फेरा गया है और ट्खा कि वह मेरे बार में है से उन के जो में जी न रहप और वे डरके एक ट्सरे का कहने लगे किई स्वर ने हम से यह क्या किया॥ २८। और वे कनआन देश में अपने पिता यअकब पास पहुंच ओर सब जे उन पर बीता था उस के आगे टाहराया ॥ ३०। जो जन उस ट्श का खामी कहे से। हम से कठारता से बेला ओ7र हमें टेश का भेटिया ठहराया ॥ ३९। और हम ने उसे कहा कि हम तो सच्चे मनुय्य हैं हम भेट्यि नहीं हैं ॥ ३२ हम बारह भाई एक पिता के बेटे हें एक नहों है और सब से छाटा आज अपने पिता के पाम कनआन देश में हे॥ ३३। तब उस जन ने अथात
9 [&, 8, $.]
€् ० जत्पत्ति [४३ पब्बे
उस टेश के खामी ने हम से कहा इससे में तम्हारी सच्चाई जांचंगा अपना एक भाई मस्क पास छाडे। और अपने घराने के लिये अकाल का भाजन ले जाओ॥ ३४। ओर अपने छटके भाई के मेरे पास ले आओ तब में जानंगा कि तम भेटिये नहों परन्न सच्चे हे। फिर में तम्हारे भाई के तम्हें सांपंगा और तम द्श में व्यापार कीजियो ॥
३५ | ओर यों हुआ कि जब उन्हें ने अपना अपना बारा छछा किया ते देखो कि हर जन का रोकड़ उस के बारे में है और जब उन्हें ने और उन के पिता ने रोकड़ की थेलियां टेखों तत डर गय ॥ ३६। और उन के पिता यअकब ने उन्हें कहा कि तम ने मस्के निःसंतान किया यसफ तो नहीं क्षे आर समऊन भी नहीं ओर तम लोग बिनयमीन का ले जाने चाहते है। ये सब बातें मस्त से बिरुड्ू हें ॥ ३७। तब रूबिन अपने पिता से कहके बाला जो में उसे आप पास न लाऊं ता मेर दोनों बटों के। मार डालियो उसे मेरे हाथ में सेपिये और में उसे फिर आप पास पहुंचाऊंगा॥ ३८। और उस ने कहा मेरा बेटा तुम्हारे संग न जायगा क्येककि उस का भाई मर गया है ओर यह अकेला रह गया जो जाते जाते मागे में उस पर कुछ बिपत्ति पड़े ता तम मेरे पक्के बालों के शाक के साथ समाधि में उताराणगे ॥
४३ तेंतालीसवां पत्म ।
जी देश में बड़ा अक्षाल था॥ २। और यों हुआ कि जब वे मिस्र से लाथे हुए अन्न का खा चके तो उन के पिता ने उन्हें कहा किफिर जाओ और हमारे लिये थाड़ा अन्न मेल लओ॥ ३। तब यह्ूटाह उसे कहा कि उस परुष ने हमें चिता चिता कहा कि जब लो तम्हारा भाई तम्हारे साथ न हे मेरामंह न ट्खोगे॥ ४। से जा आप हमारे भाई के! हमारे साथ भेजियेगा तो हम जायगे औपए आप के लिये अन्न माल लेंगे। ५। परनन््त जा आप न भंजं गे ता हम न जा सकगे क्यांकि उस परुष ने हम से कहा कि जब लो तम्हारा भाई तम्हारे साथ न हे। तम मेरा मंह न देखाोगे। ६। तब इसराएल ने कहा कि तम ने मुकक से क्यों ऐसा बरा व्यवहार किया कि उस परुष से कहा कि हमारा और एक भाई
३ पब्ब] की पस्तक । <श्
७। तब वे बाले कि उस परुष ने हमें संकेती से हमारा ओर हमारे कुट व का समाचार पका कि क्या तम्हारा पिता अब ला जीता ह क्या तम्हारा और कोई भाई कै से हम ने बातों के ब्यवह्ाार के समान डसे कहा क्या हम निच्यय जानते थे कि वह हमें कहेगा कि अपने भाई का ले आओ ॥ ८ तब यहूटाह ने अपने पिता इसराएल से कहा कि इस तरुण के मेरे साथ कर टौजिये और हम उट चलेंगे जिसतें हम और आप और हमारे बालक जीव और न मरं॥ ८ । में उस का बिचवई कूगा आप मे रे हाथ से उसे ली जि- बेजो में उसे आप पास न लाऊं और आप के आगे न घरूं ते! आप यह दाषमम्कपर सदा घरिय॥ ९५०। क्यांकि जा हम विलंब न करते ता निश्चय अब ला दाहरा के फिर आये हाेते ॥ ५९५। तब उन के पिता इस- राएल ने उन्हें कहा कि जो अब यांहों ह ता यों करो कि इस ट्श के अच्छ से अच्छे फल अपने पात्रों में रख लेओ। और उस परुष के लिये भेंट ले जाओ थोड़ा नियास थाड़ा मघ कुछ संघ ट्रब्य ओर बेल ओर बतम और बदाम॥ २९२ । ओर टूना रोकड़ हाथ में लेओ और बुच्द राकड़ जो तुम्हारे बारों में फर लाया गया है अपने हाथ में फर ले जओ क्या जाने बच भल से हुआ हे( ॥ ९३। अपने भाई के! भी लेओ उठा ओर उस परुष पास जाओ ॥ १५४। ओर सामथों इंस्वर उस परुष के। तम पर दयाल करे जिसतें वह तुम्हारे दूसरे भाई ओर बिनयमीन का छोड़ ट वे ओर जो में निबंश हुआ ते। हुआ ॥ ९१५४। तब उन््हों ने वह भट लिया ओर हने राकड़ के! अपने हाथ में बिनयमीन समेत लिया ओर उठे ओर मिस के! उतर चुले ओर यसफ् के आग जा खड़े रण ॥ ९६। जब यसफ ने बिनयमौन को उन के संग ट्खा ता उस ने अपने घर के प्रधान के कहा कि इन परुणों के घर में ले जा और कुछ मा रके सिद्ट कर क्योंकि ये मनव्य दो पहर को मेरे संग खायंगे ॥ ५७। से जैसा |क यसफ ने कहा था उस परुष ने वैसाही किया ओर वह उन्हें वसफ के घर में लाया॥ १८०। तबववे यसुफ के घर में पहुंचाये जाने से डर गय और उन्हे ने कहा कि उस राकड़ के कारण जे। पहिले बार हमार बारां में फिर गया हम यहां प्रहुंचाये गय हें जिसते बुच्द हमारे बिरुड्ड एक कारण ढंढे ओर हम पर लपके ओर हमें पकड़के दास बनावे ओर हमारे गदहे के छीन लेवे ॥
द्र् डर्त्पात्त [४३ पन्चे १८ । तब उन््हों ने यूसफ के घर के प्रधान पास आके घर के द्वार पर उसमे बात चौत किई ॥ २०। और कहा कि महाशय हम निच्य॒य पहिले बेर अन्न मेल लेने आये थे। २२९। तो यों हुआ कि जब हम ने टिकाश्रय पर उतरके अपने बारों का खेला ते क्या ट्खते हैं कि हर जन का रो- कड़ उस के बोरों के मुंह पर है हमारा राकड़ सब पूरा था से। हम डसे अपने हाथ में फिर लाये हैं॥। २२। ओर अन्न लेने के और हम रोकड़ अपने हाथों में लाय हैं और हम नहीं जानते कि हमारा राकड़ किस ने हमार बारों में रख टिया॥ २३। तब उस ने कहा कि तम्हारा कुशल हेा।वे मत डरो तम्हारेईस्वर और तम्हारे पिता के ईश्वर ने तम्हारे बारों में तम्हें घन टिया हु तम्हारा राकड़ मर्के मिल चका फिर वह समऊन के उन पास निकाल लाया॥ २४। ओर उस जन ने उन्हें यसफ के घर में लाके पानी दिया और उन््होां ने अपने चरण घाये और उस ने उन के गद्हें के दाना घास दिया॥ २५। फिर उन््हों ने टो[ पहर का यूसुफ के आने पर भेंट सिद्ठ किया क्योंकि उन्हों ने सना था कि हमें भाजन यहीं खाना है॥ २६। और जब यूसफ् घर आया ते वे अपने हाथ की उस भेंट के भौतर लाये और डस के आगे भर ले टंडवत किई॥ २७। ओर उस जे उन से कुशल च्ञेम पछा ओर कहा कि तम्हारा पिता कुशल से हे वह ढड् जिस दी चत्चा तम ने किई थी अब ले जीता कहै॥ २८। और उन्हां ने उत्तर दिया कि आप का सेवक हमारा पिता कुशल से हे वह अब ला जीता ह फिर उन््हां ने सिर मकाके टंडबत किई॥ २<। फिर उस ने अपनी आंखें उठाई और अपनी माता के बटे अपने भाई बिनयमीन के। देखाओर कहा कि तम्हारा छटका भाई जिस कौ चच्चा तम ने मर से किई थी यददी हु फिर कह्दा कि हे मेरे बेट इंम्धर तस्क पर ट्याल रहे ॥ ३०। तब यसफ ने उतावजली किई क्योंकि उस का जी अपने भाई के लिये भर आया ओर रोने चाहा ज्यर वह केाटठरी में गया और वहां रोया॥ ३६९॥। फिर उस ने अपना मुंह घाया और बाहर निकला और आप के रोका ओर आज्ञा किई कि भेजन परोंसे | ३२। तब उन््हेंने उस के लिये अलग गैर उन के लिये अलग ओर समिखियों के लिये जे। उस के संग खाते थे अलग प रास इस लिये कि मिसरी
४४ पब्ब] कौ पुस्तक । <्३्
इबरानियाँ के संग भाजन नहों खा सक्ते क्योंकि वह मिखियों के लिय घिन क्षे। ३३। ओर पहिलौोंटा अपनी पहिलेटटाई के और छटका अपनी छटाई के समान वे उस के आगे बेठ गये तब वे आसश्य्य से एक दुसरे का देखने लगे॥ ३४। और उस ने अपने आगे से भेजन उन पास भेजा परन्त विनयमीन का भोजन हर एक के भाजन से पंच गन था और उन््हों ने उस के साथ जी भर के पीया ॥
े ४४ चौंतालीसवां पब्बे ।
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7र उस ने अपने घर के प्रधान का यह कहके आज्ञा किई कि उन
मनव्यां के बारों के। जितना वे ले जा सकें अन्न से भर दे और हर एक जन का राकड़ उस के बारे में डाल दे । २। ओर मेरा रूपे का कथारा छटके के बारे के मंह पर डस के अन्न के दाम समेत रख द से। उस ने यूसुफ की आज्ञा के समान किया ॥
३। ओर ज्यांहों दिन निकला वे अपने गदहे समेत विदा किये गये॥ ४। जब वे नगर से थाड़ी द्वर बाहर गये यसफ ने अपने घर के प्रधान के कहा कि उठ ओर उन लोगों का पीछा कर और जब त उन्हं जा लवे ता डन्हं कह कि किस लिय तुम लागां ने भलाई की संती बराई किई हे॥ ५। क्या यह वह नहों जिस में मेरा प्रभ पीता क्ते उस कौ नाई काई आगम का सच्चा संदृश दता हे तम ने इस में बरा किया क्षे । ६। ओर उस ने उन्हें जा